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मनोज जैसवाल :सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार। उत्तर प्रदेश (UP) विशेष कर पीलीभीत की बेहद खराब बिजली व्यवस्था को कोसते हुए मैं यह पोस्ट लिख रहा हूँ,आज तकनीकी पोस्टों के क्रम में आप को जानकार...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
manojjaiswalpbt
ultapulta
97

घर के गद्दारों को मिटाना बहुत जरुरी है

केवल किस्मत पर मत थोपो अपने पापों को....!!दूध पिलाना बंद करो अब आस्तीन के सांपो को....!!!!अपने सिक्के खोटे हो तो जानपर बन आती है....!!और कश्मीर की घाटी ख...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
KARTIKEY RAJ
समाज
63

"मेरे काव्यसंग्रह से एक गीत-आओ साथी प्यार करें" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरे काव्य संग्रह 'धरा के रंग' सेसे एक गीतआओ साथी प्यार करें..!ठण्डी-ठण्डी हवा चल रही,सिहरन बढ़ती जाए!आओ साथी प्यार करें हम,मौसम हमें बुलाए!!त्यौहारों की धूम मची है,पंछी कलरव गान सुनाते।बया-युग...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
98

विद्यार्थ्यांच्या परीक्षा शुल्क माफीच्या निर्णयाची अंमलबजावणी कधी होणार .....

विद्यार्थ्यांच्या परीक्षा शुल्क माफीच्या निर्णयाची अंमलबजावणी कधी होणार ..... आमदार, खासदार , मंत्र्यांचे या कडे लक्ष जाणार कि नाही ?परीक्षा शुल्क माफीचा निर्णय घेतेवेळी पुढाकार घेणारे "बो...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Kedar bhope
केदार भोपे
58

हिन्दू राष्ट्रवाद बनाम भारतीय राष्ट्रवाद

हिन्दू राष्ट्रवाद बनाम भारतीय राष्ट्रवाद के मुद्दे पर बहस नई नहीं है। औपनिवेशिक दौर में, जब आजादी का आंदोलन, भारतीय राष्ट्रवाद की अवधारणा और उसके मूल्यों को स्वर दे रहा था तब हिन्दुओं के एक त...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
loksangharsha
लो क सं घ र्ष !
41

बदलाव..

कभी अच्छे,  तो कभी बुरे होते हैंबदलाव.. जीवन का सत्य होते हैंखुशियां देकर आंखों की चमक बढ़ाते कभी दर्द देकर उन्हीं आंखों को रुला देते हैंअपने मन माफ़िक उलट लेने की इजाज़त नहीं देतेये बहुतो...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
parul chandra
24

सहकर्मी

124. सहकर्मी-मैडम, कहि दैत छी ।आब बड़का-बड़की फसि जेतै ।सम्हारि लिअ बेबस्था ।- यौ सर, आइ-काल्हि अहाँ एते तमसाइ किए छी ?- तमसैयै नै तँ कि झालि-मृदंग लऽ गीत गाबियै ।बुझू तँ एहनो कतौ भेलैए ।-की भेल से तँ कहू...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
AMIT MISHRA
25

कमाइ

123. कमाइ-गै छौड़ी, हम तोहर सच्चा प्रेमी छी ।- तँ हम की करी ?- बेसी किछु नै, तूँ हमर प्रेमिका बनि जो ।- ताहिसँ फायदा ?-फायदा यैह जे दुनू गोटा वियाह कऽ लेब ।हम दस हजार टाका कमाइ छी ।तूँ हमर करेजक रानी बनि, घ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
AMIT MISHRA
24

हँसी-मजाख

122. हँसी-मजाख-यै, एना किए भागै छी ?आँचरे तँ पकड़लौं, कोन जुलुम केलौं...नौआँ-कौआँ एक्के टा तँ सरहोजि छी ।कखनो कऽ शरबत पिया देब तँ की हएत ?-हे यौ जोंक महराज, हम अहाँकेँ पियाएब तँ अहाँक सारकेँ पियेबाक लेल ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
AMIT MISHRA
22

"कैसे उलझन को सुलझाऊँ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

किसे पथ पर मैं कदम बढ़ाऊँजिससे मंजिल को पा जाऊँ दोराहे मन को भटकाते मुझको अपनी ओर बुलाते कैसे उलझन को सुलझाऊँजिससे मंजिल को पा जाऊँ किसी डगर में नहीं फूल हैं दोनों में भरपूर शूल हैंद...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
45

