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नई हलचल

No Title

मजदूर दिवस 1 मई' पर दो शब्द आज इस वक्त सहसा ही मुझे हिंदी साहित्य के महान कवि निराला की पंक्तियाँ  याद आ रही हैं:वह तोड़ती पत्थर देखा इलाहाबाद के पथ पर....आज मजदूर दिवस पर तमाम रचनाएँ और लेख मजद...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Sarika Mukesh
अंतर्मन की लहरें Antarman Ki Lehren
51

अक्सर……………….!!!

अक्सर….ज़िन्दगी की तन्हाईयो में जब पीछे मुड़कर देखता हूँ ;तो धुंध पर चलते हुए दो अजनबी से साये नज़र आते है .. एक तुम्हारा और दूसरा मेरा.....!पता नहीं क्यों एक अंधे मोड़ पर हम जुदा हो गए थे ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
कविताओं के मन से....!!!!
166

एक लोटा पानी और दो मुट्ठी चावल.....

थोडा रूक कर सोचे तो देखेंगे कि हम इस तरह भी तो भगवद सेवा कर सकते है!हम मानव तो अपनी जरुरत की चीजो का संग्रह कर के रख ही लेते है और जितनी जरुरत होती है उस से कहीं अधिक ही संग्रह कर लेते है!पर ये बेजु...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
hardeep rana
kunwarji's
202

महिरम

महिरमआन्दोलनक धधकैत आगिमेजरि रहल अछि मिथिलाक सपूतएहि पार, ओहि पार समवेत स्वरसँमिथिलामय भेल अछि वातावरणएहि पावन हवण यज्ञक सपलताक बाटपरकतेको वाधा-विध्न गोबरछत्ता सन जनमलआ जरूरति पड़ि रहल को...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
AMIT MISHRA
33

मराठवाड़ाः काल तुझ से होड़ है मेरी!

अप्रैलकेतीसरेसप्‍ताहमेंमैंमराठवाड़ाकेदौरेपररहा।वहांजोकुछदेखा, सुना, समझा, वहराष्‍ट्रीयमीडियामेंसूखेपरआरहीखबरोंसेमिलता-जुलताभीथाऔरदूसरेस्‍तरपरबिल्‍कुलअलहदाभीथा।इसेहमयातोमुख...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
loksangharsha
लो क सं घ र्ष !
45

मज़दूर का बच्चा

धूप बहुत तेज होने लगी थी ,बाहार बालकनी मै फ़ैले हुए कपडों को मै समेट रही थी.,गर्मी इतनी ज्यादा थी कपडों की एक बडी सी पोटली बांधकर मै अन्दर भागने को थी .तभी सामने नज़र पडी ,तीन बच्चे मेरे घर के सामन...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
प्रियदर्शिनी....
प्रियदर्शिनी........
53

ज्यादा खुश होने की जरुरत नहीं...

      केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो के निदेशक की स्वीकारोक्ति पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गयी तल्ख टिप्पणियों से मैं खुद को जरा भी उत्साहित महसूस नहीं कर रहा हूँ कि कुछ बदलाव आयेगा, सी...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
जयदीप शेखर
देश-दुनिया
75

भाषा सिखाने वाली प्रमुख ऑनलाइन वेबसाइट्स

ऑनलाइन स्पेनिश के लिए 21 देशों की ऑफिशियल भाषा स्पेनिश का काफी क्रेज है। यह यूरोपीय यूनियन की ऑफिशियल भाषा होने के अलावा संयुक्त राष्ट्रसंघ की आधिकारिक भाषाओं में शामिल है। अगर आप भी इस भाष...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
JHAJJAR IT HUB
Jhajjar IT HUB
90

मज़दूर दिवस

आज एक मई है, दुनियामजदूर दिवस मना रही हैकोई उनसे जाकर भी पूछेबेचारी मज़दूर की कौम, क्याइस दिन से कुछ पा रही है ?एक दिन मनाने से, क्याभूखे पेट की आगबुझ पा रही है ?आज भी वहीबाजरे की रोटी,लस्सन की चटन...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
तुषार राज रस्तोगी
तमाशा-ए-जिंदगी
121

"वो मजे से दूर हैं-मजदूर दिवस पर..." (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

वो मजे में चूर हैं, बस इसलिए मग़रूर हैंहम मजे से दूर हैं, बस इसलिए मजदूर हैं आज भी बच्चे हमारे, बीनते कचरा यहाँ,किन्तु उनके लाल, मस्ती के लिए मशहूर हैं कोठियों को बनाकर, हम सो रहे फुटपाथ पर उन निठल...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
152

ईशोपनिषद एवं उसके आधुनिक सन्दर्भ ......अंक -३ ....डा श्याम गुप्त ...

