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नई हलचल

समाज सुधार कैसे हो?

"पहले स्वयं सुधरो, फिर दुनिया को सुधारना" एवं "क्या करें दुनिया ही ऐसी है"। वस्तुतः यह दोनो कथन विरोधाभासी है। या यह कहें कि ये दोनो कथन मायावी बहाने मात्र है। स्वयं से सुधार इसलिए नहीं हो सकता क...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
हंसराज 'सुज्ञ'
119

ज़न्नत की हकीकत....अंकल सैमकी गाथा कथा, आधुनिक बैकुंठ ....डा श्याम गुप्त

ज़न्नत की हकीकत....अंकल सैमकी गाथा कथा, आधुनिक बैकुंठ ....डा श्याम गुप्त                          ज़न्नत की हकीकत वयां करती अंकल सैम की गाथा कथा  .... आज के हमारे तथाकथ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
43

अब दिल को मांजा जाये -लघु कथा

अब दिल को मांजा जाये -लघु कथा 'संगीता  ये क्या  कर  रही  है ? अपना  गिलास क्यों दिया तूने ?अब घर  जाकर रख से मंजवाना ...जानती नहीं ये रेशमा मुसलमान है .....माँस  खाते हैं ये ....मुझे  तो उबकाई ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
भारतीय नारी
46

अब दिल को मांजा जाये -लघु कथा

अब दिल को मांजा जाये -लघु कथा 'संगीता  ये क्या  कर  रही  है ? अपना  गिलास क्यों दिया तूने ?अब घर  जाकर रख से मंजवाना ...जानती नहीं ये रेशमा मुसलमान है .....माँस  खाते हैं ये ....मुझे  तो उबकाई ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
मेरी कहानियां
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MAHATMA GANDHI - महात्मा गांधी

महात्मा गाँधी (अंग्रेज़ी: Mahatma Gandhi, जन्म: 2 अक्तूबर, 1869 - मृत्यु: 30 जनवरी, 1948) को ब्रिटिश शासन के ख़िलाफ़ भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का नेता और 'राष्ट्रपिता' माना जाता है। इनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Praveen Gupta
हमारा वैश्य समाज - HAMARA VAISHYA SAMAJ
268

Nature of a strange game - Rebirth of a village

प्रकृति का अजब खेल- एक गाँव का पुनर्जन्मप्रकृति का तांडव प्रकृति के भी खेल भी कितने निराले हैं। वो कब क्या करे, क्या दे, क्या ले ले ये कोई न नहीं जनता है । जब प्रकृति खुश होती है तो, प्रकृति की क...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
richa shukla
Hindi Blog For Motivational, Personal Development Article,knowledge of computers technology, job
94

शिक्षक के सम्मान मे गिरावट या वृद्धि??

स्वप्रज्ञा बुद्धि बलेन चैव,सर्वेषु नृण्वीय विपुलम् गिरीय।अज्ञान हंता,ज्ञान प्रदोय: त:सर्वदोह गुरुवे नमामि।।आज तकनीकी युग में कम्प्यूटर द्वारा शिक्षा क्षेत्र में एक नई क्रान्ति प्रज्ज्व...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
vandana
Wings of Fancy
33

HARSHVARDHAN - हर्षवर्धन

हर्षवर्धन या हर्ष (606ई.-647ई.), राज्यवर्धन के बाद लगभग 606 ई. में थानेश्वर के सिंहासन पर बैठा। हर्ष के विषय में हमें बाणभट्ट के हर्षचरित से व्यापक जानकारी मिलती है। हर्ष ने लगभग 41 वर्ष शासन किया। इन वर...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Praveen Gupta
हमारा वैश्य समाज - HAMARA VAISHYA SAMAJ
102

अपने ब्लॉग पर पेज नम्बर का विजेट कैसे लगायें (How Add Page Number Navbar In Blog)

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको बताएँगे कि  अपने ब्लॉग पर पेज नंबर का विजेट कैसे लगायें। आपने कई साइट्स/ब्लोग्स पर देखा होगा कि वहां ओल्डर पोस्ट के आप्शन की जगह पेज नंबर दिए होते हैं जो एक स्मार्ट...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Farruq
Hindi Internet Technology
106

