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नई हलचल

उसका सच
89

इतने मसरूफ रहे दिए हम जलाने में.....

दीपावली के पावन प्रकाशमय पर्व पर आप सभी को मनवा की , मन से शुभकामनाएं आप सभी के जीवन में सुख समृद्धि , धन ऐश्वर्य की जग- मग हो . आप वर्ष भर चमकते दमकते रहें हम "दिए "बने और अपनी रोशनी से दिलों के अंधे...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
mamta vyas
मनवा
66

"इससे साफ नज़र आता है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

जो सबके मन को भाता है।वो ही चश्मा कहलाता है।। आयु जब है बढ़ती जाती।जोत आँख की घटती जाती।। जब हो पढ़ने में कठिनाई।ऐनक होती है सुखदाई।। इससे साफ नज़र आता है।लिखना-पढ़ना हो जाता है।। जब स...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
214

आत्महत्या क्यूँ?

     बहुतसेलोगसुनकेसिहरजातेहैंऔरबहुतसेलोगकरतेहैं।कुछकाकहनाहैयेपागलपनहै।मगरक्यासचमुच?सबसेपहलासवालयेहैकिक्याइंसानहीकेवलआत्महत्याकरतेहैं याऔरजीवभीकरतेहैं?अगरहमयेजानसकेँ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
vivek mishra
61

जो तुम रिपब्लिक तो हम पब्लिक हैं बाबू

आजादी की लडाई के बाद १९७७ और उसके बाद शायद अब वो समय आया हुआ है जब सच में ही एक आदमी हर राजनीतिक दांव पेंच को न सिर्फ़ समझ रहा है बल्कि उसमें अपनी सक्रियता और प्रभाव बना रहा है । बेशक ये स्थिति , महं...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
अजय कुमार झा
कुछ भी...कभी भी..
56

पल भर का ग्रहण : : हिंदी कविता

तुम्हें जिस दिन अपनी गलियों से गुज़रते देखा था,मेरा दहकता धर्मगंगोत्री के चरण धरसुरसरी संग बहने की इच्छा करने लगा था. मैं सूर्य हूँ.अपने आकाश में आंखें तरेरे आग उड़ेले अडिग बनछड़ी की नोक परसर...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
AJANTA SHARMA
अजन्ता शर्मा
51

"SOME BEAUTIFUL QUOTES"

7 वर्ष पूर्व
Manoj
डायनामिक
37

सिर्फ 14,000 में ब्रांडिड लैपटॉप ?

मनोज जैसवाल : लेनेवो और एचसीएल जैसी कंपनियों के यह लैपटॉप बाजार कीमत से तकरीबन 10,000 रुपए सस्ते हैं लेनेवो और एचसीएल जैसी कंपनियां अपने लैपटॉप सिर्फ 14,000 रुपए में ऑफर कर रही हैं लेकिन यह ऑफर आम आदम...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
manojjaiswalpbt
मजेदार दुनियाँ
81

दिल की बात

“उदासी मेरे चेहरे की कुछ और नही,मेरे दिल की बस एक सदा है।“खामोशी मेरी आँखो की कुछ और नहीँ,सन्नाटा मेरे खामोश गमोँ का है।“इशारा जो आँखोँ का आँसुओँ में है,दर्द के समंदर का एक कतरा है।“किसी को कहन...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
vivek mishra
31

"हिन्दी ब्लॉगिंग का इतिहास : एक समीक्षा" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

हिन्दी ब्लॉगिंग का इतिहास : एक समीक्षाछः महीनों के लम्बे इन्तज़ार के बाद प्रियवर रवीन्द्र प्रभात जी द्वारा लिखित और हिन्दी साहित्य निकेतन, बिजनौर द्वारा प्रकाशित पुस्तक “हिन्दी ब्लॉगि...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
124

"हिन्दी ब्लॉगिंग का इतिहास : एक समीक्षा" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

हिन्दी ब्लॉगिंग का इतिहास : एक समीक्षाछः महीनों के लम्बे इन्तज़ार के बाद प्रियवर रवीन्द्र प्रभात जी द्वारा लिखित और हिन्दी साहित्य निकेतन, बिजनौर द्वारा प्रकाशित पुस्तक “हिन्दी ब्लॉगिंग...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
136
शिर्डी के साईबाबा .......SHRI SAIBABA OF SHIRDI
116
मेरी बात तेरी बात...
262

” प्यारा बचपन “

एक बचपन का ज़माना था !वो खुशियों का खज़ाना था !!चाहत थी चाँद को पाने की !दिल तितली का दीवाना था !!खबर ना थी कुछ सुबह की !ना शाम का ठिकाना था !थक हार के आना स्कूल से !पर खेलने भी जाना था !बारिश में कागज़ क...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Manoj
डायनामिक
33

मेरी टिप्पणियां और लिंक -4

पत्नी और पतिदेवेन्द्र पाण्डेय बेचैन आत्मा  (1) करे आत्मा फिर हमें, अन्दर से बेचैन |ढूंढ़ दूसरी लाइए, निकसे अटपट बैन |निकसे अटपट बैन, कुकर की सीटी बाजी |समझे झटपट सैन, वहीँ से बकता हाँजी |गर रबि...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
रविकर
श्री राम की सहोदरी : भगवती शांता
91

साझे सपनों को साकार करता ‘दोआबा’ का यह अंक

'दोआबा' अंक - 10 अपने आकर्षक कलेवर और संपादक के रूचिकर रचना-चयन जैसे श्रमसाध्य अनुष्ठान का प्रतिफल है। यही कारण है कि दोआबा अपनी उपादेयता को मूल्यवान बनाने के साथ-साथ यह साहित्य जगत की अनिवार्य ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
- अरविन्द श्रीवास्तव
74

SUNRISE .....!!!

