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नई हलचल

दोहे "रखना कभी न खोट" (राधा तिवारी "राधेगोपाल ")

रखना कभी न खोट लिखती हूं तुम पर सदा, दोहे गजलें गीत ।आकर के वाचन करो ,ओ मेरे मनमीत ।।प्रियतम तुमसे है सदा ,मेरा यह सिंगार ।साथ तेरा मुझको लगे ,जीवन का आधार ।। साजन सजनी से कहे, आ जाओ तुम पास l त...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
राधे गोपाल
राधे का संसार
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महत्वपूर्ण

   दो जन अपने व्यवासायिक दौरे और उसके परिणामों की समीक्षा करने के लिए बैठे। एक ने कहा कि उसे लगता है कि दौरा सफल रहा क्योंकि उनके व्यावासायिक संपर्कों के द्वारा कुछ नए और सार्थक संबंध बनने आ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Roz Ki Roti
रोज़ की रोटी - Daily Bread
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मैगी बनाने का नया तरीका Cook Maggi In New Style

         मैगी का स्वाद बहुत ही अनोखा होने के कारण मैगी खाना सभी बहुत पसन्द करते हैं बच्चों को तो इसका स्वाद बहुत ही पसन्द आता हैं हम अच्छे तरीके से मैगी बनाकर इसका स्वाद और भी बढ़ा सकते हैं।...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Seema Kaushik
सीमा की रसोई (Seema Ki Rasoi)
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मैं और तुम

2 सप्ताह पूर्व
Deepa Joshi
अल्प विराम
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दादा किसे दिखा गए आईना?

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मंच पर जाकर क्या बोला, उससे ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि वे उस मंच पर गए। यह बात अब इतिहास के पन्नों पर दर्ज हो चुकी है। इस सिलसि...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Pramod Joshi
जिज्ञासा
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देख कर भी जो नहीं देखा !

एक कविता.... कुछ अदेखा सा जो यूं ही गुज़र जाता है व्यस्त लम्हों के गुजरने के साथ और हम देखकर भी नहीं देख पाते , न उसका सौंदर्य , न उसकी पीड़ा, न ख़ामोशी , और न ही संवेग सब कुछ किसी मशीन से निकलते उत्पाद क...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Aparna Bajpai
Bol Skhee Re ( साहित्यिक सरोकारों से प्रतिबद्ध )
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सनौली के माध्‍यम से हमारी सभ्‍यता का इतिहास दोबारा लिखा जाएगा

किसी भी देश के अस्‍तित्‍व को उसकी सभ्‍यता के वर्षों पुराने इतिहास से आंका जाता है। आज के इस लेख से पहले मैंने एक बार लिखा था कि ''पहले हिन्दू राष्ट्र था अफगानिस्‍तान में 5000 हजार वर्ष पुराना विमा...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Alaknanda singh
अब छोड़ो भी
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क्या मिलिए ऐसे लोगों से जिनकी नीयत छुपी रहे, नकली चेहरा सामने आए असली सूरत छुपी रहे

हरेश कुमार#दोटूकक्या मिलिए ऐसे लोगों से...मुस्लिम और क्रिश्चियन संगठनों की कार्यप्रणाली से तंग लोग भारतीय जनता पार्टी की ओर आशा भरी निगाहों से आते हैं, लेकिन देखने में यह आ रहा है कि  कुछ को छ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Haresh
Information2media
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कृष्ण की इस प्रेम दीवानी पर राजस्थानी में बनेगी फिल्म

गुजराती, हिंदी और अंग्रेजी में भी बनेगी मीरा बाई पर फिल्मजयपुर।मीरा बाई और उनका कृष्ण प्रेम एक बार फिर बड़े परदे पर दिखाई देगा। इस महान प्रेम कहानी पर राजस्थानी भाषा में फिल्म बनेगी। साथ ही इस...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
rajasthani cinema
राजस्थानी सिनेमा
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व्यंग्य में 'पाथ ब्रेकिंग'

जीवनमें सफलता का रास्ता अच्छा पढ़ने या अच्छा करियर बनाने से ही नहीं निकलता, 'पाथ ब्रेकिंग'से भी निकलता है। 'पाथ ब्रेकिंग'की अवधारणा को काफी हद तक स्वरा भास्कर ने साबित भी किया है। खुलकर बताया कि ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Anshu Mali Rastogi
चिकोटी
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गुरुद्वारा लिखनसर साहिब – यहां लिखा गया गुरुग्रंथ साहिब

तलवंडी साबो के दमदमा साहिब गुरुद्वारा परिसर में गुरुद्वारा लिखनसर साहिब नजर आता है। यहां आने वाले श्रद्धालु गुरुद्वारा के बगल में बने स्थल पर पेंसिल से कुछ सदविचार लिखते नजर आते हैं। खास तौ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Vidyut Prakash Maurya
दाना-पानी
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कठमुल्लों, कांगियों, वामियों और इसाई संगठनों की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से फटती क्यों है

हरेश कुमारराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नाम से कांग्रेस,कठमुल्लों, इसाई संगठनों और वामियों की फटती क्यों है?उत्तर- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इन सबकी दुकानों पर ताले लगाने में सराहनीय काम किय...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Haresh
Information2media
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मैं सोचता हूँ....

