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आओ खुद से बातें करें

कल की चिंता कल पे छोड़ेंआओ खुद से बातें करेंरूख मंजिल की तरफ ही मोड़ेंआओ खुद से बातें करेंअपने मन की गांठें तोड़ेंआओ खुद से बातें करेंटूटे दिल को फिर से जोड़ेंआओ खुद से बातें करें- कंचन ज्वाला कुं...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
kanchan jwala kundan
कुंदन के कांटे
4

धीरे-धीरे-हौले-हौले जीवन गढ़ो

साहस रखोआगे बढ़ोऊपर देखोऊपर चढ़ोआप देखो अपना हीचेहरा पढ़ोधीरे-धीरे-हौले-हौलेजीवन गढ़ो- कंचन ज्वाला कुंदन ...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
kanchan jwala kundan
कुंदन के कांटे
3

खाओ-पीओ और मर जाओ क्या इसलिए आये हैं

उड़ेलकर अमृत कोविष लिए आये हैंखाओ-पीओ और मर जाओक्या इसलिए आये हैंफिर कहो दुनिया में हमकिसलिए आये हैं- कंचन ज्वाला कुंदन ...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
kanchan jwala kundan
कुंदन के कांटे
2

वासना का दलदल क्यों उसकी स्वीकृति है

इंसान तो खुदा कीअनमोल कृति हैजहर से भरा फिरक्यों आकृति हैपाप की पूंज क्योंउसकी स्मृति हैजानवर सरीखा क्योंउसकी प्रकृति हैवासना का दलदल क्योंउसकी स्वीकृति है- कंचन ज्वाला कुंदन ...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
kanchan jwala kundan
कुंदन के कांटे
3

Amazing facts About Google In Hindi

Googleके बारे में तो जानते ही होंगे गूगल सबसे बड़ा सर्च इंजिन है । जहाँ पर हम कुछ भी सर्च करके कोई भी जानकारी हासिल कर सकते है । आज की इस पोस्ट में हम  google के अमेज़िंग रोचक तथ्य  जानेंगे |Intresting Facts About Go...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
IndrasiNh Solanki
Indrasinh Solanki - Everything Is Here
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भीड़ और भेड़ चाल

भीड़ और भेड़ चाल कतई पसंद नहीं मुझे मैं अकेले ही चलता हूँ किसी कारवां की तरह... ...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
kanchan jwala kundan
कुंदन के कांटे
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रविकर के दोहे (16 Oct 2018)

अच्छी बातें कह चुका, जग तो लाखों बार।किन्तु करेगा कब अमल, कब होगा उद्धार।।अच्छी आदत वक्त की, करता नहीं प्रलाप।अच्छा हो चाहे बुरा, गुजर जाय चुपचाप।।अर्थ वन्दना के छले, खले धूप की गंध।मदन बदन पर ...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
रविकर
"लिंक-लिक्खाड़"
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दोहे "विद्वानों के वाक्य" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

छन्दों का जिनको नहीं, लेशमात्र भी ज्ञान।नहीं परोसें छन्द में, निज मन का विज्ञान।।छन्द नहीं जो जानते, सुन लो एक सुझाव।मुक्तछन्द में ही रचो, निज मन के अनुभाव।।गणना अक्षर-शब्द की, होती है क्या च...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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प्राचीनतम माँ खैरा भवानी मन्दिर जहाँ होती है भक्तो की मनोकामना की पूर्ति

गोण्डा। जनपद के प्रसिद्ध मन्दिरो में मां खैरा भवानी का मन्दिर विख्यात है। जो कि मुख्यालय से मात्र एक किलोमीटर की ...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
vedprakash srivastav
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वेब सर्च इंजन क्या है? यह कैसे काम करता है?

Popular Web Search Engineनमस्कार मित्रों, जैसा की सब जानते है की वेब पर किसी भी विषय के बारे में जानना हो तो ब्राउज़र के एड्रेस में लिखते है और सर्च कर लेते है, जो की ब्राउज़र में सेव पहले से ही डिफाल्ट सर्च इंजन ह...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
दिनेश प्रजापति
अपना - अंतर्जाल
0

वेब सर्च इंजन क्या है? यह कैसे काम करता है?

Popular Web Search Engineनमस्कार मित्रों, जैसा की सब जानते है की वेब पर किसी भी विषय के बारे में जानना हो तो ब्राउज़र के एड्रेस में लिखते है और सर्च कर लेते है, जो की ब्राउज़र में सेव पहले से ही डिफाल्ट सर्च इंजन ह...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
दिनेश प्रजापति
अपना - अंतर्जाल
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करो मेहनत,

तुम करो मेहनत अभी से, लक्ष्य हो परहित तुम्हारा,देश की  हो  सहज सेवा,  धर्म  होता  है  हमारा |एक जुट हो कर  करेंगे, फल तभी  हमको मिलेगा,है यही उद्देश्य सबका, हो,  प्रगति  ढूढें  किनार...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
Dr. Harimohan Gupt
Dr. Hari Mohan Gupt
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नींद

कब नींद ढ़ुलकती है, नैनो में कब रात समाता है....सांझ ढले यूँ पलकों तले,हौले-हौले कोई नैनों को सहलाता है,ढ़लती सी इक राह पर,कोई हाथ पकड़ कहीं दूर लिए जाता है.....बंद पलकों को कर जाता है....कब नींद ढ़ुलकत...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
पुरूषोत्तम कुमार सिन्हा
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वस्तु उपाय

