अपना ब्लॉग जोड़ें

अपने ब्लॉग को  जोड़ने के लिये नीचे दिए हुए टेक्स्ट बॉक्स में अपने ब्लॉग का पता भरें!
आप नए उपयोगकर्ता हैं?
अब सदस्य बनें
सदस्य बनें
क्या आप नया ब्लॉग बनाना चाहते हैं?
नवीनतम सदस्य

नई हलचल

कौन लौटाएगा उसके १४ साल जो निर्दोष ने जेल में गुज़ारे

१८ साल के आमिर को बना दिया गया था आतंकवादीआमिर अपनी माँ के साथ पुरानी दिल्ली के घर में चित्र साभार: हिन्दू  परवाज़ रहमानी की कलम से जब वह सिर्फ 18 साल का थावो गरीब माँ बाप का इकलौता बेटा था उम्र 1...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Shahroz
Hamzabaan हमज़बान ھمز با ن
81

jagit singh ji ko samrpit

visit.. http://www.mahaktepal.comहर एक शब्द तेरी रूह में जब उतरा है, पाके आवाज तेरी लफ्ज लफ्ज जिन्दा हुआ....तोड़ कर दिल तुमको बुला पास अपने, खुदा क्यों इस खता पर अपनी ना शर्मिंदा हुआ.तेरी गज़लों के नरम साये है ,आज हम तु...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
sakhi
sakhi with feelings
107

एक दीवाना था ..एक जिंदगी दो से एक बनी

एक नज़र पढते ही वो कोमलता के साथ कैसे हृदय में उतरी,  उसकी  उसको भी खबर न हुई . खबर हुई तब जब उसके अंदर एक बैचैनी ने जन्म ले लिया और कर दिया जुदा खुद से उसे.उसके भीतर ही भीतर रहने लगी थी वो बनके रूह ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
sakhi
sakhi with feelings..kahaniya/Articles
118

खेद प्रकाश....

7 वर्ष पूर्व
भारतीय नागरिक
भारतीय नागरिक-Indian Citizen
83

लाखो घर बर्बाद हो गए इस दहेज़ की होली में

मैंने एक जगह इस लाइन को पढ़ा था जो मैं आपके साथ शेयर करना चाहता हूँ लाखो घर बर्बाद हो गए इस दहेज़ की होली में]कितनी कन्यायें बेचारी बैठ न पाई डोली में]कितनो ने अपने कन्या के हाथ पीले करने में]कहाँ ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
KARTIKEY RAJ
समाज
59

सच को खंगालती कविताएं ‘बीड़ी पीती हुई बूढ़ी औरत’

कोई भी रचना चाहे वह किसी भी विद्या मे हो, उन सभी की संरचनात्मक मांग वक्त की तमाम हालतों को अपने में अंतर्निहित करने की होती है। सच है कि उस समय के सम्पूर्ण संयोजन के अभाव में किसी बेहतर रचना का व...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
- अरविन्द श्रीवास्तव
84

वार

 वारतुम नजरों ही से बोला करो,तुम्हारे जुबाँ की फितरत,कुछ और होती है,नजरों से बयाँ करने की अदा,जुबाँ में नहीं मिलती.जुबाँ से किया हुआ वार,अश्लीलता की बौछारें लिए आता है,और नजरों की कटारी का मार...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
रंगराज अयंगर
61
कुछ पुरानी यादें... (कविताएं, गीत, भजन, प्रार्थनाएं, श्लोक, अनूदित रचनाएं)
141

"छुक-छुक करती आयी रेल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

धक्का-मुक्की रेलम-पेल।छुक-छुक करती आयी रेल।।इंजन चलता सबसे आगे।पीछे -पीछे डिब्बे भागे।।हार्न बजाता, धुआँ छोड़ता।पटरी पर यह तेज दौड़ता।।जब स्टेशन आ जाता है।सिग्नल पर यह रुक जाता है।।जब तक ब...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
128

कांग्रेस का पार्टीगत कलह राहुल-ताजपोशी की शुरुआत तो नहीं

मौजूदा समय में कांग्रेस के अंदरुनी हालात को देखकर थोड़ा भ्रम सा प्रतीत होता है। लेकिन अगर पूरे माजरे पर नजर दौड़ाई जाए तो पार्टी का असल खेल समझ में आ सकता है। दरअसल कांग्रेस के नेताओं के बीच च...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Praveen Dwivedi
अभिव्यक्ति
58

