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नई हलचल

..मेरी माँ ..

कभी तपती जैसे सूरज सी, कभी शीतल जैसे चन्दन सी,कभी सौंधी जैसे मिटटी सी, कभी मीठी जैसे मधुबन सी..कभी जोर-जोर चिल्लाती थी, कभी लोरी गाके सुलाती थी,कभी खिलाके सबको घर में, खुद भूखी ही सो जाती थी..कभी ऊँ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Prashant Gupta
'क्रांति'
73

ये कैसा विकास? खाद्य नमक बनता 'सफ़ेद ज़हर'

औद्योगिक विकास रुपी अजगर किस प्रकार से गुजरात की प्राकृतिक संपदा को अपना ग्रास बनाता जा रहा है , इसका जीवंत प्रमाण कच्छ में उत्पादित नमक का औद्योगिक प्रदूषकों एवं रासायनिक कचरे की वजह से की व...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Prashant Gupta
'क्रांति'
66

रेलवे की बदहाली पर एविएशन की चांदी

टिकट नहीं मिल रहे हैं आजकल...जल्दी में जाना है तो भूल जाइए,तत्काल में टिकट लेना सपना हो गया है जिसका पूरा होना बेहद मुश्किल है...ऐसे में टिकट लें तो कैसे..सोचकर रोआं सिहर जा रहा है कि तत्काल में टिक...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
AMRIT UPADHYAY
कशमकश
56

मुस्कान के पीछे का दर्द

ऐसी तो बिलकुल नही थी वो, उसकी मुस्कान के पीछे जो दर्द था उसे हर किसी के लिए समझ पाना नामुमकिन था। कहते है की शादी दो परिवारों, दो आत्माओ का मिलन है, पर न जाने क्यूँ दिलों के बंधन तो आज भी खुले है। म...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Ritesh
Satya: The Voice of Truth
55

अपनी माँ की अनुपस्थिति में बच्चे क्यों रोते है ?

प्रायः देखा गया है कि कुछ बच्चे अपनी माँ की अनुपस्थिति में बहुत रोते है और उनके लिए अपनी माँ की अनुपस्थिति असहनीय होती है,पर इसके विपरीत कुछ बच्चों में माँ की अनुपस्थिति उनपर कोई विशेष प्रभाव ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
ANKUR DWIVEDI
शुरुआत हिंदी लेखन से
65

खुशखबरी

हिंदी ब्लॉगर समुदाय को ये सूचित करते हुए मुझे हार्दिक पर्संनता हो रही हे की इस वर्ष मेरा चयन आई ऐ एस परीक्षा में ४०५ वी रेंक पर हो गया हे । संभवत आई आर एस मिल जाएगा .आप सभी ब्लागर्स का ज्ञान संवर्...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
rakesh jain
आउट आफ़ बाक्स
58

क्या हिन्दी में बेहतर ब्लॉग लेखन की शुरुआत हो चुकी है ?

आज जिस प्रकार हिंदी ब्लॉगर साधन और सूचना की न्यूनता के बावजूद समाज और देश के हित में एक व्यापक जन चेतना को विकसित करने में सफल हो रहे हैं वह कम संतोष की बात नहीं है । अपने सामाजिक सरोकारों को व्...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
शब्द-शब्द अनमोल
79

मै वो ख्वाब नहीं हू जो रोज आऊंगा

मै वो  ख्वाब नहीं हू जो  रोज आऊंगा करोगे याद मुझे, जब मैं गुजर जाऊंगातुम्हे लगता है के मै तुम्हे भूल जाऊंगाता उम्र ये भूल रहेगी तुमको भूलने की कोशिश गर करोगे तुम मुझकोऔर भी ज्यादा तुम्हे या...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
vinay
My Thoughts
6

आज वो जिन्दगी की जंग हार गयी वो नहीं है चली गयी ......

आज वो जिन्दगी की जंग हार गयी आखिर खुदा ने उसे बुला हीं लिया , ताउम्र उसने अपने परिवार को कुछ इस तरह संभाला की गांव में लोग उसकी मिशाल दिया करते है , उसे किताबी भाषा का तनिक भी ज्ञान नहीं था , पर जब भ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Manish
ये सच है
79

सेक्स स्टिंग ऑपरेशन ( न्यूज़ , न्यौता या प्रचार ?)

