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1185....कव्हर स्टोरी.....उत्तर भारत संस्कृति दस्तक ”टैसू झैंजी”

सादर अभिवादन...बीत रही नवरात्रि आ रहा है दशहरा....ऐसे टैसू-झैंझी को याद करना ही कर्तव्य हैचलिए पढ़े कव्हर स्टोरी..... ”टैसू झैंजी” प्रेम विवाह : पवित्र दंत कथाउत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश व राजस्थ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
Yashoda Agrawal
पाँच लिंकों का आनन्द
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तुम थे तो हम थे... राहुल कुमार

लम्हे वो प्यार के जो जिए थे, वजह तुम थेख्वाब वो जन्नत के जो सजाये थे, वजह तुम थे दिल का करार तुम थे,रूह की पुकार तुम थेमेरे जीने की वजह तुम थेलबों पे हँसी थी जो , वजह तुम थेआँखों में नमी थी जो, वजह त...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
Yashoda Agrawal
मेरी धरोहर
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ठहरी सी रात

ठहरी है क्यूँ ये रात यहीं .....क्या मेरे ही संग, नीरवता का मन भरा नहीं?हर क्षण, संग रही मेरे क्षणदा,खेल कौन सा, जो संग मेरे इसने ना खेला!ऊब चुका मैं, क्षणदा थकती ही नहीं,आँगन मेरे ही है ये क्यूँ रुकी?ठह...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
पुरूषोत्तम कुमार सिन्हा
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आवश्यकता

      चर्च के जवानों के कल्ब के अन्तर्गत आयोजित की जाने वाली फिल्म दिखाने की संध्या, जिसके लिए बहुत प्रार्थनाएं चल रही थीं, अन्ततः आ गई थी। सारे गाँव में इसके विषय पोस्टर लगाए गए थे, और तं...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
Roz Ki Roti
रोज़ की रोटी - Daily Bread
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धरम बिना आवाज का कैसा होता है रे तेरा कैसे बिना शोर करे तू धार्मिक हो जाता है

किसलिये खोलता है खुद ही हमेशा अपनी पोल तेरी सोच में और तुझमें भी हैं ना जाने कितने झोल दुनियाँ पढ़ दुनियाँ लिख कभी बक बक छोड़ दुनियाँ सोच की आँखें खोल पण्डित है सुना है पण्डिताई तक नहीं दिखला ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
डा0 सुशील कुमार जोशी
उल्लूक टाईम्स
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किन कारणों से डलहौजी ही घमना था |

            https://comptition.blogspot.comडलहौजी का परिचय-खासियत क्या है -क्या देख सकते है -कब जाए-जाना कैसे है -  खाने का स्थान-क्या खरीदारी करें -                                           ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
Childless Women Specialist BABA JI +91-9909794430
घुमक्कड़ यात्रा
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''नोटा''पर मतदान : बौद्धिक विलासिता या आक्रोश विरोध का हथियार !!

''नोटा''पर मतदान : बौद्धिक विलासिता या आक्रोश विरोध का हथियार !!बिहार विधान सभा अध्यक्ष श्री विजय कुमार चौधरी का ''नोटा''के विरोध में लिखा लेख 29 अगस्त के हिंदी दैनिक 'हिन्दुस्तान 'में प्रकाशित हुआ ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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एक ग़ज़ल : वातानुकूलित आप ने---

वातानुकूलित आप ने आश्रम बना लिएसत्ता के इर्द-गिर्द ही धूनी रमा  लिए’दिल्ली’ में बस गए हैं ’तपोवन’ को छोड़कर’साधू’ भी आजकल के मुखौटे चढ़ा लिएसब वेद ज्ञान श्लोक ॠचा मन्त्र  बेच करजो धर्म बच गय...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
1

रात शबनमी

1 सप्ताह पूर्व
Childless Women Specialist BABA JI +91-9909794430
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पागलों की फ़ौज में...

दुनिया में मशहूर कौन...?सब पागल और जिद्दी हैंबाकी सब तो चौसर केछोटे-छोटे पिद्दी हैंनाम लिखाओ आप भीपागलों की फ़ौज में...जुट जाओ जो करना है फिरअपनी-अपनी मौज में...- कंचन ज्वाला कुंदन ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
kanchan jwala kundan
कुंदन के कांटे
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चिंता कीजिए, मस्त रहिए

जबमेरे कने करने को कुछ खास नहीं होता, तब मैं सिर्फ 'चिंता'करता हूं। 'चिंता'मुझे 'चिंतन'करने से कहीं बेहतर लगती है! मुद्दा या मौका चाहे जो जैसा हो, मैं चिंता करने का कारण ढूंढ ही लेता हूं। ऐसा कर मुझ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
Anshu Mali Rastogi
चिकोटी
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पिता ...डा श्याम गुप्त

पिता ...डा श्याम गुप्त पिता=====एक पिताझेलता है कितने झंझावात, संसार के द्वेष-द्वन्द्व, छल-छंद; भरने हेतुसमाज के सरोकार |करने हेतु,सात बचनों की पूर्तिपरिवार की आशाओंपत्नी की इच्छाओं, संतान की सुख ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
भारतीय नारी
0

