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सनातन धाम को प्राप्ति

जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सःअर्जुन हे अर्जुन ! जो मेरे आविर्भाव तथा कर्मों की दिव्य प्रकृति को जानता है , वह इस शरीर को छोड़ने पर इस भ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
somendra
Gita Gyanpeeth
70

परिकल्पना और फरगुदिया : स्त्री जीवन और साहित्य------------

फरगुदिया : स्त्री जीवन और साहित्य------------ महिलाओं के जीवन के सार्थक पहलुओं की पड़ताल करता एक समूह जो विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों और कार्यशालाओं के माध्यम से अपनी पहचान बना रहा है. फरगुदिया नए ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
परिकल्पना
39

विरोधी रसों का परिपाक -दूसरा सम्पादकीय वागीश मेहता ,वीरेंद्र शर्मा

विरोधी रसों का परिपाक -दूसरा सम्पादकीय वागीश मेहता ,वीरेंद्र शर्मा  दिल्ली में सरकार बनने बनाने का नाटक ज़ारी है। ये विचित्र बात है कि नाटक के फलागम से पहले ही रस परिपाक हो रहा है। इस नाटक मे...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
55

लोकपाल पर आ गया, बढ़िया यह संजोग -

पापा कहते हड़बड़ा, नाम करेगा पूत -"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-38पापा कहते हड़बड़ा, नाम करेगा पूत |गली मुहल्ला घर त्रसित, असहनीय करतूत |असहनीय करतूत, शिकायत हर दिन आये |तोड़-फोड़ खिलवाड़, फटे में टांग अड़ा...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रविकर
"लिंक-लिक्खाड़"
41

दिल्ली थोड़ी दूर बस, बस देगी पहुंचाय-

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-38आशा अपने राम को, नारायण आशीष । खड़ा बड़ा साम्राज्य हो, दर्शन की हो फीस । जोड़े रकम अकूत । नाम करेगा पूत ।। १॥ राहु-केतु लेते चढ़ा, खींच खींच आस्तीन । दोष दू...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रविकर
रविकर की कुण्डलियाँ
69

मत'वाले ये चार, फतह दिल्ली कर लेते -

गोटी कर दे लाल जो, झाड़ू दिया बुहार |हार गले में डालके, मत'वाले ये चार |मत'वाले ये चार, फतह दिल्ली कर लेते |खा के मीठे आम, गुठलियां पकड़ा देते |इत रोटी भी नाँय, उधर रोटी पर बोटी |उत डीलक्स उड़ान, ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रविकर
"कुछ कहना है"
35

तू

मेरे भीतर एक स्याह रात पलती  हैतू अपनी दस्तकों से इसमें उजाले न भरमुझे इन वीरानियों की एक आदत सी हैतू अपनी बगिया के इसमें फूल मत भरमैं रोज़ सूरज सी उगती हूँ ,मरती हूँ कभीतू मेरे लिए अपनी आँख के ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Manisha Verma
मेरी डायरी से
35

ब्रह्मधाम आसोतरा में आज प्रेम सभा है

ऊँ ब्रह्मणे नमः । प्रेम से ही सृष्टि का जन्म होता है, प्रेम से ही उसकी व्यवस्था होती है और अंत में प्रेम में ही वह विलीन हो जाती है प्रेम ही जगत का सार है। इसलिये प्रेम सभा में प्रेम से पधारो सा ऊ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
  Sawai Singh Rajpurohit
RAJPUROHIT SAMAJ
79

"नभ में काले बादल छाये" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

मेरे काव्य संग्रह "धरा के रंग" सेएक गीत"नभ में काले बादल छाये"बारिश का सन्देशा लाये!!  नभ में काले बादल छाये!  छम-छम बून्दें पड़ती जल की,  ध्वनि होती कल-कल,छल-छल की,  जग की प्यास बुझाने ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
234

"आप का कनफ्यूजन" (चर्चा मंच : अंक-1463)

