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आँखे खुलते ही उसे नज़र आते हैं अपने बच्चे .. उन्हें खिलाना ,पिलाना ,सुपोषित संस्कृत कर मनुष्य बनाना ...माँ ,बेटी ,बहन ,पत्नी ,सखी इन सब रिश्तो से उसका अपना व्यक्तित्व मुखरित होता हैं ,हर रिश्ता उसके...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Dr.Radhika Budhkar
आरोही
22

आँखे खुलते ही उसे नज़र आते हैं अपने बच्चे .. उन्हें खिलाना ,पिलाना ,सुपोषित संस्कृत कर मनुष्य बनाना ...माँ ,बेटी ,बहन ,पत्नी ,सखी इन सब रिश्तो से उसका अपना व्यक्तित्व मुखरित होता हैं ,हर रिश्ता उसके...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Dr.Radhika Budhkar
आरोही
20

औरत हूँ मैं....

प्रिय मित्रो,सादर प्रणाम, पहले तो आज नारी दिवस के मौके पे मेरे सभी महिला ब्लॉगर सहभागी मित्रों को विशेष सत्कार!काफी दिन हो गए थे, व्यस्तता के कारण कुछ लिखने का वक़्त ही नहीं मिल पा रहा था, आज ज़र...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
surender
"ख़्वाबों का तसव्वुफ़"
93

TRANSFORMATION

Standing alone in the evening of heavy rains,And looking upwards to the dark sky,With full of storming thunders,And many dark clouds around.I started Praying for more and more Of such lashes of heavy rain,On my body, on my mind and on my soul;So that it could wash away my past,It could wash away all my unknowingly sins,It could wash away my baseless ego,It could wash away my useless anger,It could wash away my earthly beliefs,It could wash away my wrongdoings,It could wash away ME.I am looking t...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
FROZEN MOMENTS OF A LIFETIME..............................
109

आखिर अध्यापक पात्रता परीक्षा का क्या मतलब है !

भारत सरकार आखिर क्या चाहती है इस देश के बेरोजगारों के साथ. पहले पीटीईटी दो, फिर बी.एड. की परीक्षा, फिर प्रतियोगी परीक्षा देनी पड़ती है तब मिलती है अध्यापक की नोकरी.आखिर सरकार बेरोजगारों के खिल...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
manoj charan
BABOSA
69

फूलों की खुशबू क्यों घट रही है ?

क्या आपने कभी सोचा की दिन-प्रतिदिन फूलों की खुशबू क्यों घट रही है ? एक रिपोर्ट के अनुसार फूलों की खुशबू से आकर्षित होकर फूलों पर बैठने वाली तितलियाँ एवं कीट अब इनके पास आने से कतरातें है। इसी का...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
ANKUR DWIVEDI
शुरुआत हिंदी लेखन से
83

वाह रे मनमोहना

देश का प्रधानमंत्री तब स्वीकार करता है, तब अपनी जिम्मेदारी मानता है जब सुप्रीम कोर्ट उसके कान उमेठता है। अगर मान लीजिये ऐसा नहीं होता, अदालत बीच में नहीं आती तो क्या कोई जान पाता कि एक धीर-गंभी...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
amitabh shrivastava
अमिताभ
84

उनको गम की बात ही क्‍या ।।

मन में उमंग साहस अदम्‍य, जिनके ललाट चमकें चम-चम फिर पथ कितना भी हो दुर्गम पर, उनको गम की बात ही क्‍या ।।उँचे पहाड, गहरा सागर, या हो कांटों से भरी डगर वो करें पार हर विपति मार, बढते जाते निज मंजिल पर ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
SANSKRITJAGAT
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
80

The Window of my heart

It was a very strange night,so strange and ruthless;That I couldn’t recognize,It as last night of my life....such restless was my life ;By traveling a long journey ,That it made me Frightened and scaredOf the world around me;On that night I looked out ofThe window of my heart... .........The rains of Life were very harsh;There were the tornado's of time ;With unseen storms of fate ;Making deafening sounds around me ….My Dry eyes saw you at a distance…You were so close to my heart andYet so...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
FROZEN MOMENTS OF A LIFETIME..............................
138

ब्लॉगनामा

ब्लॉगनामा...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
विनोद पाराशर Vinod Parashar
राजभाषा विकास मंच RAJBHASHA VIKAS MANCH
85

गुलाबी इश्क़

वे शराफ़त के दिन थे । हम में अपने-अपने हिस्से की शराफ़त बची रहती थी । वो घंटों मुझे, तेरी वाली की खातिर, अपनी बालकनी में आसरा देता । हम तब तलक चाय के चार प्याले सुड़क जाते और उसकी अम्मी उफ़ तक ना कर...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
ANIL KANT
हसरतसंज
45

क्या अच्छा सोचूं?

