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नई हलचल

मुंडेर के पंछी

हर सालगर्मियां शुरू होते हीनानी लटका देती थीमुंडेर सेमिट्टी की हंडियाभर कर जल से। नहीं भूलती थीडालना रोज पानीहंडिया मेंशालिग्राम का भोग लगाने के पश्चात,संभवतः यह भी था एक हिस्सा उनकी पूजा ...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
77

दंगा

न जाने कबगरमा उठती हैपुरवैया,धुप की मखमली उजास न जाने कब बदल जाती है आग की पगडंडी में उबलने लगती है नदी पिघल कर बह उठते है किनारे उत्तप्त हो लावा की तरह। लहू की एक अग्निरेखा प्रवेश कर जाती है आत...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
72

युध्द

जब भी तुममौन रहोगेअन्याय के प्रतिकार में ,अपनी आत्मचेतना के बिरुद्धरुक जाओगेराजसत्ता के पायों से बाँध कर ।होगे तुम उपहास के पात्र मात्र।महारथीजब जब तुम होगेअन्याय के साथ,अपनी वैभवपूर्ण वी...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
69

पत्थर

१-छूकर जिसे अपने माथे सेबना दिया मैने ईश्वर, उसी पत्थर की जद में है आज मेरा सर। २-पत्थरों का घर बनाने वालों की किस्मत में होते नहीं घर पत्थर के। ३-लगे तो थे पत्थर हम दोनों को ही पर शायद मेरे माथे प...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
70

अक्स

तमाम उम्र सितारों का तलबगार रहा,हरेक शख्स ख्वाहिसात का शिकार रहा।हुस्न की धूप ढली जिस्म के मौसम बदले,आइना कितने हादसों का हमकिनार रहा।उसे ही आया नहीं मेरी वफाओं का यकीन,मुझे तो उसकी ज़फाओं का ...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
83

तुम्हारे फूल

तुम्हारे फूलतुम्हारे फूलों ने जबमेरी सुबह की पहली साँसें महकायींमैंने चाहा था,उसी वक्त तितली बन जाऊँमंडराऊँ खूबउन ख़ुशबू भरे खिलखिलाते रंगों परबहकूँ सारा दिन उसी की महक सेमहकूँ सारी रात उस...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
AJANTA SHARMA
अजन्ता शर्मा
62

विश्वास के हिमालय से सारी बर्फ पिघल चुकी

संसद में दो दिनी अप्रिय शोरगुल के बाद देश में हृदयभेदी सन्नाटा है। सब कुछ एकदम से खामोश है- सिवाय कुछ दलों में जयचंद चिन्हित और घोषित कर उन्हें पार्टी बदर करने के, कोई बड़ी उल्लेखनीय हरकतें नह...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
surjeet singh
ख़राशें
84

मंगल का हो गया मुंह काला

मंगल का मुंह काला आखिर कर ही डाला। यही तो मैंने चार दिन पहले लिखा था। आपने भी लिखा था। सबने यही लिखा था। सबको अंदेशा था। होता क्यों नहीं? जो हो रहा था, उसे तो होकर रहना ही था। अब आप क्या करेंगे? दो ...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
surjeet singh
ख़राशें
85

बारिश की एक बूंद और हजार अर्थ

भारत जैसे कृषि प्रधान देश में मानसून मेहमान की तरह है। एक ऐसा मेहमान जिसके आगमन का सभी को बेसब्र इन्तजार रहता है। अक्सर इसकी देरी जनमानस को बेचैन कर देती है। इसको लेकर उनकी अत्कंठा छुपाए नहीं ...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
surjeet singh
ख़राशें
71

दिल्ली के आसमान में ये कैसे बादलों का जमावड़ा?

देश में जितनी भी दिशाएं हैं, सभी से इस समय बादलों का रुख दिल्ली की ओर है। हर छोटा, मोटा, धूल-धूसरित, मैला, मटमैला, छोटा, बड़ा बादल कुछ सशंकित सी मुद्रा लिए राजधानी की ओर डायवर्ट है। अवसरवादिता क...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
surjeet singh
ख़राशें
68

शब्दों के हथियारों से मुंह तोड़ने की निरर्थक कवायद

हम आतंकवाद के आगे नहीं झुकेंगे। कोई ताकत हमारे मंसूबों को विफल नहीं कर सकती। कितने ही हमले हमें हमारे मिशन में नाकामयाब नहीं कर सकते। पड़ौसी देशों को मदद जारी रखेंगे। हम आतंकी घटनाओं का मुंह...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
surjeet singh
ख़राशें
60