PRABHAAKAR VARDHAN - प्रभाकरवर्धन

प्रभाकरवर्धनप्रभाकरवर्धन थानेश्वर का राजा था, जो पुष्यभूति वंश का था और छठी शताब्दी के अंत में राज्य करता था। प्रभाकरवर्धन की माता गुप्त वंश की राजकुमारी महासेनगुप्त नामक स्त्री थी। अप...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Praveen Gupta
हमारा वैश्य समाज - HAMARA VAISHYA SAMAJ
64

नाम काम तरु काल कराला ,सुमिरत समन सकल जग जाला , राम नाम कलि अभिमत दाता ,हित परलोक ,लोक पितु माता।

चहुँ जग तीन काल तिहुँ लोका ,भये नाम जपि जीव बिसोका ,बेद पुरान संत मत एहू ,सकल सुकृत फल राम सनेहू। केवल कलियुग की ही बात नहीं है ,चारों युगों में ,तीनों कालों में और तीनों लोकों में नाम को जपकर जी...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
37

“नव परिवर्तनों के दौर में हिंदी ब्लॉगिंग”

नव परिवर्तनों का दौर तकनीकी विकास का दौर है इन परिवर्तनों में तकनीकी विकास इतनी तेज़ी से हो रहा है कि जब तक किसी एक ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Usha Taneja
5

एक नई कविता....

एक नई कविता.... जहाँ दूर-दूर तक नज़र आते हैं लोगों के हुजूम,माचिस की शीत खाई तीलियों की तरह, ...खुशकिस्मत हो कि अब भी बाकी है तुम्हारे पास कुछ आंच बचा कर रखो उस बहुमूल्य ताप को जो अब भी बचा हुआ है...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Padmnabh Gautam
रचना डायरी
118

"अमृत भी पा सकता हूँ" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों!अपने काव्य संकलन सुख का सूरज सेएक गीत"अमृत भी पा सकता हूँ"अपना माना है जब तुमको,चाँद-सितारे ला सकता हूँ । तीखी-फीकी, जली-भुनी सी,सब्जी भी खा सकता हूँ।दर्शन करके चन्द्र-वदन का,निकल पड...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
90

"स्लेट और तख़्ती" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन" सेएक बालकविता"स्लेट और तख़्ती"सिसक-सिसक कर स्लेट जी रही,तख्ती ने दम तोड़ दिया है।सुन्दर लेख-सुलेख नहीं है,कलम टाट का छोड़ दिया है।।दादी कहती यही कहानी,बीत गई सभ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
201

विषय-विभाग अ

5 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
नवोत्पल
22

विषय-विभाग ब

5 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
नवोत्पल
21

अनुत्तरीत प्रश्न

मजा येईल एकदा वाचा~माणसाला सोडवता येणार नाही असा कुठलाचप्रश्न असत नाही असे जॉन केनेडी साहेब म्हणूनगेले खर ,पणअसे काही प्रश्न असतात?.मराठी पेपर च्या रद्दीचा भाव इंग्रजी पेपरपेक्षा कमी का?.उड...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
vaghesh
विनोद नगरी
57

वो जो दुनिया का सर्वश्रेष्ठ शिक्षक था.

  शिक्षक दिवस के अवसर पर हम बात करते हैं एक ऐसे वैज्ञानिक, चिन्तक और फिलास्फर की* जो आधुनिक केमिस्ट्री के पिता जाबिर इब्ने हय्यान (गेबर ) का शिक्षक था.* जो अरबिक विज्ञान के स्वर्ण युग का आरंभ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Dr. Zeashan Zaidi
Ya Husain Ya Shah-E-Karbala
75

पापई की शराफ़त भी आफ़त है!

पापाजी कभी-कभी हंसते हैं। अकसर गंभीर दिखाई देते हैं। दिखाई भी कितना देते हैं ! हमेशा तो बिज़ी रहते हैं।पहले तो सभी कमरों में बल्ब लगे थे जो पीली-पीली रोशनी देते थे। एक-एक करके पापाजी ने सभी कमरो...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Sanjay Grover संजय ग्रोवर
सरल की डायरी Saral ki Diary
76