मैं सोचता हूँ, एक ख़्वाब बुनूं,हीरे-मोती, माहताब चुनूं...दिखला दूं, कौन हूँ! दुनियाँ को,मन में अक्सर यही बात गुनूं...क्यों बरखा भाए मधुबन को,शीतल कर जाए तन-मन को,भीगेगीं अल्हड़ पंखुड़ियाँ,उस पल बूंदों ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
रवीन्द्र पाण्डेय
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
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दोहे "गढ़ता रोज कुम्हार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आहत वृक्ष कदम्ब का, तकता है आकाश। अपनी शीतल छाँव में, बंशी रहा तलाश।।माटी जैसी हो वही, देता है आकार।कितने श्रम पात्र को, गढ़ता रोज कुम्हार।।शब्दों में अपने नहीं, करता कभी कमाल।कच्ची माटी ज...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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babaji ikbai khan

ikabalknan
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2 सप्ताह पूर्व
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babaji ikbai khan

2 सप्ताह पूर्व
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2 सप्ताह पूर्व
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ikabalkhan
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2 सप्ताह पूर्व
babaji ikbai khan
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babaji ikbai khan

ikabalkhan
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2 सप्ताह पूर्व
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Rector Kathuria

ikbal khan
ikbal khan
2 सप्ताह पूर्व
Rector Kathuria
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पलकों तले रात

न जाने, क्या-क्या कहती जाती है ये रात....पलकों तले, तिलिस्म सी ढ़लती ये रात,धुंधली सी काली, गहराती ये रात,झुनझुन करती इतराती कुछ गाती ये रात,पलकों को, थपकाकर सुलाती ये रात!नींद में डबडब, बोझिल होती ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
पुरूषोत्तम कुमार सिन्हा
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Vipeenchandra Pal

Vipeenchandrapal
Vipeenchandrapal
2 सप्ताह पूर्व
Vipeenchandra Pal
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1058... शादी की सालगिरह

सभी को यथायोग्यप्रणामाशीषआज हमारी शादी की सालगिरह हैउपहार चयन मुश्किल नहींशादी की सालगिरहशादी की सालगिरहशादी की सालगिरहफिर  मिलेंगे .....तब तक चलेंहम-क़दमके बाईसवें विषय की ओर..इस सप्ताह...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Yashoda Agrawal
पाँच लिंकों का आनन्द
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दस्तक दहलीज पर.................कुसुम कोठारी

दस्तक दे रहा दहलीज पर कोईचलूं उठ के देखूं कौन हैकोई नही दरवाजे परफिर ये धीरे धीरे मधुर थाप कैसीचहुँ और एक भीना सौरभदरख्त भी कुछ मदमाये सेपत्तों की सरसराहटएक धीमा राग गुनगुना रहीकैसी स्वर लहर...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Yashoda Agrawal
मेरी धरोहर
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दोहे "मात -पिता का साथ" (राधातिवारी "राधेगोपाल")

मात -पिता का  साथआड़ी-तिरछी हो भले ,चाहे वह हो गोल ।रोटी माँ के हाथ की ,होती है अनमोल ।।पछतावा करना पड़े, करो न ऐसे काम । मात- पिता के चरण में, होते चारों धाम ।। केवल बेटों से नहीं, होती घर की शान। ब...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
राधे गोपाल
राधे का संसार
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मानव ज्ञान का चरित्र और विकास ✍ सनी

इंसान ने अपने जीवन की संघर्षपूर्ण यात्रा की शुरुआत आज से लगभग 2,50,000 साल पहले की थी। उसने इस दौरान धरती पर हो रही अद्भुत गतिमान परिघटनाओं को समझा, उनमें से कुछ को अपने काबू में करना सीखा है। समुद...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Nazariya Now
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कहो कालिदास , सुनें मेरी आवाज़ में

विद्वता के बोझ तले दबे हर पुरुष को समर्पित यह कविता मेरी आवाज़ में सुनें...यह कविता आप इससे पूर्व वाली पोस्ट में पढ़ भी सकते हैं......  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Aparna Bajpai
Bol Skhee Re ( साहित्यिक सरोकारों से प्रतिबद्ध )
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बिलासपुर में जल आपातकाल पर कोसो में, सोचो...

 ✍ बरुण सखाजीएकशहर जिसमें 14 अच्छे खासे तालाब हों, एक अंतःसलिला विराट नदी बहती हो, वहां जल-आपातकाल शर्मनाक है। यह शर्म औ लानत सिर्फ मंत्री, विधायक, सांसद, कलेक्टर, एसपी, आयुक्त को न फेंकिए, अपने ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Barun Sakhajee
आम आदमी सरकारी चंगुल में......
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