                                                                             ....कर्म की बाती,ज्ञ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Drshyam
श्याम स्मृति..The world of my thoughts... श्याम गुप्त का चिट्ठा..
75

Sleeping child - Bimbo addormentato - सोता बालक

Milan, Italy: May be you have come accross working children? At home, working in the kitchen or looking after small children, showing acrobatics or asking for alms on the street, washing dishes in a restaurant? Law says that child labour is illegal but the law can not give answer to the circumstances of life of these children. Today, on the world workers' day, I have selected these images of a child sleeping at work by the sculptor Antonio Carminati, made in 1891.मिलान, इटलीः...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
SUNIL DEEPAK
Chayachitrakar - छायाचित्रकार
71

Shanti

Satya Me shanti haiPratyek manusya agar satya bole to dunia me shanti khud aa jayegi....  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Rajat
38

सुन रहा है ना वो

कल मैंने आशिकी २ देखी | बहुत ही सुन्दर फिल्म बनाई टी-सीरीज ने | उसका एक गाना "सुन रहा है तू" बहुत ही सुरीला और उसके बोल दिल में अन्दर तक उतर गए हैं | अब तक मैं उस गाने को कम से कम ५० दफा सुन चुका हूँ प...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
तुषार राज रस्तोगी
तमाशा-ए-जिंदगी
101

पी लेब सबटा दूध

बाल कविता-36पी लेब सबटा दूधभोरे -भोर मोर बुधनी बछियापी जाइ छै थनसँ सबटा दूधपीयाइयो दै छै रसनी गैयाबचाइयो नै राखै पौआ दूधभरि दिन भूखल हम आ भैयानीक लागै नै पन्नी बला दूध हमहूँ बड बुधियार बौआभोरे ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
AMIT MISHRA
38

Thap-Thap (Assamese Translation)

থপ-থপগাড়ী কেতিয়া আহিব তাৰ সঠিক খবৰ পাব পৰা নাছিলো৷ ইফালে পিয়াহতে মোৰ ডিঙি লুকাই গৈছিল৷ কিযে আচৰিত স্টেচন এই বাঙ্কুৰা৷পানীৰ পাইপ ফাটি গৈছিল, দুদিন ধৰি পানী অহা নাছিল৷ চাই দেখিলো, প্লেটফৰ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
केशव कहिन
11

बुधवासरीय चर्चा --- 1231 ...... हवा में बहे एक अनकहा पैगाम ....कुछ सार्थक पहलू

       चर्चा मंच सभी परिवार के सभी पाठक को शशि पुरवार का स्नेहिल नमस्कार!मित्रों!       इस बार भी कुछ नया करने का प्रयास है आपके साथ आपके ब्लॉग के प्यारे लिंकों पर एक सार्थक चर्चा के साथ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
44

हर हँसते चेहरे के पीछे टूटा सा एक दिल होता है जी लूँ कुछ पल साथ तुम्हारे सुन लूँ तेरे सारे सुख दुःख कह दूँ तुझसे मन की गाथा ऐ पल थम जा,थोड़ा सा रुक समझ न पाई क्या न भाया कब मैंने ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
ranjana deane
11

मजदूर दिवस

6 वर्ष पूर्व
बृजेश नीरज
Voice of Silent Majority
47

गूगल से अलग भी है सर्च इंजन की दुनियाँ

मनोज जैसवाल : सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार।मेरी पिछली पोस्ट को पसंद करने के लिए आप सभी का ह्रदय से आभार। आज की पोस्ट में आपको जानकारी दे रहा हूँ कुछ प्रमुख सर्च इंजनो के बारे में,गूगल के...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
manojjaiswalpbt
ultapulta
97

पृथ्वी पर प्रजातियां | पुनर्जन्म : पद्म पुराण (Life Forms on Earth & Rebirth : Padma Purana)

