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नई हलचल

(गजल)हमर संसार जरिते छै

गजल-1.67तरेगण लाख छै तैयौ नगर अन्हार रहिते छैबरू छै भीड़ दुनियाँमे मनुख एसगर चलिते छैसजल छै आँखिमे सपना नदी नाला हरित धरतीजकर बेटा सुखी ओ माइक श्रृंगार सजिते छैगजब छै रीत दुनियाँ केर मरने राख धर...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
AMIT MISHRA
48

ਵਾਰਿਸ ਸ਼ਾਹ

ਵਾਰਿਸ ਸ਼ਾਹ ਦਾ ਜਨਮ ਸੰਨ ੧੭੨੨ ਈਸਵੀ (ਅਨੁਮਾਨਿਤ) ਵਿੱਚ ਸੈਯਦ ਗੁਲਸ਼ੇਰ ਸ਼ਾਹ ਦੇ ਘਰ ਲਾਹੌਰ ਤੋਂ ਕਰੀਬ ੫੦ ਕਿਲੋਮੀਟਰ ਦੂਰ ਸ਼ੇਖੂਪੁਰਾ ਜਿਲ੍ਹੇਦੇ ਪਿੰਡ ਜੰਡਿਆਲਾ ਸ਼ੇਰ ਖ਼ਾਨ ਵਿੱਚ ਹੋਇਆ. ਜਿਆਦਾਤਰ ਭਾਰਤੀ ਉਪ ਮਹਾਂਦੀਪ ਦੇ ਲੇਖਕਾਂ ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
ਹੀਰ
116

हमें किसी की ज़मीं छीनने का शौक नहीं,साहिर लुधियानवी

हमें किसी की ज़मीं छीनने का शौक नहीं,हमें तो अपनी ज़मीं पर हलों की हाजत है॥कहो कि अब कोई ताजिर इधर का रुख न करे,अब इस जा कोई कंवारी न बेची जाएगी।ये खेत जाग पड़े, उठ खड़ी हुई फ़सलें,अब इस जगह कोई क्यारी न...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
kuldeep thakur
कविता मंच।
58

ਸ਼ਾਹ ਹੁਸੈਨ

ਸ਼ਾਹ ਹੁਸੈਨ(1538–1599) ਪੰਜਾਬੀ ਸੂਫ਼ੀ ਕਵੀ ਅਤੇ ਸੰਤ ਸਨ. ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ  ਵਾਲਿਦ ਸ਼ੇਖ ਉਸਮਾਨ ਢੱਡੇ ਜੁਲਾਹੇ ਦਾ ਕੰਮ ਕਰਦੇ ਸਨ. ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਜਨਮ ਲਾਹੌਰ (ਪਾਕਿਸਤਾਨ) ਵਿੱਚ ਹੋਇਆ. ਉਹ ਅਕਬਰ ਅਤੇ ਜਹਾਂਗੀਰ ਦੇ ਸਮਕਾਲੀ ਸਨ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਗੁਰ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
ਹੀਰ
297

आळस

मास्तर ने परीक्षा मध्ये चार पानांचा चा निबन्ध लिहायला दिला -विषय -"आळस म्हणजे काय ?आपल्या बंड्या ने ३ पाने कोरी सोडुन दिली आणि ४ पाणावर मोठ्या अक्षरात लिहिले - -"यालाच म्हणतात आळस |"...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
vaghesh
विनोद नगरी
48

एक गीत : एक मन दो बदन...

एक मन दो बदन की घनी छाँव मेंइक क़दम तुम चलो,इक क़दम मैं चलूँये कहानी नई तो नहीं है मगरसब को अपनी कहानी नई सी लगेबस ख़ुदा से यही हूँ दुआ  माँगताप्रीति अपनी पुरानी कभी ना लगेएक ही श्वाँस में हम स...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
39

एक गीत : एक मन दो बदन ...

एक गीत : एक मन दो बदन ...एक मन दो बदन की घनी छाँव मेंइक क़दम तुम चलो,इक क़दम मैं चलूँये कहानी नई तो नहीं है मगरसब को अपनी कहानी नई सी लगेबस ख़ुदा से यही हूँ दुआ  माँगताप्रीति अपनी पुरानी कभी ना लगे...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
आनन्द पाठक
गीत ग़ज़ल औ गीतिका
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एक ग़ज़ल : गो धूप तो हुई है ...