मन-मस्तिष्क भटके हुए हैं, भटके इन द सेंस अस्थिर हैं, जिसमें आप बैठकर कोई बेहतर लेखन नहीं कर पाते, किंतु विचारों के चक्रवात में भी फंसा है मन, जो उगल देना चाहता है जो कुछ भी हैं, जैसा भी है..। तो उस 'व...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
amitabh shrivastava
अमिताभ
67

खिचड़ी

मकर संक्राति को पूर्वी उत्तर प्रदेश में खिचड़ी के नाम से जाना जाता है। इस दिन का महत्व आध्यात्मिक एवं पौराणिक रुप में बहुत ज्यादे हैं। गुरु गोरखनाथ का मंदिर गोरखपुर में खिचड़ी पर्व को बहुत सुश...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
M.P. Pandey 'Nand'
नन्दानन्द (NANDANAND)
68

Atal Bihari Vajpeyi Regional Park, Pipliyapala Park

इंदौर में कुछ दिनों पहले मह्त्वाकाँक्षी प्रोजेक्ट पूर्ण हुआ जो की 50 करोड़ की लागत I.D.A. द्वारा  बना पिपलियापाला पर बना पार्क है जिसका नाम अटल बिहारी वाजपेयी क्षेत्रीय उद्यान ( Atal Bihari Vajpeyi Regional Park ) है ...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Devendra Gehlod
My Indore City [ इंदौर शहर ]
142

change your opinion

Oh ! my father !i am your ortolan;do not cut offmy little pinion ;please change ...your ''traditional opinion ''Do not hold back my progressive steps ,Be prudent and make me glad ,You'r sky and i am orion .Please change ..your ''traditional opinion ''Do not put to death my liberal thoughts ;Be practicaldrown all doubts,You are the sea and i am dolphin .Please change...your''traditional opinion. ''...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
earthly heaven
83

"वाह समोसा..." (बाल चर्चा मंच-34)

  चर्चा मंच पर पोस्ट बहुत ज्यादा हो जाती है!इसलिए प्यारे-प्यारे नन्हे-सुमनों कीचर्चाएँ अक्सर छूट जाती हैं!-------------------काफी दिनों के बाद आज प्रस्तुत है-बच्चों के ब्लॉगों की चर्चा का 34वाँ अंक!...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
59

दिल की चाहत

कुछ बंदिशे तोरने को दिल चाहता है कुछ गलतियाँ करने को दिल चाहता है हम चल ना सके जिन राहों मेंउन रास्तों पर चलने को दिल चाहता है करता तो हूँ मै हमेशा ही अच्छे काम पर आज कुछ गलत करने को दिल चाह...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Kshitij Ranjan
क्षितिज
87
दुनिया
54

"श्रीमद भगवद्गीता से ..............."

देवभूमि ..........जैसा नाम वैसी ही पोस्ट भी होनी चाहिए कम से कम पहली पोस्ट तो ऐसी ही होनी चाहिए ..........इसलिए देवभूमि को नमन करते हुए पहली पोस्ट लगा रही हूँ.श्रीमद भगवद्गीता के सातवें अध्याय का ४० वां श्...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
53

La casa de Bernarda Alba या रुक्मावती की हवेली

La casa de Bernarda Alba या रुक्मावती की हवेलीफ़ेदेरिको गार्सिया लोरका का नाम भारतीय पाठकों के लिए अंजान नहीं है। वे एक स्पेनी नाटककार और कवि के रूप में तो मशहूर थे ही, साथ ही उन्होनें कई सुंदर निबंध भी लिखे...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Sabyasachi Mishra
मेरी दुनिया
96

"देवभूमि चिट्ठाकार समिति" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

मित्रों!आज देश-विदेश में  ब्लॉगिंग से जुड़े हुए लोगों ने संगठननुमा बहुत से ब्लॉग बना लिए है। मैंने भी हिन्दी चिट्ठाकारों को सामूहिकरूप से अपनी बात कहने के लिए एक मंच देने का प्रयास किया है।&n...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
62

उड़ीसा सरकार का समर्पण

उड़ीसा सरकार का समर्पणआज सुबह जब मैंने दैनिक जागरण का वेब पेज खोला, तो उसमें अपहृत जिलाधिकारी आर वी कृष्ण और कनिष्ठ अभियंता पबित्र मांझी की रिहाई की खबर मुझे मिली क्योंकि उड़ीसा सरकार ने उनक...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Sabyasachi Mishra
मेरी दुनिया
86

बेखुदी

खामोश-सी रातों में तन्हाई आकर पसर जाती है,कई रोज़ से आँखों में नमी-सी उतर आती है |कुछ देखे- कुछ अनदेखे-से, पलकों में जो क़ैद हैं,अधूरे ख़्वाबों के दरम्याँ, नींद आकर गुज़र जाती है |तुमसे पूछे बगैर...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Ritika Rastogi
फुर्सत के पल..
136

जायज मांग है कलमाड़ी की !

कलमाड़ी ने कहा है कि उसके के पास तो बस पांच पर्तिसत भुगतान का ही पॉवर था परन्तु पिच्यानवे पर्तिसत का पॉवर तो अन्य एजिंसियो के पास था, तो अब कॉमनवेल्थ घोटाले की जांच भी जेपीसी से करवाई जनि चाहिए.स...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
manoj charan
BABOSA
64

Psycho, मनोविज्ञान पर आधारित एक क्लासिक फिल्म!

Psychoफिल्म के एक खास पल का दृश्य !अगर कहीं से किसी कॉपी राइट का उल्लंघन होता है, तो ब्लॉगर क्षमा प्रार्थी है  और यह फोटो निकाल दी जाएगी। सामान्य रूप से हम हिन्दी फिल्मों के शौकीन अपने हिन्द...  और पढ़ें
7 वर्ष पूर्व
Sabyasachi Mishra
मेरी दुनिया
77


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