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नई हलचल

इस शहर की भीड़ में पहचान बनने निकला हूँ.........

इस शहर की भीड़ में पहचान बनने निकला हूँ........................कहीं टूटा है एक तारा आसमान से उसे चाँद बनने निकला हूँ।तो क्या हुआ जो जिन्दगी हर कदम पर मारती है ठोकर।हर बार फ़िर संभल कर मै उसे एक अरमान बनने निक...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
Ritesh
Satya: The Voice of Truth
82

...और बातें हो जायेंगी

...और बातें हो जायेंगीआओ...हम साथ बैठें।पास बैठें।कभी खोलूँकभी पहनूँ मैं अपनी अँगूठी।तुम्हारे चेहरे को टिकाएतुम्हारी ही कसी हुई मुट्ठी।चमका करे धुली हुई मेज़हमारे नेत्रों के अपलक परावर्तन स...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
AJANTA SHARMA
अजन्ता शर्मा
62

जब चमक उट्ठे तेरी याद के जुगनू कितने

शायिर: बेदिल संभलीजब चमक उट्ठे तेरी याद के जुगनू कितनेख़ून बन-बनके गिरे आँख के आँसू...[यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
विनय प्रजापति 'नज़र'
ग़ज़लों के खिलते गुलाब
117

इस बार

इस बारअनगिनत आँगनअनगिनत छत,अनगिनत दियेऔर उनके उजालों का कोलाहल..इनके बीचकहीं गुम सी मैं,कहीं भागने की हठ करता हुआलौ सा मचलता मेरा मन...वो एकाकीजो तुम्हारे गले लग करमुझसे लिपटने आया हैउसकी तपि...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
AJANTA SHARMA
अजन्ता शर्मा
70

अस्तित्व

अस्तित्वमुझसे वो पूछता हैकि अब तुम कहाँ हो?घर के उस कोने सेतुम्हारा निशां धुल गयाहै वो आसमां वीरां,जहाँ भटका करती थी तुम,कहाँ गया वो हुनरखुद को उढ़ेलने का?अपनी ज़िन्दगी का खाँचा बनाशतरंज की गोट...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
AJANTA SHARMA
अजन्ता शर्मा
69

कारीगरी है जिनकी यहाँ कोठियों के बीच

शायिर: विजेन्द्र सिंह 'परवाज़'कारीगरी है जिनकी यहाँ कोठियों के बीचहारे थके पड़े हैं कहीं सिसकियों...[यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
विनय प्रजापति 'नज़र'
ग़ज़लों के खिलते गुलाब
111

अनुरोध

अनुरोधहे बादल!अब मेरे आँचल मेंतृणों की लहराई डार नहीं,न है तुम्हारे स्वागत के लियेढेरों मुस्काते रंग.मेरा ज़िस्मईंट और पत्थरों के बोझ के तलेदबा है.उस तमतमाये सूरज से भागकरजो उबलते इंसानइन छत...  और पढ़ें
9 वर्ष पूर्व
AJANTA SHARMA
अजन्ता शर्मा
70

व्यर्थ विषय

व्यर्थ विषयक्षणिक भ्रमित प्यार पाकर तुम क्या करोगे?आकाशहीन-आधार पाकर तुम क्या करोगे?तुम्हारे हीं कदमों से कुचली, रक्त-रंजित भयी,सुर्ख फूलों का हार पाकर तुम क्या करोगे?जिनके थिरकन पर न हो रोन...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
AJANTA SHARMA
अजन्ता शर्मा
65

पुरानी चीज़ों को इक दिन वह ख़ाक में मिलाता है

शायिर: अरूण साहिबाबादीपुरानी चीज़ों को इक दिन वह ख़ाक में मिलाता हैमगर इस ख़ाक से ही फिर नयी...[यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
विनय प्रजापति 'नज़र'
ग़ज़लों के खिलते गुलाब
124

तुम मुझ को अच्छे लगते हो ।

एक बात कहूँ गर तुम सुनते हो। तुम मुझ को अच्छे लगते हो ।कुछ चंचल से.......कुछ चुप -चुप से.......कुछ पागल- पागल लगते हो।एक बात कहूँ गर तुम सुनते हो। तुम मुझ को अच्छे लगते हो।हैं चाहने वाले और बुहत......फीर तुम ...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
Ritesh
Satya: The Voice of Truth
84

मै अकेला था कहाँ अपने सफर में.....

