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नई हलचल

एक किताब : 51 जदीद साइंसी तहकीकात - जो दरअसल इस्लाम की हैं.

एक किताब : 51 जदीद साइंसी तहकीकात - जो दरअसल इस्लाम की हैं.लेखक : जीशान हैदर जैदीप्रकाशक : अब्बास बुक एजेंसी, लखनऊ,इस किताब में 51 ऐसी आधुनिक साइंसी खोजों को शामिल किया गया है जिनके बारे में पु...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Dr. Zeashan Zaidi
Ya Husain Ya Shah-E-Karbala
76

क्रियेटर और क्रियेशन - 1 (एटम)

दोस्तों, पेश है एक नई सीरीज. उम्मीद है पसंद आएगी.तमाम तारीफें उस अल्लाह के लिये जो तमाम आलमीन का रब है। वही क्रियेटर है पूरी कायनात का। वह किसी मखलूक के मिस्ल नहीं है। उसी ने वक्त और जगह को पैदा क...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Dr. Zeashan Zaidi
Ya Husain Ya Shah-E-Karbala
90

चिड़ीमार से संरक्षणवादी बनने का सफ़र

 दो दिन पहले एक ऐसे ब्यक्ति से मिलने का अवसर मिला. जिससे मिलने के बाद पता लगा कि जिस ब्यक्ति से मैं मिल रहा हूँ वह ब्यक्ति एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शख्सियत है. यह ब्यक्ति एकदम सीधा-साद...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
ATUL WAGHMARE
0

चिड़ीमार से संरक्षणवादी बनने का सफ़र

 दो दिन पहले एक ऐसे ब्यक्ति से मिलने का अवसर मिला. जिससे मिलने के बाद पता लगा कि जिस ब्यक्ति से मैं मिल रहा हूँ वह ब्यक्ति एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शख्सियत है. यह ब्यक्ति एकदम सीधा-साद...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
corbettnews
कॉर्बेट न्यूज़
183

My Inner voice -poem

oh my most dear !do'nt say me beautiful ,I am not a ''doll ''oh my most dear!do'nt compare my eyeswith a '' lake-depth ''oh my most dear !do'nt give me ornamentas a special gift ''oh my most dear !do'nt praise my hairsor face ,i am not a product ''oh my most dear !now i know thatthese praises arefabulous  &facetious .oh my most dear !You must praise my''prudence'' &''Firmness''against evils .oh my most dear !You must praise mystrong ''vitality''& mental power .oh my most dear !I...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
earthly heaven
111
मेरी बात तेरी बात...
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मेरी बात तेरी बात...
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मेरी बात तेरी बात...
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मेरी बात तेरी बात...
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मेरी बात तेरी बात...
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मेरी बात तेरी बात...
38
मेरी बात तेरी बात...
41
मेरी बात तेरी बात...
25

खेत में सिंदूर...

बिहार के भागलपुर ज़िले के गांव कजरैली की महिलाएं खेत में सिन्दूर उगा रही हैं...सिन्दूर के इन पौधों के फलों से बीज निकाल कर उन्हें हथेली पर मसलने पर उनमें से सिन्दूरी रंग निकलता है...इसी प्राकृति...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
मेरी डायरी
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आभासी सुबूत - तीसरी (अंतिम) किस्त

मारिसन जब इं-राफेल और वैशाली को लेकर उस मज़दूर के पास पहुंचा तो वह खुदाई की मशीन के पास मौजूद मशीन आपरेटर की मदद कर रहा था। मारिसन ने मशीन आपरेटर से मशीन रोकने के लिये कहा। मशीन रुक गयी और उस मज़...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Dr. Zeashan Zaidi
Hindi Science Fiction हिंदी साइंस फिक्शन
58

"झूठे चेहरे..!!"

न जाने कितने चेहरे लगा कर रखते हैं लोगरोज़ एक नया रूप अपना दिखाते हैं लोग किसी को पूरी तरह से समझ सको तुम इससे पहले ही अक्सर बदल जाते  हैं लोग सच के साथ चलना अब भूल चुके हैं लोगएक झूठ छुपा...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
suman sourabh
..Tum Suman..!!
90

माँ

मां, इस एक शब्द को सुनने के लिए नारी अपने समस्त अस्तित्व को दांव परलगाने को तैयार हो जाती है। नारी अपनी संतान को एक बार जन्म देती है।लेकिन सच तो यह है कि बच्चे के बड़े होने तक अलग-अलग रूपों में खु...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
sakhi
sakhi with feelings..kahaniya/Articles
98

JUST FOR YOU ....!!!