जब रात बहुत अंधेरी है

जब रात बहुत अंधेरी है मैं अकेले में तुम्हारे बारे में सोचता हूँ आसमान में कुछ तारे टिमटिमाते हैं और मैं बहुत उदास हो जाता हूँ . एक मीठा ख्याल मन में आता है तुम और मैं बिलकुल अकेले अपने हाथों मे...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
राजीव कुमार झा
50

देश की शर्मिंदगी

ये देश कहाँ जा रहा है ? वर्तमान राजनीति इस देश को कितना शर्मिंदा करेगी ? आज के दिन कोई इसकी भविष्यवाणी नहीं कर सकता  । इस देश के लोकतन्त्र के मंदिर कहे जाने वाले संसद के लगभग 65 सदस्यों ने अमेरिक...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
शिव प्रकाश मिश्रा
हम हिन्दुस्तानी HAM HINDUSTANI
80

अब्बा ओ बामा सुनो, डब्बा होता गोल-

 अब्बा ओ बामा सुनो, डब्बा होता गोल |रोजी रोटी पर बनी, खुलती रविकर पोल |खुलती रविकर पोल, पोल चौदह में होना |समझो अपना रोल, धूर्त मोदी का रोना |चूँ चूँ का अफ़सोस, भेज ना सका मुरब्बा  |रहा आज ख़त भेज, रो...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रविकर
रविकर की कुण्डलियाँ
44

ओ-बामा ओ व्याहता, जाती हो क्यूँ रूठ-

राजनैतिक विरोधाभास में क्या देश की गरिमा से खिलवाड़ किया जाना सही है !पूरण खण्डेलवाल  शंखनाद - ओ बामा ओ व्याहता, जाती हो क्यूँ रूठ |पाँच साल के बाद ही, बनती कुर्सी ठूठ |बनती कुर्सी ठूठ,  झूठ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रविकर
"लिंक-लिक्खाड़"
53

वत्सल काया ...

पता होता है उन्हें की रौशनी का एक जलता चिराग जरूर होता है अंधेरे के उस छोर पे जहां बदलने लगती है जीवन की आशा, घोर निराशा में की मुश्किलों की आंच से जलने वाला चराग   उस काया ने ही तो रक्खा ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
दिगंबर नासवा
22

राजनैतिक विरोधाभास में क्या देश की गरिमा से खिलवाड़ किया जाना सही है !

जिस तरह से देश के ६५ माननीय (?) सांसदों नें अमेरिका को पत्र लिखकर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को पत्र लिखकर फेक्स के जरिये भेजा है वो ना केवल आपतिजनक है बल्कि इस देश की संप्रभुता, कानून व्यवस्...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
पूरण खण्डेलवाल
28

गुजरे जमाने की बात हुई सावन में खेल-खिलौने

बुंदेलखण्ड में सावन बच्चों के लिए खेल-खिलौनों का माह हुआ करता था, मगर अब यह गुजरे जमाने की बात लगने लगी है| बदलते वक्त के असर से बुंदेलखण्ड के खेल-खिलौने भी नहीं बच पाए हैं| आलम यह है कि सावन की पह...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Journalist
मेरा संघर्ष
56

गुम हो रही नवविवाहिता की ‘सावनी’

इसे आधुनिकता की अंधीदौड़ मानें या मंहगाई की मार, बुंदेलखण्ड में शादी के बाद पड़ने वाले पहले रक्षाबंधन का हर सुहागिन को बेसब्री से इंतजार हुआ करता था। इस दिन ससुराल से सुहागिन के लिए 'सावनी' भे...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Journalist
मेरा संघर्ष
118

गुजर रहा सावन, न पड़े झूले, न बोले मोर!