न्यूज़ चैंनलों की गलाकाट टीआरपी प्रतिस्पर्धा का एक और नया उदाहरण सामने आ रहा है.. समाज में तथाकथित 'सनसनी' फ़ैलाने वाले प्रोग्रामों का स्तर आजकल इतना गिर चुका है की, वे पत्रकारिता की सारी सीमा...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Prashant Gupta
'क्रांति'
89

नीबू के औषधीय गुण

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); नीबू का सेवन हर मौसम में किया जा सकता है ! और सभी नीबू से परिचित भी हैं, यह विटामिन सी का महत्वपूर्ण स्रोत है ! इसकी सबसे बडी विशेषता यह है कि यह हर अवस्था में अम्लीय ही रहता है ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
janki oli
Sunder Sapna
87

میرے محبوب

بزرگروں سے سناہے کہ شاعروں کی بخشش نہیں ہوتی وجہ، وہ اپنے محبوب کو خدا بنا دیتے ہیں اور اسلام میں اللہ کے برابر کسی کو رکھنا شِرک یعنی ایسا گناہ مانا جاتاہے، جس کی معافی تک نہیں ہے کہنے کا مطلب یہ ہے کہ شاعر جنت کے حق دار نہیں ہوتے اُنہیں دوزخ(جہنم) میں پھینکا جائے گا اگر واقعی ای...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
جہاںنُما
70

पुरानी यादे

वो गलिया, वो कुचे, वो घर याद आते है !मुझे अब भी अपनी मुफलिसी के दिन याद आते है !!कोई भूल जाये आज के वक़्त को देखकर !मुझे अब नानी के साथ गुजरे दिन याद आते है !!अब सुकून जिन्दगी मै बचा ही कहा है !मुझे आज भी...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Devendra Gehlod
Diary of poetry | Collection of poetry
67

मै और वक़्त

कभी- कभी खुद से लड़ता हूँ मै !कभी जीत जाता हु तो कभी हार जाता हूँ मै !!कई बजी खेली है खुद के साथ मैंने !पर असल जिन्दगी में हार जाता हूँ मै!!टुटा हूँ पर गिरा नहीं अपनी नजरो से !कभी अकेले मै यु ही मुस्कुर...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Devendra Gehlod
Diary of poetry | Collection of poetry
69

सलाम एक ग़रीब की महानता को

आज दिनांक 31.05.2010 को परिकल्पना ब्लोगोत्सव-2010 के अंतर्गत बीसवें दिन के कार्यक्रम का लिंक -ब्लोगोत्सव की आखिरी परिचर्चा : क्या आत्मा अमर है ?http://www.parikalpnaa.com/2010/05/blog-post_31.htmlसुमन सिन्हा की कविता : तुम्हारे नामhttp://...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
शब्द-शब्द अनमोल
90

ਕਾਲੀ ਕੋਇਲ ਤੂ ਕਿਤ ਗੁਨ ਕਾਲੀ

ਸੂਫ਼ੀ ਬਾਬਾ ਫ਼ਰੀਦ...ਇਤਿਹਾਸ ਗਵਾਹ ਹੈ ਕਿ ਸਮੇਂ-ਸਮੇਂ ਤੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਭਟਕਣ ਤੋਂ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਹਿੰਦੁਸਤਾਨ ਵਿਚ ਪੀਰਾਂ, ਫ਼ਕੀਰਾਂ, ਸਾਧੂ, ਸੰਤਾਂ ਨੇ ਆਪਣੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਨੂੰ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਲੇਖੇ ਲਾ ਦਿੱਤਾ. ਇਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੀ ਪੰਜਾਬੀ ਸੂਫ਼ੀ ਪਰੰਪਰਾ ਦ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
ਹੀਰ
79

महत्व ज्योतिर्लिंग का

क्या आप जानते है क़ि ज्योतिर्लिंग क्या है ? कहाँ है ? ज्योतिर्लिंग का आशय शिवजी के प्रतीक चिन्ह के रूप से है। त्रेता युग की बात है, रावण शिवजी का परम भक्त था और रावण ने शिवजी से यह वरदान मा...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
ANKUR DWIVEDI
शुरुआत हिंदी लेखन से
121

समान्तर मीडिया की दृष्टि से कितनी सार्थक है हिन्दी ब्लोगिंग .......