हिसाब मांगती एक-एक सीढ़ी

बारी-बारी से सत्ता का मधुपान कर, पूरी तरह रस निचोड़ जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री बेमन से राजभवन की ओर जा रहे हैं। (अलबत्ता पहुंच चुके) पांव भारी हैं। जेब में इस्तीफा पड़ा है। बोझ से पग डगमगा रहे ...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
surjeet singh
ख़राशें
62

रोम जला, नीरो ने बजाई बांसुरी

जब रोम जल रहा था, तब नीरो बांसुरी बजा रहा था। नीरो ने गलत क्या किया? जिस बेसुरी बांसुरी में फटे सुर निकलें, उसे और किस मौके पर बजाया जा सकता है। कम से कम ऐसे मौके के बहाने बांसुरी को लोगों ने देखा ...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
surjeet singh
ख़राशें
58

बेहिसाब, बेसाख्ता, नौटंकी जारी है... देखते रहिए

इस समय देश में अजीब सी खामोशी है और सन्नाटे का हृदयभेदी शोर है। देश के आकाश में मानसूनी कम, किसी अनिष्ट की आशंका के बादल ज्यादा तैर रहे हैं। सियासत में बेतुके फैसलों की घड़ी है। कई पार्टियों के ...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
surjeet singh
ख़राशें
64

जाणता राजा (राजा सब जानता है)

कल रात जयपुर के सूरज मैदान में जाणता राजा देखा। जाणता राजा अर्थात राजा सब जानता है। यह छत्रपति महाराज शिवाजी पर बाबा साहिब पुरन्दरी लिखित भव्य नाटक है। इसमें शिवाजी की हिन्दवी स्वराज की कल्प...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
surjeet singh
ख़राशें
65

हर्षाने का सुख, मुर्झा जाने तक

इस देश में मानसून का आना खुशियों का प्रतीक माना जाता है। इस दफा ये खुशियां ज्यादा देर तक कायम न रह सकें, शायद। आसमान से टप-टप पानी गिरेगा, लेकिन ज्यादा शोर भाषणों का होगा। रिमझिम बारिश के साथ सु...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
surjeet singh
ख़राशें
67

ट्रेन टु विलेज-२

(मेरी गांव यात्रा) परसों गांव जाने के अपने अनुभव शेयर कर रहा था। कुछ ब्लॉगर साथियों ने टिप्पणियां भेजीं। लगा, सफलता की कहानी कहीं भी गढ़ ली जाए भले, स्मृतियों से गांव कभी छूट नहीं सकता। शहरों म...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
surjeet singh
ख़राशें
70

ट्रेन टु गांव

(मेरी गांव यात्रा)शहर में मन ऊब चला, तो गांव चला गया। सोचा, चलो फ्रेश हो लेंगे। (कभी-कभी गांवों की यही उपयोगिता महसूस होती है। क्योंकि गांवों में भी अब पहले जैसा कुछ नहीं रहा। लेकिन गांव फिर भी गा...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
surjeet singh
ख़राशें
65

Copying Media Files - Unity

Sorry for the long hiatus everyone. Work, work, work, work...you know the drill.Just getting through dailies on a show and was told about an interesting bug when copying over media files into your Unity. Basically, if you copy your media to one of your Unity partitions, make sure you keep the user folder that Unity has with in the OMFI MediaFiles folder closed when you copy them over. If you open the Unity User folder (ex. ZJustin), and do the copying, you run the risk of a file of the media ...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
Deepak Kashyap
Post Production Standards
23

कल रात आपने क्या देखा?

मैं रात्रि में अस्पताल में भर्ती एक रिश्तेदार के पास था। लेकिन मैच का ताजा स्कोर जानने की प्रबल उत्कंठा का शिकार था। मेरा बीमार रिश्तेदार ब्रेन हैमरेज के बावजूद एक लम्बी चैन की नींद में था, ले...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
surjeet singh
ख़राशें
65

No Title

फ़िरदौस ख़ानयुवा पत्रकार, शायरा और कहानीकार... उर्दू, हिन्दी और पंजाबी में लेखन. उर्दू, हिन्दी, पंजाबी, गुजराती, इंग्लिश और अरबी भाषा का ज्ञान... दूरदर्शन केन्द्र और देश के प्रतिष्ठित समाचार-पत्रो...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
ਹੀਰ
102

कुछ मन के ख्याल...