 मित्रों!सोमवार के लिए मेरी पसन्द के लिंक देखिए।(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')--नमनमुझे कुछ कहना है ....पर अरुणा --एक बूँद ओस की. सुबह सुबह पत्तों पर दूर से, कुछ चमकते देखा-? ऐसे लगा जैसे ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
88

एक किरण

एक किरण रौशनी की भटक कर भीतर आ गई थीमैंने सांकल तो कस के लगाई थीफिर भी बिना आहटवो चुपचाप चली आई थीहल्के से मुझे छू  के बोलीतू मुस्कुरा मैं तेरे लिए आई हूँतेरे आंसू आसमाँ  ने गिने हैऔर कुछ त...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Manisha Verma
मेरी डायरी से
37

औरों के दीयों से जो तेल चुराये, वो क्या बिजली के सस्ते दाम करेगा

पापा कहते हैं बड़ा काम करेगालंगड़ी गुठली को चौसा आम करेगाहाथों में झाड़ू लिए घूम रहा हैअब ये सफ़ाई सुबहो-शाम करेगाबन्दर के हाथों में जो आया  उस्तराअपना ही काम ये तमाम करेगाचेला  गुरु की धोती ख...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Hasyakavi Albela Khatri
अलबेला खत्री की महफ़िल
102

आरोग्य प्रहरी

आरोग्य प्रहरी ( १)हाथ और आँखों के बेहतर समन्वयन परस्पर तालमेल के लिए कोई साज़ बजाना सीखिए। Learn to play a musical instrument .It's a good way to improve your hand eye co-ordination .(2)  Include oregano ,extra -virgin olive or virgin coconut oil in your diet .They protect  skin from infection and promote healthy blood flow .Not onl...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
40

मै नारी हूँ .............

मै नारी हूँ ................मै दुर्गा , अन्नपूर्णा मै हीमै अपूर्ण  , सम्पूर्णा मै ही ।मै उमा , पार्वती मै ही ,मै लक्ष्मी , सरस्वती मै ही ।मै सृजक , संचालिका मै ही ,मै प्रकृति , पालिका मै ही ।मै रक्षिका , संहार...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
48

मै नारी हूँ ....................

मै नारी हूँ ................मै दुर्गा , अन्नपूर्णा मै हीमै अपूर्ण  , सम्पूर्णा मै ही ।मै उमा , पार्वती मै ही ,मै लक्ष्मी , सरस्वती मै ही ।मै सृजक , संचालिका मै ही ,मै प्रकृति , पालिका मै ही ।मै रक्षिका , संहार...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
36

तुम पुकार लो, तुम्हारा इंतजार है ...

कुछ गीत ऐसे होते हैं, जिन्हें हम कभी भी, कही भी, किसी के भी साथ गुनगुनाने लगते हैं लेकिन इसके उलट कुछ गीत ऐसे होते हैं, जिन्हें गुनगुनाने के लिए हम और हमारी तन्हाई का साथ ही काफी होता है। लफ्ज़ों ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
gayatri
चरकली
61

विरोधी रसों का परिपाक दिल्ली में सरकार बनने बनाने का नाटक ज़ारी है। ये विचित्र बात है कि नाटक के फलागम से पहले ही रस परिपाक हो रहा है।

विरोधी रसों का परिपाक  दिल्ली में सरकार बनने बनाने का नाटक ज़ारी है। ये विचित्र बात है कि नाटक के फलागम से पहले ही रस परिपाक हो रहा है। इस नाटक में करुण रस ,वीर रस और शांत  रस तीनों विचित्र ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
43

''आप'' की मम्मी

  ''अरुणा ''सतीश ने कॉलिज में अरुणा को पीछे से आवाज़ लगायी ,''हाँ''अरुणा ने कहा ,क्या सोचा ,इतिहास लोगी या राजनीति शास्त्र ,नहीं अभी कुछ नहीं सोचा ,मम्मी से पूछकर बताऊंगी ,कहकर अरुणा क्लास में चली ग...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHALINI KAUSHIK
! कौशल !
36

गीत...पीर मन की....डा श्याम गुप्त....