आज दिनांक 28.05.2010 को परिकल्पना ब्लोगोत्सव-2010 के अंतर्गत उन्नीसवें दिन के कार्यक्रम का लिंक -तीन दिवसीय प्रथम अन्तराष्ट्रीय हिंदी ब्लॉग उत्सव लखनऊ में ....http://www.parikalpnaa.com/2010/05/blog-post_28.htmlयह प्रस्ताव केवल ब्लो...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
शब्द-शब्द अनमोल
63

अंग्रेज तो हिन्दुस्तान को आज़ाद छोड़ कर चले गए, लेकिन अपने पीछे हिंदी भाषा को अंग्रेजी का गुलाम बना कर गए

आज दिनांक 26.05.2010 को परिकल्पना ब्लोगोत्सव-2010 के अंतर्गत अठारहवें दिन प्रकाशित पोस्ट का लिंक-एक सीमा तक करें शैतानियाँ, ना किसी का दिल दुखाना चाहिए। http://www.parikalpnaa.com/2010/05/blog-post_1497.htmlअजित कुमार मिश्र की दो कवि...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
शब्द-शब्द अनमोल
59

मुस्करा के बोले फिर मिलने की है आरजू अच्छा लगा ,,,,

जब उन्होंने फिर मोहब्बत से की गुफ्तगू अच्छा लगा ,,,,मुस्करा के बोले फिर मिलने की है आरजू अच्छा लगा ,,,,हम तो तनहा बड़ी कशमकश-ओ -वहिशत में जी रहे थे,,,उन्होंने किया प्यार का नया सिलशिला शुरू अच्छा लग...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Praveen
इदम् राष्ट्राय || इदम् न मम् ||
103

रसूख वाले कानून को बपौती समझते हैं ....

रुचिका को आखिर २० साल बाद न्याय मिला ,राठौर को कम ही सही लेकिन सजा तो मिली , लेकिन एक चीज़ जोऐसे मामले को देकते हुए सामने आते है वो ये की , रसूख वाले मुजरिम क़ानूनी रफ़्तार को अपने हिसाब से गति देने ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Manish
ये सच है
80

ब्लोगिंग को विचारों का साझा मंच बनाएं, गुणवत्ता का ध्यान रखें : देवमणि पाण्डेय

श्री देवमणि पाण्डेय का 4 जून 1958 को अवध की माटी में जन्म। ठेंठ सुल्तानपुरी। हिंदी और संस्कृत के सहज साधक। कवि तो हैं ही मंच संचालन के महारथी। कवि सम्मेलन और सुगम संगीत से लेकर शास्त्रीय संगीत के ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
शब्द-शब्द अनमोल
55

दिनांक २४.०५.२०१० को आयोजित कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण

आदरणीय मित्रों,स्थानीय स्तर पर उत्पन्न अपरिहार्य व्यवधान के फलस्वरूप ब्लोगोत्सव-२०१० के सत्रहवें दिन का कार्यक्रम अचानक स्थगित करना पडा, जिससे आपको असुविधा हुई ! यह हमारे लिए अत्यंत खेद का ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
शब्द-शब्द अनमोल
44

गाँधी जी की ताबीज:एक बहु-प्रचलित उद्धरण

गांधी जी की ताबीजगांधी जी कहते हैं, मैं तुम्‍हें एक ताबीज देता हूँ। जब भी दुविधा में हो या जब अपना स्‍वार्थ तुम पर हावी हो जाए, तो इसका प्रयोग करो। उस सबसे गरीब और दुर्बल व्‍यक्ति का चेहरा याद क...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
123

कभी हाँ कभी न तेरा ये बहाना बुरा लगता है ,,,,(प्रवीण पथिक,)

तेरा ये बनावटी सा मुस्कराना बुरा लगता है,,,कभी हाँ कभी न तेरा ये बहाना बुरा लगता है ,,,,कितनी तंगी खुशहाली साथ काटी थी हमने,,,,,ये जिन्दगी यूँ अधर में छोड़ जाना बुरा लगता है ,,,उम्र आंकते हुए खिची थी लक...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Praveen
इदम् राष्ट्राय || इदम् न मम् ||
102


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