कितनी लगन से उसने जी होगी जिंदगीयूँ ही नहीं हँसते हुये यहाँ दम निकलता हैइबादतें, वो बड़ी बेमिसाल होतीं हैंइंसान जब भगवान से आगे निकलता हैजिंदगी में हार को तुम मात न समझोइंसान ही तो यारों गिरकर ...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
Reetesh Gupta
भावनायें...
84

धर्म भी आहत है...

कर्तव्य से बड़कर जहाँ पद हैयह मान नहीं मान का मद हैजहाँ खुलती नहीं वक्त से गाँठेंघर नहीं वो तो बस छत हैकौन फ़िर लगाये वहाँ मरहमदृड़ जो सबके यहाँ मत हैंदिल दुखाये जो अगर वाणीमान लो झूठ जो अगर सच हैक...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
Reetesh Gupta
भावनायें...
78

क्रिकेट में ड्रामा, ड्रामे की क्रिकेट

इसमें एक्शन है। ड्रामा है। सितारे हैं। राजनीति है। बिल्लो रानी का डांस है।...और क्रिकेट भी है। आईपीएल का तमाशा है ही ऐसा। आदमी क्रिकेट से बोर नहीं हो सकता। बोर होगा, तो बिल्लो रानी को देखने लगेग...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
surjeet singh
ख़राशें
72

महंगाई के साथ बयानबाजी के कुछ प्रयोग

लोकसभा में महंगाई पर बयानबाजी जारी है। बयान ही बयान। कुछ धांसू। कुछ फांसू। कुछ इमोशंस से भरे फिल्मी डायलॉगनुमा। सुनकर आंखों में आ जाएं आंसू। तो कुछ शर्मसार कर देने वाले भी। लेकिन नेता सुबह स...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
surjeet singh
ख़राशें
64

...गर मनमोहनजी सब्जी बेचने निकलें?

आजकल कई उलटबांसियां सी हो रही हैं। कई बांस उलटे बरेली को हैं। कहां शाहरुख खान करोड़ों कमाने के चक्कर में क्रिकेट के चक्कर में फंस बैठे। उनके आईपीएल के टिकट नहीं बिक रहे। कोलकाता टीम के टिकट बे...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
surjeet singh
ख़राशें
64

३ क्षणिकायें...

जीवन कठिन डगर हैजो साँसें नहीं हैं गहरीकैसे प्रभु मिलेगेंमन जो रहेगा लहरी~~~~~~~~~~मैनें धर्म को अधर्म के साथचुपचाप खड़े देखा हैमैं अधर्म की अट्टाहस से नहींधर्म की खामोशी से हैरान हूँ~~~~~~~~~~जहाँ छोड़ ...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
Reetesh Gupta
भावनायें...
84

नजरें जो घड़ियाल हो गई हैं...

सरकार चुनावों का गणित बिठाने में व्यस्त है। महंगाई बेशुमार बढोतरी पर है, पर सरकार को न जगाइए। वह अभी चुनाव जीतने का दिवास्वपन देख रही है। क्योंकि उसने किसानों का कर्जा माफ कर दिया है। बजट लोक ...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
surjeet singh
ख़राशें
66

लोग...

तेरी इस दुनियाँ में प्रभु जीरंग-बिरंगे मौसम इतनेक्यों फ़िर सूखे-फ़ीके लोगथोड़ा खुद हँसने की खातिरकितना रोज रुलाते लोगबोतल पर बोतल खुलती यहाँरहते फ़िर भी प्यासे लोगपर ऎसे ही घोर तिमिर मेंमेधा ज...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
Reetesh Gupta
भावनायें...
92

रौशनी और अंधकार...

मैनें देखा है रौशनी कोहाथों में अंधकार लियेअंधकार से लड़ते हुयेनिरंतर चल रहेइस संघर्ष मेंरौशनी को थकते हुएअंत में नहीं रही रौशनीहमारे बीचअंधकार आज भीवैसा ही खड़ा है~~~~~~~~~~~~~~~~~मैनें देखा है रौशनी...  और पढ़ें
10 वर्ष पूर्व
Reetesh Gupta
भावनायें...
80


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