देश में लूट-खसोट कायम रखने के लिए है फर्जी आतंकवाद

    देश में फर्जी आतंकवाद के नाम पर की गई हत्याओं में गुजरात के गृहमंत्री अमित शाह के साथ राजस्थान के पूर्व गृहमंत्री गुलाब चन्द्र कटारिया का भी नाम आया। इंटलीजेंस ब्यूरो के अधिकारी राजेन्...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
loksangharsha
लो क सं घ र्ष !
38

व्यंग कविता :- " पेंशन की टेंशन "

पेंशन के पेड़ को सींचा अंशदान सेफल मिलेंगे मीठे इसी अरमान सेसेवानिवृत्ति के बाद मिलेगी हमको पेंशनतब भी होंगे आत्मनिर्भर, फिर कैसी टेंशनबुढ़ापे मे भी न रहेगी कोई तंगीपास पैसा तो तबियत भी चंग...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Suresh Rai
मन का दर्पण,मन की बात.
79

मिले खिलाते गुल गुरू, गुलछर्रे गुट बाल -

शिक्षक दिवस के बहाने ज़रा विचार तो कीजिये !!पूरण खण्डेलवाल शंखनाद गुरु-गुरुता गायब गजब, अजब आधुनिक काल । मिले खिलाते गुल गुरू, गुलछर्रे गुट बाल । गुलछर्रे गुट बाल, चाल चल जाय अनोखी । नी...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रविकर
"लिंक-लिक्खाड़"
42

Intex Aqua i7- latest mobile phone, details in Hindi

Intexएक computer hardware बनानेवाली company हैजोमोबाइलमेंभीअबअच्छेप्रोडक्टदेरहीहै।इंटेक्सटेक्नोलॉजीनेलास्ट Wednesday कोही Indian marketमेंअपनेनएफोन'एक्वाआई 7' कोलांचकियाहै।लांचिंगकेमौकेपरकंपनीनेबतायाकिइसफोनको...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
richa shukla
Hindi Blog For Motivational, Personal Development Article,knowledge of computers technology, job
131

शीश दिये जों गुरू मिले ,तो भी कम ही जान !

                                        मैंने अपनी पढ़ाई अपने गाँव के प्राथमिक विद्यालय से शुरू की हैं|टाट –पट्टी पर पंक्ति बद्ध होकर बैठना,चाक ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
ajay kumar
"मन की बातें"
162

आश्रम हित आ श्रम करें, कर ले रविकर धर्म-

आश्रम हित आ श्रम करें, कर ले रविकर धर्म |जब जमीर जग जाय तो, छोड़ अनीति कुकर्म |छोड़ अनीति कुकर्म, नर्म व्यवहार करेंगे |देंगे प्रवचन मस्त, भक्त की पीर हरेंगे |किन्तु मढ़ैया एक, दिखाने खातिर आक्रम |ब...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रविकर
रविकर की कुण्डलियाँ
48

शीश झुकाती आज ''शालिनी ''अहर्नीय के चरणों में ,

अर्पण करते स्व-जीवन शिक्षा की अलख जगाने में ,रत रहते प्रतिपल-प्रतिदिन  शिक्षा की राह बनाने में .आओ मिलकर करें स्मरण नमन करें इनको मिलकर ,जिनका जीवन हुआ सहायक हमको सफल बनाने में .जीवन-पथ पर&nb...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHALINI KAUSHIK
! कौशल !
38

शिक्षक दिवस के बहाने ज़रा विचार तो कीजिये !!

आज शिक्षक दिवस है और इसको हर साल मनाते हैं ! बधाईयां , शुभकामनायें देकर हम अपनें कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं ! लेकिन जैसे जैसे नाम बदलते गए वैसे वैसे इनमें भावनात्मक लगाव भी कम होता गया इसका व...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
पूरण खण्डेलवाल
24

"गुरू वन्दना" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

ओम् जय शिक्षा दाता, जय-जय शिक्षा दाता।जो जन तुमको ध्याता, पार उतर जाता।।तुम शिष्यों के सम्बल, तुम ज्ञानी-ध्यानी।संस्कार-सद्गुण को गुरु ही सिखलाता।।कृपा तुम्हारी पाकर, धन्य हुआ सेवक।मन ही मन ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
39

मन के हारे हार, मन के जीते जीत

किसी विद्वान ने क्या खूब कहा है- “मन के हारे हार मन के जीते जीत है”
इस वाक्य कि गहराई में जाया जाये, तो इस वाक्य कि ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
richa shukla
8


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