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नई हलचल

चीनी खाने और गन्ना बोकर, चूसने में अंतर है, नायपाल जी.

जे.एन. यू में मेरी पहली anchoring जबरदस्त सराही गयी, माँ शारदा को प्रणाम. प्रो. घोष की रसिकता पर मैंने यूं चुटकी ली : "..बदन होता है, बूढा, दिल की फितरत कब बदलती है, पुराना कूकर क्या सीटी बजाना छोड़ देता है.......  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
71

ये ब्लोगिंग में लाठी-बल्लम...?

ये इतना घमासान क्यूँ....? किसको साबित करना चाहते हैं..? किसके  बरक्श....? ये कौनसी मिसाल आप सब बना रहे हैं..? सब, सब पर फिकरे कस रहे हैं. आये थे, कुछ बांटने, ब्लॉग लिखने, कुछ सीखने, कुछ बताने,...., ये क्या करन...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
72

हिंदी का भूत.........

हिंदी से डर लगता है। डरावनी हो गई है। सीबीएसई अब हिंदी के सवालों को हल्का करने जा रही है। प्राइवेट स्कूल इंग्लिश मीडियम होते हैं। गांव गांव में टाट की झोंपड़ी में इंग्लिश मीडियम स्कूल के बोर्...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Himanshu
आँगन.. जो बाहर होकर भीतर है
78

सदाग्रह..शांति, सद्भावना के लिए....

सदाग्रह एक विमर्श मंच है जहाँ प्रयास होगा विभिन्न समाधानों के लिए एक बौद्धिक पहल का...विमर्श से एक शांतिपूर्ण समाधान की खोज और एक अपील इसे अपनाने की सहभागी बंधुओं से....आपका रचनात्मक सहयोगअपेक...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
63

ek naya template

थोड़ी मेहनत की, एक नया टेम्पलेट...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
76

शायद फ़िक्र हो..

स्मार्ट दूकानदार, मुस्कुराकर, अठन्नी वापस नहीं करता.. शायद फ़िक्र हो.. भिखमंगों की. नये कपड़ों की जरूरत  लगातार बनी रहती है शायद फ़िक्र हो हमें, अधनंगों की.  चीजें कुछ फैशन के लिहाज से पुर...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
64

घर सा घर ... अब कहाँ है घर

'घर' एक वास्तु मात्र न होकर भावसूचक संज्ञा भी है ! घर से अधिक सजीव एवं घर से अधिक निर्जीव भला क्या हो सकता है ! अनगिनत भावनाओं और प्रतीकों का मिला-जुला रूप है घर !"कमरा नंबर एक / जहाँ दो-दो सड़कों के द...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
prakash govind
80

पुनर्पाठ...तुम्हारा..

(१) मै; तुम्हे शिद्दत से चाहता हूँ, पर तुम नहीं. आत्मविश्वास ने समाधान किया: 'सफल हो जाने पर कौन नहीं चाहेगा मुझे,,,? "....पर उन्ही लोगो में पाकर क्या मै चाह सकूँगा ..तब..तुम्हे..?  (२) तुमने जब टटोला तो म...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
57

ब्रेकिंग न्यूज की मजबूरी क्यों?

कुछ दिन पहले कई चैनलों वाले बड़े मीडिया ग्रुप के एक छोटे या फिर कहें मंझोले हिंदी चैनल के संपादक को पढ़ रहा था। वह छोटे और मध्यम श्रेणी के चैनलों की परेशानियां गिना रहे थे। उनका कहना था कि छोटे ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
RAVINDRA RANJAN
आशियाना Aashiyana
86
अल्लम्...गल्लम्....बैठ निठ्ठ्लम्...
59

गाँधी मेरी नजरों से..