आपका वोट सिर्फ एक वोट नहीं है

लोकतंत्र भी बड़ी अजीब चीज है। यह देश का वो इंजन है जो जनता के समर्थन रुपी आयल से दौड़ता है और निरंतर विकास करते हुए आगे बढ़ता जाता है। मगर पता नहीं ऐसा क्या हुआ जो यह इंजन दुनिया के सबसे बड़े लोक...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Praveen Dwivedi
अभिव्यक्ति
52

प्रब्लेस शिखर सम्मान की उद्घोषणा.....

जैसा कि विगत वर्ष 21 मई 2011   को प्रगतिशील ब्लॉगलेखकसंघ की ओर से यह घोषणा की गयी थी कि इस वर्ष 17 फरवरी को प्रब्लेस अपना  पहला वार्षिक महाधिवेशन मनायेगा जिसमें साहित्य और ब्लॉगिंग से स...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Manoj Pandey
मंगलायतन
76

बोलो खरीदोगे ?

बोलोखरीदोगे ?आजकेसमयमेंहरवस्तुबिकाऊहैचाहे  वोनिर्जीवहोयासजीवइन्सानहोयाजानवरकिसीकीमौतबिकतीहैतोकिसीकीजिंदगीकिसीकीलाशबिकतीहैतोकिसीकाजिस्मखरीदोगेक्या ? नेतापुलिसचोरयाडाक्टरब...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Ashish
कानपुर पत्रिका
58

बिछना - बिछाना

बिछना - बिछाना.जमाना बदल रहा है.काफी बदल गया है.लेकिन बिछने की आदत अभी कायम है.पहले आँखें बिछाते थे,नजरें बिछाते थे,फिर कालीने बिछने लगीं ,लोगों को फख्र महसूस होता था,लोगों को हर्ष महसूस होता था, ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
रंगराज अयंगर
56

कहा है साहस खुद को उघाड़ने का....(कुँवर जी)

सब विषयो,शीर्षकों,मुद्दों,शब्दों को इक्कठा कर जब कुछ लिखने  की सोचता हूँ तो एक-एक कर के सब दूर जाते दिखते है....बस रह जाता हूँ खड़ा मै अकेला और बात मुझ पर आकर रुक ही जाती है....और फिर क्या....सब ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
hardeep rana
kunwarji's
80

छोटा सा बड़ा जीवन

हर बार की तरह इस बार भी भारत से आते समय मेरे सामान में सबसे भारी चीज़ें किताबें थीं. उन्हीं किताबों में थी नरेन्द्र कोहली की "पूत अनोखो जायो", जो कि स्वामी विवेकानन्द की जीवनी पर लिखी गयी है. छोटा...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
SUNIL DEEPAK
जो न कह सके
332

रोमांचक नहीं, रोमांटिक धोनी....(व्यंग्य)

वेलेंटाइन डे पर हुआ भारत-श्रीलंका का वनडे मैच बड़ा ही रोमांटिक था... म..म..माफ कीजिएगा रोमांचक था। वो क्या है, कभी-कभी मेरी जुबान जरा फिसल जाती है। पर कुछ भी कहें ये मैच वाकई था बहुत रोमांटिक... इतना ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Sumit
14

No Title

टीम अन्ना के मनीष सिसौदिया व संजय सिंह की मैनपुरी में रैली सफल रही। इटावा, बिधूना (औरैया) बदायूं सहित तमाम प्रभारियों ने सिरकत की। मैनपुरी के बाद इटावा में रैली होनी थी जो पारस्परिक मतभेदों व ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Acharya Devesh  awasthi (Devesh Shastri)
123

........अभिमान ........

कदम कदम पे खतरा है ,खतरों से खेलना ,शत्रु के प्रहार को ,वीरता से झेलना ,क्या करेंगी युद्ध में ,प्रेम की ये नीतियाँ ,हर कदम पे रोकती हैं ,देश की कुरीतियाँ ,शत्रु से सजग रहो ,देश...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
abhishek shukla
24

................हर पल ..............