दोस्तों आपने अपने परिवार के बड़े-बुजुर्गों के मुख से ये तो अवश्य ही सुना होगा :"84 लाख योनियों के पश्चात ये मनुष्य जन्म प्राप्त होता है अतः मनुष्य को जीवन में उचित कर्म करने चाहिए"अर्थात 84 लाख प...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
हंसराज 'सुज्ञ'
॥ भारत-भारती वैभवं ॥
372

पृथ्वी पर प्रजातियां | पुनर्जन्म : पद्म पुराण (Life Forms on Earth & Rebirth : Padma Purana)

दोस्तों आपने अपने परिवार के बड़े-बुजुर्गों के मुख से ये तो अवश्य ही सुना होगा :"84 लाख योनियों के पश्चात ये मनुष्य जन्म प्राप्त होता है अतः मनुष्य को जीवन में उचित कर्म करने चाहिए"अर्थात 84 लाख प...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
प्राचीन सम्रद्ध भारत
26

लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं पर बढ़ता जनता का अविश्वास !!

किसी भी लोकतांत्रिक शासन प्रणाली की सफलता के लिए वहाँ कि जनता का अपने संविधान में आस्था होना और लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं में विश्वास होना जरुरी है ! और इन संस्थाओं में विश्वास होने ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
पूरण खण्डेलवाल
38

आलस्‍य

आलस्‍य दरिद्रता का मूल है। जिसका चित आलस्‍य से पूर्ण होता है वह अपना हित नहीं समझ सकता दूसरों का हित भला क्‍या समझेगा। -- गौतम बुद्ध ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
रौशन जसवाल विक्षिप्‍त
30

बुझनुक बौआ

बाल कविता-35बुझनुक बौआhttp://m.facebook.com/photo.php?fbid=408607425903285&id=100002620926197&set=a.154102438020453.32223.100002620926197&refid=17बँसबिट्टीमे आगि लागलैसब बाँस, बबूर जड़ि गेलैथारी पीटऽ आ फूल लाबहसिरकट्टा,पिशाच आबि गेलैअगत-भगत सब मानरि पीटैनै मिझेलै मुद...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
AMIT MISHRA
45

चार शत्रुओं की पहचान !!

नमस्कार!! आज चर्चा छेडने का भाव है, व्यक्तित्व विकास के विषय पर.  मुझे प्रतीत होता है हमारे व्यक्तित्व के चार बडे शत्रु है जो हमारे व्यक्तित्व, हमारे चरित्र को सर्वप्रिय बनने नहीं देते. मै...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
हंसराज 'सुज्ञ'
59

धूम्रपान है दुर्व्यसन

धूम्रपान है दुर्व्यसन, मुँह में लगती आग।स्वास्थ्य, सभ्यता, धन घटे, कर दो इसका त्याग।।बीड़ी-सिगरेट पीने से, दूषित होती वायु।छाती छननी सी बने, घट जाती है आयु।।रात-दिन मन पर लदी, तम्बाकू की याद।अन...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
Rajendra kumar
भूली-बिसरी यादें
141

No Title

मैं और तुम ( नर और नारी )नारी तुम मेरे जीवन संगिनी नही प्राण उर्जा हो ,तुम्हारे  हर अक्ष का मैं सदा ऋणी रहा और रहूँगा, सीता, सावित्री,अहिल्या ,कुंती ,द्रोपदी,गांधारी ,सब रूपों को पाने का मै...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
सुनीता शर्मा
88

"फोटोफीचर-कुमुद" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

नन्हे सुमन सेएक रचना (फोटोफीचर)आप कभी धोखा मत खाना!कमल नहीं इनको बतलाना!!शाम ढली तो ये ऐसे थे।दोनों बन्द कली जैसे थे।।जैसे-जैसे हुआ अंधेरा।खुलता गया कली का चेहरा।।बढ़ती रही सरल मुस्काने।अदा ...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
47

कहाँ खड़ा है आज का मजदूर------?

मजदूर दिवस पर----- स्वतंत्र भारत के प्राकृतिक वातावरण में हम बेरोक टोक सांस ले        रहे हैं, पर एक वर्ग ऐसा है, जिसकी साँसों में नियंत्रण है,ये वर्ग है        हमारा "मजदूर"- "...  और पढ़ें
6 वर्ष पूर्व
jyoti khare
उम्मीद तो हरी है .........
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