गाँधी जी जैसा रीयल परसन अपने जन्मदिन पर आपको निष्क्रिय कैसे रहने दे सकता है..? जितना पढ़्ता जाता हूँ गाँधी जी को उतना ही प्रभावित होता जाता हूँ. गाँधी और मै. मेरे लिये गाँधी जी सम्भवत: सबसे पहल...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
67

गाँधी और मै....श्रीश पाठक 'प्रखर'

गाँधी जी जैसा रीयल परसन अपने जन्मदिन पर आपको निष्क्रिय कैसे रहने दे सकता है..? जितना पढ़्ता जाता हूँ गाँधी जी को उतना ही प्रभावित होता जाता हूँ. गाँधी और मै. मेरे लिये गाँधी जी सम्भवत: सबसे पहले स...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
82

ईश्वरत्व से बचते हुए

[...आर्डिनरी जब एक्स्ट्रा-आर्डिनरी बन जाता है, तो वह चमत्कार हो जाता है. महामना गांधी जानते थे कि चमत्कार पर मुग्ध हुआ जा सकता है, पर इसे अपनाया नहीं जा सकता. महात्मा जीवन भर प्रयास करते रहे कि जो ज...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
70

स्वीकारने से कायम होगी सद्भावना

[परिवर्तन शाश्वत हैं और नितांत आवश्यक भी. प्रत्येक पीढ़ी अपने साथ बदलाव का झनकार लाती है. पर इस स्वर में मधुरता का अनुशासन ना हो तो यह कालांतर में अप्रासंगिक हो जाती है. इस बदलाव में जरूरी है कि क...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
88

बैंडिट क्वीन

फिल्म देखा तो स्तब्ध रह गया मै, मुझे विश्वास नहीं हुआ कि ऐसा हो सकता है. किसी एक जाति की ज्यादती की तो बात ही नहीं है, क्योकि जो भी शीर्ष पर रहा है, उससे ऐसी ज्यादतियां हुई हैं.पर मानवता सबसे कम मान...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
75

सदाग्रह एक अपील...शांति, सद्भावना के लिए..

..जीवन की होड़ में जीवन फिसल जाता है.. हम हिसाब लगाते रह जाते हैं और मोड़ आ जाता है. फिर बदल जाते हैं मायने सब मतलबों के और एक प्याला खाली का खाली ही टूट जाता है. समाधान है हर एक विवाद का, शांतिपूर्...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
96

ए क्या बोलती तू

ए क्या बोलती तू ... , ओ हरे दुपट्टे वाली .... गाने गाकर नायिका को छेड़ते नायक लोगों का मनोरंजन करने मे कितने सफल रहते हैं पर नि:संदेह समाज की एक गंभीर समस्या जरूर उजागर होती है. 'ईव टीज़िंग' नाम से जान...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Chetna Vardhan
bas do minute
150

तो ऐसे होती है दिल्ली में क्रांति, कमाल है!

एक खास विज्ञापन की तलाश में पिछले दो-चार दिन के हिन्दुस्तान टाइम्स के पन्ने पलट रहा था। एक पेज की लीड स्टोरी पर गया। चार-पांच काॅलम में छपी स्टोरी थी, रंगीन फोटो के साथ। फोटो में एक खूबसूरत सी ल...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
74

پاکستان نے دی بھارت کو کراری شکست

سینچورین : چیمپئنزٹرافی کے اہم میچ میں پاکستان نے بھارت کوچون رنز سے ہرا دیا۔سپر اسپورٹس پارک سینچورین میں بھارت نے ٹاس جیت کر پاکستان کو بیٹنگ کرنے کی دعوت دی۔ گرین شرٹس کا آغاز متاثر کن نہ ہوا۔ عمران نذیر بیس، کامران اکمل انیس جبکہ کپتان یونس خان بیس رنز بناکر پویلین واپس لو...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
جہاںنُما
93

ਸਜਣ ਬਿਨ ਰਾਤੀਂ ਹੋਇਯਾਂ ਵੱਡੀਆਂ

ਸਜਣ ਬਿਨ ਰਾਤੀਂ ਹੋਇਯਾਂ ਵੱਡੀਆਂਰਾਂਝਾ ਜੋਗੀ ਮੈਂ ਜੁਗਿਆਣੀਕਮਲੀ ਕਹਿ-ਕਹਿ ਛਡੀਆਂਮਾਸ ਝੜੇ ਝੜੀ ਪਿੰਜਰ ਹੋਇਯਾਂਕਰਕਨ ਲਗੀਆਂ ਹਡੀਆਂਮੈਂ ਇਆਣੀ ਨੇਹੁੰ ਕੀ ਜਾਣਾਬਿਰਹੁ ਤਣਾਵਾਂ ਕੀ ਗਡੀਆਂਕਹੈ ਹੁਸੈਨ ਫ਼ਕੀਰ ਸਾਂਯੀ ਦਾ ਦਾਵਣ ਤੇਰੇ ਮ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
ਹੀਰ
89