" ये धुंधली सी तस्वीरें ,जब भी याद आती हैं ,दिल में एक अजीब ख्वाहिश ,जाने क्यों तीस भारती है ."वो यादों के जो मेले थे ,जिनमें हम अकेले थे ,वो हलकी सबनमीबारिश ,जिनमें पत्थर को झेले थे ,वो बे...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
abhishek shukla
19

A valentine day special ....

visit.. http://www.mahaktepal.comआज प्रेम दिवस दुनिया मन रही है .... कितने अरमान दिलों में हिलोरे ले रहे हैअपनी बात नहीं करी ये मैंने ये  बात कि है मैंने हर उस दिल की जिसमें किसी के लिए प्यार है बेशुमार तुमने भी कितन...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
sakhi
sakhi with feelings
92

सैकड़ों की संख्या में ख़बरें और मंहगाई दर.

हर कोई चैनल सबसे कम समय में सबसे अधिक ख़बरें दिखाने का दावा करता है. कोई मिनट के हिसाब से तो कोई संख्या के हिसाब से. मानो कोई जलजला आ गया हो खबरों का. और एंकर तो बिलकुल किसी युद्ध के मोर्चे पर लाईट ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
भारतीय नागरिक
भारतीय नागरिक-Indian Citizen
87

सैकड़ों की संख्या में ख़बरें और मंहगाई दर.

हर कोई चैनल सबसे कम समय में सबसे अधिक ख़बरें दिखाने का दावा करता है. कोई मिनट के हिसाब से तो कोई संख्या के हिसाब से. मानो कोई जलजला आ गया हो खबरों का. और एंकर तो बिलकुल किसी युद्ध के मोर्चे पर लाईट ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
भारतीय नागरिक
भारतीय नागरिक-Indian Citizen
85

होली फाग एवं मनहरवा - कवि आर्त के स्‍वर में ।

मित्रोंहोली बिलकुल सन्निकट ही है ।  इस मौसम में सबसे अधिक जो वस्‍तु प्रचलित है वह है फाग गीत तथा मनहरवा (मतवाला) ।  इस मामले में फैजाबाद जिला (उत्‍तरप्रदेश) काफी समृद्ध है ।  फाग विधा के प्र...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
SANSKRITJAGAT
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
94

कुमारसैन की पल्‍लवी जाऐगी जापान

राजकीय वरिष्‍ठ माध्‍यमिक पाठशाला कुमारसैन शिमला की छात्रा पल्‍लवी वर्मा का चयन जापान यात्रा के लिए हुआ है। भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय The Japan East Asia Network of Exchange for Students and Youths (JENESYS) के तहत यह चय...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
रौशन जसवाल विक्षिप्‍त
112

भटक रही थी जो कश्ती वो ग़र्क-ए-आब हुई........... शहरयार को याद करते हुए

मौत तो जीती मगर वो हारा नहीं शहबाज़ अली खान की क़लम से  यूँ तो घर में (ननिहाल में) जब से आँख खुली तबसे उर्दू के ही शायरों मीर, ग़ालिब, दर्द, सौदा और न जाने कितने उर्दू शायरों/ अदीबों का हीज़ि...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Shahroz
Hamzabaan हमज़बान ھمز با ن
66

अगले जन्म हमे बिटिया न दीजो

अगलेजन्महमेबिटियानदीजोयाअगलेजन्महमेबिटियानकीजोमेंज्यादाअंतरनहींहैअर्थदोनोंकाएकहीआताहैकी२१ वी शताब्दीमेंजीरहेइसपुरुषप्रधानसमाजमेंहमस्त्रियोंकीएकसुनिश्चितजगहनहींबनापाएहै /...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Ashish
कानपुर पत्रिका
61

"सोलहवाँ बसन्त"

      मेरठ नगर से कुछ दूर एक शहर है- गढ़ मुक्तेश्वर।       वहाँ कुछ बदमाशों ने एक लड़की को तेजाब से बुरी तरह जला दिया था।       यह 1987 के अगस्त की बात है। लड़की ग्यारहवीं की छात्...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
जयदीप शेखर
कभी-कभार
74
समय से संवाद
58


Postcard
फेसबुक द्वारा लॉगिन