"झूला तो पड़ गयो अमवा की डार मा, मोर-पपीहा बोले..!" ऐसे कुछ बुंदेली गीत हैं, जो सावन मास आते ही गली-कूचों और आम के बगीचों में गूंजने लगते थे। साथ ही मोर, पपीहा और कोयल की मधुर बोली के बीच युवतियां झूल...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Journalist
मेरा संघर्ष
260

सावन में जितना रंग लाती है मेंहदी, उतना मिलता है पति का प्रेम

सावन में जब चारों ओर हरियाली का साम्राज्य रहता है, ऐसे में भारतीय महिलाएं भी अपने साजो-श्रृंगार में हरे रंग का खूब इस्तेमाल करती हैं। और जब महिलाओं के श्रृंगार की बात हो रही हो और उसमें मेंहदी ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Journalist
मेरा संघर्ष
63

सावन सोमवार व्रत विधि, कथा व आरती

श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को शिव जी के व्रत किए जाते हैं। श्रावण मास में शिव जी की पूजा का विशेष विधान हैं। कुछ भक्त जन तो पूरे मास ही भगवान शिव की पूजा-आराधना और व्रत करते हैं। अधिकांश व्यक...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Journalist
मेरा संघर्ष
74

मुसलमान और आज की ज़रूरत

भारत के मुसलमानों को लीडरशिप से ज़्यादा शिक्षा की ज़रूरत है... देश से मांगने की जगह देने के हालात बनाने होंगे।मेरा यह मानना है कि समाज में बदलाव साक्षरता और जागरूकता फैलाने तथा गरीबों को ख़ुदमुख्...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Shah Nawaz
25

पूरे चांद की रात...

फ़िरदौस ख़ानआज भी पूरे चांद की रात थी... हमेशा की तरह ख़ूबसूरत... इठलाती हुई... अंगनाई में लगी चमेली में खिले सफ़ेद फूल अपनी भीनी-भीनी महक से माहौल को और रूमानी बना रहे हैं... नींद आंखों से कोसों दूर ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
Firdaus Diary
35

जिसको देखा करते थे आसमान में चमकते हुए

मनोभाव:जिसको देखा करते थे आसमान में चमकते हुएआज उसी मां को देखते है सरे राह तडपते हुएरोती थी वो बिलखती थी वो सारी रातपर पहले  नहीं थे उसके ऐसे  हालातअपनी इज्ज़त अपने घर में ही तो है ऐसा कहत...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Ashish
कानपुर पत्रिका
80

'प्राइमरी स्कूल'

वो बस्ता.... वो पटरी...दुधिया... और स्याही... वो मुंशी जी की चपत... औ पंडी जी की डांट... वो मास्साब का टोकना... कि... कैसे नहाते हो? यहां मैल बैठा है... वहां मैल बैठा है... वो पन्द्रहअगस्त और छबिच्जन्वरी... वो लड्ड...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Deen Dayal Singh
बचपन के रंग
74

दुर्मर-दामिनि देह, दुधमुहाँ-दानव ताके-

छोरा छलता छागिका, छद्म-रूप छलछंद | नाबालिग *नाभील रति, जुवेनियल पाबन्द |जुवेनियल पाबन्द, महीने चन्द बिता के |दुर्मर-दामिनि देह, दुधमुहाँ-दानव ताके-दीदी दादी बोल, भूज छाती पर होरा |पा कानूनी झोल, छ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रविकर
रविकर-पुंज
75

पाठक करो क़ुबूल, निमंत्रण, बढ़िया चर्चा-

“चर्चा मंच-अंकः1316” (गौशाला में लीद)रूपचन्द्र शास्त्री मयंक  चर्चामंच  बढ़िया चर्चा कर रहे, गुरुवर मौका पाय |तरह तरह के रंग भर, चर्चा मंच सजाय |चर्चा मंच सजाय, आज की छटा निराली |खिल उठता हर फू...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रविकर
"लिंक-लिक्खाड़"
50

पिता

चुपचाप पीते रहेतुम जीवन का गरल भीतर ही भीतरचलते रहे कितने ही युद्धपर तुम उनसे लडते हुए भीबाहर से बने रहे सहज़ और सरलना तो किसी नेरूचि ही ली देखने मेंऔर तुमने भीअपना अंतःकरणसदा छिपायामाँ का प...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Sarika Mukesh
अंतर्मन की लहरें Antarman Ki Lehren
51

रहे सुशासन मौन अब, मनमोहन से डील

तालीमी हालात हों, या हो मिड डे मील रहे सुशासन मौन अब, मनमोहन से डील मनमोहन से डील, पैर में चोट लगाईं स्वयं कुल्हाड़ी मार, मौन हो जाता भाई लगा गया आरोप, विपक्षी को दे गाली खुद की गलती तोप, ब...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रविकर
रविकर की कुण्डलियाँ
38


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