दरोगा जी में जाग उठी ’ देवी ’

माथे पर रोली का लंबा सा टीका लगाए आज उनके मुख की शोभा कुछ अलग सी है। रोजाना के रौब के साथ-साथ एक अनूठा तेज टपक रहा है चेहरे से। जिप्सी की अगली सीट पर बैठे एसओ साहब पूरे एक्शन में हैं। अरे, एक्शन मत...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
74
अल्लम्...गल्लम्....बैठ निठ्ठ्लम्...
64

बिलासपुर हिमाचल प्रदेश में हिन्दी और इंटरनैट पर संगोष्ठी आज

भाषा विभाग की ज़िला भाषाधिकारी के द्वारा हिमाचल में हिन्दी के इंटरनैट पर प्रचलन के लिए यह पहला सराहनीय प्रयास।अनेक साहित्यकार,पत्रकार और सरकारी कर्मचारी उठाएंगे इस संगोष्ठी का लाभअवसर पर क...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
प्रकाश बादल
प्रकाश बादल
103

दाती गुरु का मंतर काम कर रहा है

मदारी की बाजीगरी दिल बहलाती है। लोग सिक्के फेकते हैं। मीडिया की बाजीगरी इससे कहीं गहरी है। व्यापकतर असर रखती है। चैनलों का चलाया दाती गरु का मंतर आजकल दिल्ली में खूब कमाल दिखा रहा है। दाती गु...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
76

दाती गुरु का मंतर काम कर रहा है

मदारी की बाजीगरी दिल बहलाती है। लोग सिक्के फेकते हैंै। मीडिया की बाजीगरी इससे कहीं गहरी है। व्यापकतर असर रखती है। चैनलों का चलाया दाती गरु का मंतर आजकल दिल्ली में खूब कमाल दिखा रहा है। दाती ग...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
80

स‌नसनी बोले तो स‌न्नाटे को चीरते श्रीवर्धन

एंकर श्रीवर्धन त्रिवेदी के बगैर सनसनी के बारे में सोचना भी मुश्किल है। आज की तारीख में सनसनी और श्रीवर्धन एक दूसरे के पूरक बन चुके हैं। कल्पना कीजिए किसी दिन स्टार न्यूज पर सनसनी हो, लेकिन एंक...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
RAVINDRA RANJAN
आशियाना Aashiyana
75

भारत :बदली आज की तस्वीर

"भारत " का शाब्दिक अर्थ होता है भा से रत यानि प्रकाशवान या चमक से परिपूर्ण।किँतु आज चमक विलुप्त हो रही है हम कहाँ जा रहे है ये प्रश्न आज विचारणीय है,आज का युवा ध्रूमपान ,अन्य वस्तुओँ से इस प्रकार ...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
VIVEK SACHAN
khuch bhikhri yaden --कुछ बिखरी यादें
92

कंडक्टरों की ये अजब-गजब भाषा

दिल्ली की बसों नगर बसों में सफर करना यूं तो अपने आप में एक यातना है, पर इस यातना में एक मजा भी कहीं छिपा हुआ है। यह मजा है कंडेक्टरों की बोली और चुहलबाजी का। कभी-कभी सोचता हूं कि जाने कब नजर पडे़ग...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
72

समाचार वालों पीछे से निकल लो

दिल्ली की बसों नगर बसों में सफर करना यूं तो अपने आप में एक यातना है, पर इस यातना में एक मजा भी कहीं छिपा हुआ है। यह मजा है कंडेक्टरों की बोली और चुहलबाजी का। कभी-कभी सोचता हूं कि जाने कब नजर पडे़ग...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
73

बच्चे और अनुशासन

बच्चेबड़ेहोनहारहोतेहैं।सबकुछइतनीजल्दीसीखलेतेहैं ,आश्चर्यभीहोताहैऔरगर्वभी।ऐसेहीकुछबच्चोंसेप्रतिदिनमुलाकातहोतीहै।शामकेसमयमुहल्लेकेसारेबच्चेलगभग७-८कीसंख्यामेंखेलते, भागते, कू...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Chetna Vardhan
bas do minute
141


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