                                                               पीरमनकीजान लेते   पीर मन की     तुम अगर,तो न भर निश्वांस ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
भारतीय नारी
40
Pebble In The Still Waters
56

98. चौलिया

       पिछले- नवान्न वाले पोस्ट में- नये चावल का जिक्र आया था। यह नया चावल हमारे घर में चौलिया गाँव से आता है। यह हमारा पैतृक गाँव है। बरहरवा से कुछ ही किलोमीटर दूर है। आज क्या मन में आया, ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
जयदीप शेखर
कभी-कभार
56

वह सोलह की रात, आज भी अक्सर कौंधे

१६ दिसम्‍बर क्रान्तिVikesh Badola हथेली में तिनका छूटने का अहसासकौंधे तीखे प्रश्न क्यूँ, क्यूँ कहते हो व्यर्थ |जीवन के अपने रहे, सदा रहेंगे अर्थ |सदा रहेंगे अर्थ, रहेगी मनुज मान्यता |बने अन्यथा देव, ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
रविकर
रविकर की कुण्डलियाँ
72

एक बूँद ओस की.

एक बूँद ओस की......सुबह सुबह पत्तों पर दूर से,कुछ चमकते देखा-?ऐसे लगा जैसे पत्तों में कोई मोती उग आया, कौतूहल बस पास गया मुझे लगा शायद ये पत्तों के आँसू है, समझ के मेरी बातों को वो मुझसे कुछ कहने लगी,त...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
dheerendra singh bhadauriya
काव्यान्जलि
142
सिनेमा गीत-संगीत
51

सत्ता-शासन भोग (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सहज पन्थ को छोड़ कर, अपनाया हठ-योग।जनहित के सद्कर्म में, सत्ता-शासन भोग।।--शासन करने में करो, अब मत हील-हवाल।अमल घोषणापत्र पर, करो केजरीवाल।।--राजनीति से था किया, जब इतना अनुराग।कड़ी चुनौती देख ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
56

एक फरियाद

फिर पुकार मुझेचुपके से  ले  मेरा नामडूब रही हूँ अपने ही मन के अंधेरों मेंअपनी लौ से कर दे रौशन मुझेबहुत झूठ जी चुकी हूँआज तेरे सच में जीने का हौसला हुआ हैतेरी बाँहो  के लिए तड़पी हूँ बेइंतहा...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Manisha Verma
मेरी डायरी से
38

Shrilaal

5 वर्ष पूर्व
Shrilaal
0

तेरहवीं -कहानी

''मृत्यु , दाह-संस्कार और तेरहवीं .....इसके बाद बस स्मृति-पटल पर दिवंगत व्यक्ति की छवि ,उसका मुस्कुराना ,रूठना , मनाना , हिदायतें और शेष इच्छाओं की अपूर्णता को लेकर कसक ...बस यही तो है इस जीवन का सच .'' वि...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
मेरी कहानियां
57

मुज़़फ्फरनगर का सांप्रदायिक दंगा - भाग-6

जामिया अरबिया ज़ैनतुलइस्लाम, कैम्प, लोनी 8 सितम्बर 2013 से ही इस कैम्प में ज़िला बाग़पत, शामली, मुज़फ्फरनगर और अन्य 15 गाँवों से लोग आने शुरू हो गए थे। इस कैम्प में 3,500 शरणार्थी थे, लेकिन अब 800 शरणार्थी रह र...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
loksangharsha
लो क सं घ र्ष !
27

मासेमारी

एकदा मासेमारीसाठी गेलो तेव्हा एका सापाने बेडूक पकडलेला मी पाहिला. बेडूक मोठ्या माशासाठी चांगले भक्ष म्हणून मी सापाला पकडून बेडूक त्याच्या तोंडातून काढला. सापाला मला चाऊ न देता परत सोडण...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
vaghesh
विनोद नगरी
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