  A cozy night of chilling winter waves …Beside a lake front …Wrapped by a thin fabric …White fabric, which will be displaying only our love and nothing else…Talking nothing …Sitting in silence...A silence of unspoken words…..Words of love …….!!!As the full moon shines its milky shades on our faces,I hold your face slowly in my both hands,And say those three magic words...I LOVE YOU ...But ,to realize the dreams, Sometimes we have to leave ,our life much behind;So that,We ca...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
FROZEN MOMENTS OF A LIFETIME..............................
180

"खटीमा मॉर्निंग ने भी अपना दायित्व निभाया"

खटीमा (उत्तराखण्ड) से प्रत्येक बृहस्पतिवार कोप्रकाशित होने वाले साप्ताहिक समाचारपत्र5 मई से 11 मई के अंक मेंपृष्ठ-10 पर"खटीमा मॉर्निंग" ने भी "कविमंच" पर पूरा पृष्ठ मेरे सम्मान में प्रकाशि...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
110

वह परेशान है

वह परेशान हैक्यों परेशान है यह किसी को नहीं पताबस परेशान हैअच्छी चीजें उसे अच्छी नहीं लगतींबुरी चीजों से उकताता नहींऐसा लगता है जैसे कुछ मरा हुआ होउसके अंदरया फिर मरता जा रहा होशांत सी लगती ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Manish Mishra
अक्षत-मन AKSHATMANN
60

तुम्हे ही हमसफ़र मान बैठे

मसला हल करने जो बैठेचमन को सरहदों से बाँट बैठेतुम जो कुछ साथ चलेतुम्हे ही हमसफ़र मान बैठेकश्तियाँ टूट के बिखर गयीनाविक तिनके की आस पे बैठेदिन में टूटा जो मजदूरशाम को तारों की छाँव में बैठेनाय...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Shankar M
Thoughtscroll
67
योगेन्द्र पाल की सूचना प्रौद्योगिकी डायरी
120

8 वर्ष पूर्व
Dr.Radhika Budhkar
आरोही
25

लेखा-बही

बहुत दिनों से लिखना नहीं हो पा रहा है। इधर रीवा से श्रद्धेय डॉ.पियुष श्रीवास्तव की एक शोध व बोधपरक पुस्तक "अनंत यात्रा, धर्म का विज्ञान" प्राप्त हुए कई दिन हो गये तथा उसे दो-तीन बार पढ भी लिया, कि...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
amitabh shrivastava
अमिताभ
75

ईमानदार बाल मामाजी की बेईमान यादें-1

आज सोचता हूं तो शर्म आती है कि मैं बाल मामाजी को घूरता था।इस हद तक घूरता था कि वे डर जाएं। और वे डर भी जाते थे। डरते न तो क्या करते ? हर कोई उन्हें पागल, डरपोक, मूर्ख और निठल्ला साबित करनें में जो लग...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Sanjay Grover संजय ग्रोवर
सरल की डायरी Saral ki Diary
76

"शहर..!!"

शहर - अब मैं चलता हूँदूर किसी और शहर मेंनया आशिआना बसना हैनए मुशाफिर से मिलना हैमहफ़िल में दोस्तों कीतेरा जिक्र तो जरुर होगातेरी वो हवा, वो खुशबूयादों में छुएंगी मुझेतेरे साथ गुज़ारे वो दिनय...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
suman sourabh
..Tum Suman..!!
87

"हिन्दी साहित्य निकेतन परिकल्पना सम्मान समारोह" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"

हिन्दी साहित्य निकेतन परिकल्पना सम्मान समारोहदिनांक-30 अप्रैल, 2011हिन्दी भवन, नई दिल्लीदिनांक 30 अप्रैल, 20011 को हिन्दी भवन, नई दिल्ली मे परिकल्पना समूह और हिन्दी साहित्य निकेतन के संयुक्त तत्व...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
138

"हिन्दी साहित्य निकेतन परिकल्पना सम्मान समारोह" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

हिन्दी साहित्य निकेतन परिकल्पना सम्मान समारोहदिनांक-30 अप्रैल, 2011हिन्दी भवन, नई दिल्लीदिनांक 30 अप्रैल, 20011 को हिन्दी भवन, नई दिल्ली मे परिकल्पना समूह और हिन्दी साहित्य निकेतन के संयुक्त तत्व...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
139

धरती और मैं

हम कितने पागल हो चुके हैं, सच है बंदर के हाथ में जितने ज्यादा उस्तरे दो वो उतनी ही ज्यादा बरबादी करेगा. हम आज भी एक बंदर हैं. मुझे आज ही पता लगा कि मेरे घर के आस-पास में जितने भी बडे पेड थे सब काटे जा...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
vivek mishra
41

बेरोज़गारी से देश का विकास

"हम बेरोजगार हैं इसलिये क्यूँकि हम पढे-लिखे हैं, मेरी उम्र के सारे अनपढ रोजगार वाले हैं. सोच रहा हूँ कि स्कूल खोल लूँ जहाँ पढे- लिखे ‘अनपढ’ बिना पढे पास होँ, और कुछ सूझता भी नही. अब इस लायक भी नहीँ ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
vivek mishra
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