7 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
MY PHOTOGRAPHIC ROMANCE
111

riste[रिश्ते]---प्रेम

       प्रेम उस समय आता है जब हमे उसकी उम्मीद नही होती ,                 जब हम उसकी तलाश में नहीं होते ,प्रेम के पीछे पड़ने से कभी सही साथी नहीं मिलता,यह कवल  चाह और अ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
ajay kumar
"मन की बातें"
62

नन्हा जासूस बबलू - मधुमुस्कान

नन्हा जासूस बबलू - मधुमुस्कानदोस्तों , आपके साथ आज मैं नन्हा जासूस बबलू को share कर रहा हूँ. ये मेरे मनपसंद कॉमिक चरित्र है . ये मधुमुस्कान नाम की एक बहुत अच्छी पत्रिका में छपते थे , जो की मुझे तब भी ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
THE INDIAN COMICS भारतीय कॉमिक्स
153

दस का दम

ये फेसबुक ने ब्लॉग को मानो ग्रहण लगा दिया। करीब चार महीनों बाद ब्लॉग की शक़्ल देखी। यह जानते बुझते भी कि ब्लॉग और फेसबुक में ज़मीन-आसमान का अंतर है, यहां मन हल्का होता है तो वहां तो सारा कुछ फास्ट ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
amitabh shrivastava
अमिताभ
90

भारत के राज्य और मोहल्ले

कई दिनों से न्यूज़ में ये सुनने में आ रहा है कि अलग तेलंगाना राज्य की मांग हो रही है...कुछ लोग अलग खालसा भी मांग रहे हैं...कुछ १० सालों पहले ही मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ निकला....कुछ दिनों से बुंदेलखं...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Neha Sharma
सोचा ना था....
64

"यह उपयोगी है क्या?" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

मित्रों!मैंने सन् 1998 में कम्प्यूटर खरीदा था। उस समय में हिन्दी टाइपिंग में हिन्दी के फॉण्ट कृतिदेव आदि को प्रयोग में लाता था और पेज मेकर का अपने को माहिर समझता था, लेकिन जब सन् 2009 जनवरी से हिन्द...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
126

"दिन का प्रारम्भ" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

दिन का प्रारम्भ सूर्योदय से न होकर रात्रि 12 बजे से क्यों होता है?इसका उत्तर मेरे विचार से यह है कि-सूर्योदय का कोई सार्वभौमिक समय निश्चित नहीं है।हमारे देश में कभी सूर्योदय पाँच बजे, कभी 6 बजे औ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
68

कुछ सवाल : आप दीजिये जवाब (Some Questions for All Bloggers)

दिनाँक - 10 सितंबर 2011ब्लॉग का नाम - हिन्दी ब्लौगर्स फोरम इंटरनेशनल विषय -हिन्दी ब्लॉगिंग गाइड कड़ी - 33उप विषय -साझा ब्लॉग कैसे बनाएँ ?पोस्ट पाठक संख्या -13 टिप्पणी या प्रतिक्रिया -0 (शून्य)    &nbs...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Mahesh Barmate
Kuchh Dil Se...
127

हादसों की शक्ल में साजिशों का जलजला . .

अपनी जुबान वह खोलने ही वाला था; अपने हक की बात वह बोलने ही वाला थाकि हादसों की शक्ल में साजिशों का जलजला आया और देखते ही देखतेवह तब्दील हो गया जिन्दा लाश में, तभी से ‘वह’ फिर रहा है मारा-मारा किसी...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
M Verma
जज़्बात
80

नदी के उस पार इंसान खुश रहता है

नदी के उस पार इंसान खुश रहता हैइस पार हर दिल में ये वहम रहता हैउनके हौसले की कहानियाँ हैं मशहूरबिस्तर को इल्म तकिया नम रहता हैउन्हें कितनो से दिल लगाते देखा सबनेकौन जाने उनके दिल म...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Shankar M
Thoughtscroll
86
"मन की बातें"
158

राष्ट्र की ‘संज्ञा’ को परिभाषित करता एक उपन्यास ( ‘राष्ट्र समूह वाचक नहीं, बल्कि व्यक्ति वाचक’)

Written by परिकल्पना संपादकीय टीम | October 15, 2011 | 2‘बंद कमरा’ उपन्यास में राष्ट्र की ‘संज्ञा’ को भी परिभाषित किया गया है,व्यक्ति और राष्ट्र के बीच उत्पन्न हुए द्वन्द-प्रसंगों का भी उल्लेख किया ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
19

महुआ

मेरी बारी मेंमहुआ का यह पेड़दिन-दिन सूखता जा रहा हैअब फल नहीं आते उस तरहन गमक ही उसकीफैल पातीभीतर वाले घर – ओसारे और पास वाले तलैया तककंक-सा होता जा रहा है यह पेड़तुम्हारे जाने के बाद कहती है ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
सुशील कुमार
स्पर्श | Expressions
106

Faculty posts in IIT Roorkee Oct-2011

INDIAN INSTITUTE OF TECHNOLOGY (IIT) ROORKEERoorkee-247667 (Uttarakhand)Appointment to Faculty PositionsIIT Roorkee invites online applications from Indian Nationals for around 215 Faculty positions in carious Departments/ Centres at the levels of Professor, Associate Professor and Assistant Professor (all regular posts) and Assistant Professor (on contract). in the following  departments/ centres :Architecture & Planning, Biotechnology, Chemical Engineering, Chemistry, Civil Engineering, E...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
shobharam
Student Yuva
52


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