पिता ...डा श्याम गुप्त

पिता=====एक पिताझेलता है कितने झंझावात, संसार के द्वेष-द्वन्द्व, छल-छंद; भरने हेतुसमाज के सरोकार |करने हेतु,सात बचनों की पूर्तिपरिवार की आशाओंपत्नी की इच्छाओं, संतान की सुख अभिलाषाओंव उनका भविष...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
3

माँ

1 सप्ताह पूर्व
Abhilasha
@Abhi
2

तुझे एक नजर देखा है .... नीतू ठाकुर

रेशमी जुल्फ में बिखरे सुनहरे ओस के मोतीहमें बेचैन ना करते अगर चाहत नही होतीतेरी खामोश नजरों ने बहुत कुछ कह दिया हमसेतुम्हारी मुस्कुराहट ने निकाला है हमें गम सेतेरा ख़्वाबों में ख्यालों में ब...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
Nitu Rajnish Thakur
MAN SE- Nitu Thakur
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दोहे "जीवन से अनुबन्ध" (राधा तिवारी 'राधेगोपाल')

छोड़ा सिय के साथ को, सुन मूरख की बात।सीता को होगा लगा, तब कितना आघात।।मनुज आज तो कर रहा, जीवन से अनुबन्ध।नून-मिर्च, गुड़ से हुआ, भंग आज सम्बन्ध।।मधुमेह के ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
राधे गोपाल
राधे का संसार
1

Vipeenchandra Pal

Vipeenchandrapal
Vipeenchandrapal
1 सप्ताह पूर्व
Vipeenchandra Pal
0

Vipeenchandra Pal

Vipeenchandrapal
Vipeenchandrapal
1 सप्ताह पूर्व
Vipeenchandra Pal
0

Vipeenchandra Pal

Vipeenchandrapal
Vipeenchandrapal
1 सप्ताह पूर्व
Vipeenchandra Pal
0

Vipeenchandra Pal

Vipeenchandrapal
Vipeenchandrapal
1 सप्ताह पूर्व
Vipeenchandra Pal
0

Vipeenchandra Pal

Vipeenchandrapal
Vipeenchandrapal
1 सप्ताह पूर्व
Vipeenchandra Pal
0

काम के दोहे,

           घर में  यदि व्यंजन बने, रखो  पड़ोसी ध्यान,           सुख मिलता है सौ गुना, बनती निज पहिचान |मन में आये माँग कर, वाहन सुख का ख्याल,ईधन  पूरा  भरा  कर,   लौटाओ &nbs...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
Dr. Harimohan Gupt
Dr. Hari Mohan Gupt
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दोहे "जीवन से अनुबन्ध" (राधा तिवारी "राधेगोपाल")

छोड़ा सिय के साथ को, सुन मूरख की बात। सीता को होगा लगा,तब कितना आघात।।मनुज आज तो कर रहा, जीवन से अनुबन्ध। नून-मिर्च, गुड़ से हुआ, भंग आज सम्बन्ध।।मधुमेह के रोग...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
राधे गोपाल
राधे का संसार
3

ब्राउज़र क्या हैं? लोकप्रिय ब्राउज़र कौनसे हैं?

Popular Browserनमस्कार मित्रों, स्वागत है आपका अपना अंतर्जाल पर। आज की पोस्ट में बताऊंगा ब्राउज़र और उसके प्रकार आज की पोस्ट उनके लिए है जो अभी इंटरनेट पर नए है, क्योंकि बाकि तो सभी जानते हैं की ब्राउज़र ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
दिनेश प्रजापति
अपना - अंतर्जाल
2

वेब ब्राउज़र क्या हैं? लोकप्रिय ब्राउज़र कौनसे हैं?

Popular Browserनमस्कार मित्रों, स्वागत है आपका अपना अंतर्जाल पर। आज की पोस्ट में बताऊंगा ब्राउज़र और उसके प्रकार आज की पोस्ट उनके लिए है जो अभी इंटरनेट पर नए है, क्योंकि बाकि तो सभी जानते हैं की ब्राउज़र ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
दिनेश प्रजापति
अपना - अंतर्जाल
0

वन्दना "मनके मनकों को तुम, माता उज्जवल कर दो" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

माँ मेरी रचना में, कुछ शब्द सरल भर दो।गीतों के सागर से, सब दूर गरल कर दो।। दिन-रात तपस्या कर, मैंने पूजा तुमको,जीवन भर का मेरा, संधान सफल कर दो।गीतों के सागर से, सब दूर गरल कर दो।। कुछ ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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1184... जय माता दी

यथायोग्य सभी कोप्रणामाशीषकुर्ते पै छपीसिंदूर की रंगोली-विजयोत्सवसुना है राम.तुमने मारा था मारीच को.जब वह.स्वर्णमृग बन दौड़ रहा था.वन-वन ।तुमने मारा था रावण को.जब वह.दुष्टता कीविजयथी कमी कुछ ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
Yashoda Agrawal
पाँच लिंकों का आनन्द
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बीच भँवर में डोले कश्ती.......डॉ. रजनी अग्रवाल 'वाग्देवी रत्ना'

जीवन में आई बाधाएँहमको नाच नचाती हैं,सुलझ न पाए गुत्थी कोईउलझन ये बन जाती हैं।असमंजस का भाव जगातींदिल को ये भटकाती हैं,मृग शावक से चंचल मन कोव्याकुल ये कर जाती हैं।रिश्तों के कच्चे धागों में...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
Yashoda Agrawal
मेरी धरोहर
0


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