गो धूप तो हुई है , पर ताब वो नहीं हैजो ख़्वाब हमने देखा ,ये ख़्वाब वो नहीं है मजलूम है कि माना,ख़ामोश रहता अकसरपर बे-नवा नहीं है ,बे-आब वो नहीं है कुछ मगरिबी हवाओं का पुर-असर है शायदफ़सलें नई नई ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
32

चल संसद की देख, चोचलेबाजी रविकर -

बाजी रविकर हारता, जब मंदा बाजार |जार जार रोवें खड़ा, पड़ी गजब की मार |पड़ी गजब की मार, नहीं मुद्रा हँस पाए |चुप बैठी सरकार, हँसी जग में करवाए |उधर सीरिया युद्ध, चीन इत बैठा घुसकर |चल संसद की देख, चोचल...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रविकर
रविकर-पुंज
64

जाने अर्धनारेश्वर शिव चित्र के बारे में

जाने अर्धनारेश्वर शिव चित्र के बारे मेंअर्धनारेश्वर शिव चित्र मतलब आधे शिव और आधी पार्वती जी का चित्र जो हम सभी ने देखा और सुना / सभी पूजते है इस चित्र को सनातन  धर्मं  में / लेकिन क्या कभी जा...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Ashish
कानपुर पत्रिका
229

पुरुष- दंभ का मानवीय रूप

पुरुषदंभ का मानवीय रूपटूट जायेगापरझुकेगा नहीं !दंभया तो फूलेगागैस के गुब्बारे की तरहनहीं तोडूब जायेगाऐसे अंधकार मेंजहाँ सायाअपना सायाभीसाथ छोड़ खिसक जाता हैदूर कहीं अनंत पथ पर .ऐसे ही पुर...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHALINI KAUSHIK
! कौशल !
41

दुष्कर्मी दुर्दांत वो, सचमुच बड़ा समर्थ-

(1)कोसा-काटी कोहना, कुल कौवाना व्यर्थ । दुष्कर्मी दुर्दांत वो, सचमुच बड़ा समर्थ । सचमुच बड़ा समर्थ, पाप का घड़ा बड़ा है । हरदम जिए तदर्थ, अडंगा कहाँ पड़ा है । कह रविकर कविराय, कीज...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रविकर
रविकर की कुण्डलियाँ
46

छिनता सुकून : निर्झर टाइम्स

"जय माता दी" अरुन की ओर से आप सबको सादर प्रणाम . निर्झर टाइम्स में आप सभी का हार्दिक स्वागत है आइये चलते हैं आप सभी के चुने हुए सूत्रों पर.छिनता सुकूनVibha Rani Shrivastava मन का तार सि...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
बृजेश नीरज
61

शिक्षक दिवस पर आरती शर्मा का लेख

प्रिय पाठकों, सादर नमस्कार!जैसा की आप सभी जानते है, आने वाले वाले ५ सितम्बर को शिक्षक दिवस के रूप में हर साल मनाया जाता है. यह दिन आते ही मुझे अपने विद्यालय मे बिताये हर लम्हे याद आ जाते है. वो बचप...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
बृजेश नीरज
83

नज़राना

अपना दिल कभी था जो, हुआ है आज बेगानाआकर के यूँ चुपके से, मेरे दिल में जगह पाना दुनियां में तो अक्सर ही ,सभल कर लोग गिर जाते मगर उनकी ये आदत है कि  गिरकर भी संभल जानाआकर पास मेरे फिर धीरे से यूँ मुस...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Madan mohan saxena
मदन मोहन सक्सेना की रचनाएँ
52

समय का उपयोग

जो लोग अपने समय का सबसे अधिक दुरूपयोग करते है वे ही सबसे पहले इसके अभाव की शिकायत भी करते है। --- ज्‍या द ला ब्‍युयेयर...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रौशन जसवाल विक्षिप्‍त
38

ओ तालिबान !

जिसने जाना नही इस्लाम वो है दरिंदा वो है तालिबान...सदियों से खड़े थे चुपचाप बामियान में बुद्ध उसे क्यों ध्वंस किया तालिबान इस्लाम भी नही बदल पाया तुम्हे ओ तालिबान ले ली तुम्हारे व...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
anwar suhail
अनवर सुहैल का रचना संसार
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Where tenth

दसवाँ कहाँ गयाएक बार ten men एक गाँव से दूसरे गाँव पैदल जा रहे थे । रास्ते में उन्हें एक नदी पार करनी पड़ी । वे सब एक - एक कर के नदी पार करने लगे । फिर नदी के उस पार पुच कर सब एक साथ एकत्रित हो गये । फिर यह...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
richa shukla
Hindi Blog For Motivational, Personal Development Article,knowledge of computers technology, job
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"सितारे टूट गये हैं..." (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरे काव्य संग्रह 'धरा के रंग' से एक गीत"सितारे टूट गये हैं..."क्यों नैन हुए हैं मौन,आया इनमें ये कौन?कि आँसू रूठ गये हैं...!सितारे टूट गये हैं....!!थीं बहकी-बहकी गलियाँ,चहकी-चहकी थीं कलियाँ,भँवरे करते ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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गुरुजन रहे खिलाय गुल, गुलछर्रे गुट बाल