☆☆ ज्योतिष-झरोखा - 105★ नक्षत्र + निवास •• आजकल समय और परिस्तिथियाँ ऐसे हो गए हैं कि - अपना घë...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
Ashish
कानपुर पत्रिका
1
1

1187..बेवफा वो नहीं फिर वजह क्या हुई, इंतज़ार की

सादर अभिवादनइम्तेहां हो गई इंतज़ार की आई ना कुछ खबर, मेरे यार की ये हमें है यक़ी, बेवफा वो नहीं फिर वजहक्या हुई, इंतज़ार की-*-*-*-जी हाँयही है आने वाले सप्ताह का विषयहम-क़दम सभी के लि...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
Yashoda Agrawal
पाँच लिंकों का आनन्द
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ये आँसू यूँ ही तो बहते नहीं हैं ......रंजना वर्मा

वजह बिन फ़ासला रखते नहीं हैं किसी से दुश्मनी करते नहीं हैं भरेंगे जल्द ही सब घाव तन केजखम अब ये बहुत गहरे नहीं हैं समझ लेता सभी का दर्द है दिलये आँसू यूँ ही तो बहते नहीं हैं सहेजी अश्क़ क...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
Yashoda Agrawal
मेरी धरोहर
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जिस गोंगपा के लिए कांग्रेस ने गंवाया अपना वजीर उसकी ताकत सिर्फ एक फीसदी वोट

बरुण सखाजी.बिलासपुर. कांग्रेस ने जिस गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के लिए अपने कार्यकारी अध्यक्ष को खो दिया उसकी पूरे प्रदेश में ताकत महज 2 लाख वोटों की है। गोंडवाना छत्तीसगढ़ विधानसभा में एक बार ...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
Barun Sakhajee
आम आदमी सरकारी चंगुल में......
9

जोगी परिवार का राज-जोग, ऋचा हाथी से अकलतरा, अमित मनेंद्रगढ़, अजीत मरवाही जाएंगे, रेणु कांग्रेस में ही रहेंगी

बसपा-जकांछगठबंधन में 5 सीटों को लेकर एक बार फिर से बात हुई। अब नए समीकरण के हिसाब से बसपा 30 पर और जकांछ 58 पर लड़ेगी। जबकि 2 सीटें सीपीआई को बस्तर में दे दी गई हैं। लेकिन इसमें सबसे अहम कड़ी यह होगी ...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
Barun Sakhajee
आम आदमी सरकारी चंगुल में......
6

वफादारी

      ओकलाहोमा के एक 12 वर्षीय लड़के, केड पोप ने, अमेरिका की राष्ट्रीय फुटबॉल लीग (NFL) की 32 विभिन्न टीमों के अध्यक्षों को हस्तलिखित पत्र डाक द्वारा भेजे। केड ने उन्हें लिखा, “मैं और मेरा परिवा...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
Roz Ki Roti
रोज़ की रोटी - Daily Bread
4

आँसू

6 दिन पूर्व
Deepa Joshi
अल्प विराम
0

प्रीत की रीत

7 दिन पूर्व
Childless Women Specialist BABA JI +91-9909794430
0

ग़ज़ल "मुफ़लिसी के साए में अपना सफ़र चलता रहा" (गुरु सहाय भटनागर 'बदनाम')

मित्रों!आज श्रद्धाञ्जलि के रूप में अपने अभिन्न मित्रस्व. गुरु सहाय भटनागर 'बदनाम'की एक ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँआदमी फिर ज़िन्दगी के बोझ से मरता रहाआदमी है आदमी को देखकर हँसता रहाइक तर...  और पढ़ें
7 दिन पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
4

कुछ कथनी है कुछ करनी है अंदर-बाहर अंतर है

बाहर क्यों भटकते होसारा चीज तो अंदर हैअपने अंदर जाकर खोजोदुनिया मस्त कलंदर हैबेवजह यूँ तिकड़मबाजीमन का क्यों पटंतर हैकुछ कथनी है कुछ करनी हैअंदर-बाहर अंतर हैहम ही हम को समझ ना पायेचंचल मन तो ...  और पढ़ें
7 दिन पूर्व
kanchan jwala kundan
कुंदन के कांटे
3

आज का देखो भ्रांतिराम

क्रोध में ही पलता हैक्रोध लेके चलता हैआज का देखो शांतिरामबूझा-बूझा लटका-लटकाउतरा-उतरा चेहरा हैआज का देखो कांतिरामगाँधी का है अनुगामीचंद्र बोस का फिर भी नामीआज का देखो भ्रांतिरामशांति दूत ह...  और पढ़ें
7 दिन पूर्व
kanchan jwala kundan
कुंदन के कांटे
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जिसने सबकी लुटिया डुबाया

क्रोध ने मेरा घर ढहायाक्रोध ने मेरा घर बहायाघर-आँगन की दूरियां बढ़ गईक्रोध ने ऐसा जाल बिछायामैंने दिल अपनों का तोड़ाक्रोध ने कितने बार फँसायाक्रोध अचूक हथियार है कुंदनजिसने सबकी लुटिया डुबाय...  और पढ़ें
7 दिन पूर्व
kanchan jwala kundan
कुंदन के कांटे
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