मैअकेला थाकहाँअपनेसफरमें.....साथमेरेछावबनचलतीरहीतुम.....तुम के जैसे चांदनी हो चंद्रमा मे,आब मोती मे प्रणय आराधना मे,चाहता है कोंन मंजील तक पहुंचना,जब मीले आनंद पथ की साधना मे,जन्म जन्मो मै जला ए...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
Ritesh
Satya: The Voice of Truth
84

नए ज़माने के प्रेम पुजारी............

आज के प्रेमी पुराने ज़माने के प्रेमी नही है की प्रेम के लिए जान दे दे। वे जान नही व्याख्यान देने में भरोसा रखते है। साल भर पहले चर्चा में रहे पटना के लव गुरु मटुकनाथ व्याख्यान देने के मामले में ...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
Ritesh
Satya: The Voice of Truth
59

घर से मेरे हर ख़ुशी निकली

शायिरा: शिबली हसन 'शैल', इटावाघर से मेरे हर ख़ुशी निकलीज़िन्दगी तुझसे दुश्मनी निकलीदफ़अतन याद आ...[यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
विनय प्रजापति 'नज़र'
ग़ज़लों के खिलते गुलाब
102

आपका स्वागत है! । Welcome

इस ब्लॉग पर चुनिंदा ग़ज़लों को पेश किया जायेगा, जो मेरे दिल के बेहद क़रीब हैं! आशा करता हूँ कि यह...[यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
विनय प्रजापति 'नज़र'
ग़ज़लों के खिलते गुलाब
125

ज़बह

ज़बह हर रोज़मेरी खाल उतरती है.मुझेएक हुक से टांगा जाता है.थोडी थोडी देर मेंमुझेथोड़ा थोड़ा काटा जाता है. अपने शरीर सेटपके रक्त कोबूँद बूँद उठामैं देह से चिपकाती हूँ.फिरखाल उतरवाने कोतैयार हो ज...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
AJANTA SHARMA
अजन्ता शर्मा
70

तुम्हारी बात

तुम्हारी बाततुम जो कहते होउसे आवरण बनाअपने सर्वस्व कोउससे लपेट लेती हूँवह मेरी ऊर्जा कोसहेजता हैमुझेअपने स्पर्श सेउष्मित करता हैतुम जो कहते होउसे ओढ़कर मैंख़ुद कोजीवन-अनल मध्यप्रहलाद सा ...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
AJANTA SHARMA
अजन्ता शर्मा
64

प्रवाह

प्रवाहबनकर नदी जब बहा करूँगी,तब क्या मुझे रोक पाओगे?अपनी आँखों से कहा करूँगी,तब क्या मुझे रोक पाओगे?हर कथा रचोगे एक सीमा तकबनाओगे पात्रनचाओगे मुझेमेरी कतार को काटकर तुमएक भीड़ का हिस्सा बनाओ...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
AJANTA SHARMA
अजन्ता शर्मा
58

बोलता नहीं लेकिन...

बोलता नहीं लेकिन बड़बड़ाता तो है।सच होंठ पर लेकिन आता तो है।अर्श शौक से अब ओले उड़ेल दे,मूंडे गए सरों के पास छाता तो है।तेरी मंज़िल मिले न मिले क्या पता,है तय ये रस्ता कहीं जाता तो है।फिज़ाओं म...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
प्रकाश बादल
प्रकाश बादल
94

दशानन...

कैसे राम ने जीता रावणकैसे राम बने जगदीशशीश एक क्यूँ जीत ना पायादस सिर लेकर भी दसशीशनिश्छल मन और निर्मल ह्रदयजहाँ राम की ढाल बनेमलिन ह्रदय और कपट वहीं परदशानन का काल बनेबुद्धी-कौशल और राजनीति...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
Reetesh Gupta
भावनायें...
95

अंध विश्वास का मायाजाल

क्या टी वी...क्या अखबार...क्या मैगजीन...सब जगह तंत्र-मंत्र , ज्योतिष , टैरो-कार्ड, फेंग-सुई-वास्तु का जाल फैला नजर आता है ! देश की आजादी के पश्चात संपन्न वर्ग के ज्यादातर लोग कभी इतने अन्धविश्वासी नह...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
prakash govind
133

कविता के बहाने

वातानुकूलित कमरों कीबासी शीतलता मेंजो जन्म लेती हैकाफ़ी के प्यालों में,आकर ग्रहण करती हैसिगरेट के धुएँ से कविता नहीं ।कविता वह नहींजिसका शव प्रकाशन के पश्चात समीक्षक की मेज पर पड़ा है पोस्ट म...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
93

साथ उसके आसमाँ है...