गुरु-गुरुता गायब गजब, अजब आधुनिक काल । गुरुजन रहे खिलाय गुल, गुलछर्रे गुट बाल । गुलछर्रे गुट बाल, चाल चल जाय अनोखी । नीति नियम उपदेश, लगें ना बातें चोखी । बढ़े कला संगीत, मिटे ना लेकिन पशु...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रविकर
"कुछ कहना है"
48

Thrilling journey - Viaggio emozionante - रोमाँचक यात्रा

South Tyrol, Italy: Between Rio di Pusteria and Maranza, the road distance is about 8 km but you can do this journey floating in the air in the cabinway in about 10 minutes. In the part of the journey where the cabin goes down almost vertically and you can see the ground far down, some persons closed their eyes.दक्षिण टाइरोल, इटलीः रियो दी पुस्तेरिया से मारान्ज़ा तक करीब आठ किलोमी...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SUNIL DEEPAK
Chayachitrakar - छायाचित्रकार
37

श्रीमदभगवत गीता तीसरा अध्याय :कर्म योग

श्रीमदभगवत गीता तीसरा अध्याय :कर्म योग (१ )अर्जुन बोले -हे जनार्दन ,यदि आप कर्म से ज्ञान को श्रेष्ठ मानते हैं ,तो फिर हे केशव ,आप मुझे इस (युद्ध जैसे )भयंकर कर्म में क्यों लगा रहे हैं ?आप मिश्रित व...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
45

श्रीमद भागवत गीता चौदहवाँ अध्याय :भाव विस्तार (श्लोक २५ -२७ )

श्रीमद भागवत गीता चौदहवाँ अध्याय :भाव विस्तार (श्लोक २५ -२७ )ऐसा व्यक्ति गुणों से अतीत कहा  गया है जिसके लिए मान अपमान एक समान हो जाएँ न मान गुदगुदाए न अपमान विचलित करे जिसे। अपमान से जो क्रो...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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लो क सं घ र्ष !
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आस्था की तिजारत

पिछले लगभग तीन दशकों में, हमारे समाज ने धर्म के नाम पर बहुत कुछ देखा-भोगा है। एक ओर धार्मिक पहचान से जुड़े मुद्दे राष्ट्रीय परिदृश्य के केन्द्र में आ गए हैं वहीं हजारों ऐसे स्वघोषित भगवान, बाब...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
loksangharsha
लो क सं घ र्ष !
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स्वप्न सुहाने

www.sriramroy.blogspot.in...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
39

कठिन कुसंग कुपंथ कराला ,तिन्ह के बचन बाघ हरि ब्याला , गृह कारज नाना जंजाला ,ते अति दुर्गम सैल बिसाला।

चहुँ जग तीन काल तिहुँ लोका ,भये नाम जपि जीव बिसोका ,बेद पुरान संत मत एहू ,सकल सुकृत फल राम सनेहू। केवल कलियुग की ही बात नहीं है ,चारों युगों में ,तीनों कालों में और तीनों लोकों में नाम को जपकर जी...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
57

सुबह सुबह तुम जागती हो: चर्चा मंच 1361 ....शुक्रवारीय अंक....

शुभ प्रभात.....सितम्बर माह का पहला शुक्रवार....भूमिका के बगैर चलिये चलते है मंच की ओर.....सुबह सुबह तुम जागती हो,धीरे से मेरे बगल से सरक करपहनकर चप्पलकिचन में जाती होचल चोरी करने की नादानी करते हैं |उ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
46

एक दिन देश के नाम - स्वराज मार्ग (स्वयं सेवी संस्था) द्वारा समर्पित एक दिवस देश और देश वासियों के नाम

स्वराज मार्ग की छटा नईएक शाम देश के नाम रहीहर दिल से धारा बही वहींजन जन हैं कहता खूब रहीबस जन सेवा की इच्छा सेहर एक व्यक्ति जुड़ा कहींबूँद बूँद से बन कर साग़रनव चेतना सब में लीन हुईपुरषार्थ से ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
तुषार राज रस्तोगी
तमाशा-ए-जिंदगी
37

अन्तवन्त इमे देहा नित्यस्योक्ताः शरीरिणः । अनाशिनोऽप्रमेयस्य तस्मात्‌ युध्यस्व भारत ॥ य एनं वेत्ति हन्तारं यश्चैनं मन्यते हतम्‌ । उभौ तौ न विजानीतो नायं हन्ति न हन्यते ॥

Sri Bhagwat Gita: Chapter 2, Verses 18-21अन्तवन्त इमे देहा नित्यस्योक्ताः शरीरिणः । अनाशिनोऽप्रमेयस्य तस्मात्‌ युध्यस्व भारत ॥य एनं वेत्ति हन्तारं यश्चैनं मन्यते हतम्‌ । उभौ त...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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