पाया नहीं यह ज्ञान सेसमझा नहीं विज्ञान सेयह नहीं कोई कलाजिसको तराशा ध्यान सेसंस्कारों से मिली जोयह तो बस एक भावना हैजिसने दिया विश्वास मुझकोइंसान आता है जगत मेंहाथ में क्षमता लियेकोई शिखर ...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
Reetesh Gupta
भावनायें...
98

गधे का गुस्सा

बचपन में एक अखबार में पढ़ी थी यह बाल कविता। कविता लंबी थी और अच्छी भी। लेखक का नाम तो नहीं याद लेकिन उसकी कुछ पंक्तियां मुझे अब भी याद हैं। आपस‌े यह स‌ुंदर कविता इसलिए बांट रहा हूं कि अगर किसी क...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
RAVINDRA RANJAN
आशियाना Aashiyana
85

इन्द्र

इन्द्रक्यों हो तुम इतनेपुंसत्वहीन ।क्यों नहीं आयाकभी मन में तुम्हारे कितुम भी करो उद्योग बढ़ाने को अपना बल, पौरुष,शक्ति और कौशल ।क्यों नही की तपस्या कभी तुमने ,क्यों होते रहे तुम सदैवशंकाग्र...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
88

सच के लिबास में......

सच के लिबास में दिखाई देना।और पेशा है झूठी सफाई देना।यूं चीखने से बात नहीं बनती,मायने रखता है सुनाई देना।लाद गया वो किताबों के भारी बस्ते,मैने कहा था बच्चों को पढ़ाई देना।जो दर्द दिए तूने उसका ...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
प्रकाश बादल
प्रकाश बादल
100

पैमाना न दरमियान रख....

 पैमाना न दरमियान रख। मेरे ख़्यालों में उड़ान रख।दिल से दिल का फासला न हो, इस सलीके से गीता और कुरान रख।बहुत हुई महलों की फिक्र, छोड़ दे,बेघरों के हिस्से में अब मकान रख।बस्तियां रौंद लेगी ये न...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
प्रकाश बादल
प्रकाश बादल
102

शैलेश भारतवासी को जानते हैं ?

हिन्दी की ई-संस्था है शैलेशअगर आप इंटरनैट पर हिन्दी टाईप करने में किसी दिक्कत का सामना कर रहे हों या फिर आप इंटरनैट पर आप हिन्दी लिखने पढने में रुचि रखते हैं तो ये लेख आपके लिए ही है।-----------------------------...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
प्रकाश बादल
प्रकाश बादल
97

ऐसा नहीं कि ज़िन्दा जंगल नहीं है....

ऐसा नहीं के ज़िंदा जंगल नहीं है। गांव के नसीब बस पीपल नहीं है। ये आंदोलन नेताओं के पास हैं गिरवी, दाल रोटी के मसलों का इनमें हल नहीं है। चील, गिद्ध, कव्वे भी अब गीत गाते हैं, मैं भी हूं शोक में, अकेल...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
प्रकाश बादल
प्रकाश बादल
104

दो कवितायें - मूक प्रश्न / संवाद

- मूक प्रश्न - (कविता)बीजगणित के "इक्वेशन"भौतिकी के "न्युमैरिकल"और जैविकी की "एक्स्पैरिमेंट्स"से परे भी,एक दुनिया हैभूख और गरीबी से सनी हुयी !वहीँ मिलूँगा मैं तुम्हेंयदि तुम मेरे मित्र हो तो आओइ...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
prakash govind
85

आस

आसबड़ी आस थीउनदिनों,के मेरे ज्वलंत मस्तक परतुम अपने होंठों से ठंडी ओस मलते,औरमेरी समस्याएंछनछनाकर भाप बन उड़ जातीं.तुम्हारी बाहों मेंमेरा हर भार होताऔर मैं पेंग बढाकरआसमान तक हो आती.तुम्हारे...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
AJANTA SHARMA
अजन्ता शर्मा
66


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