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आठवे दशक की लघुकथाए

युगधर्म             लक्ष्मीकांत  वैष्णव                     अंदर कुछ बंट रहा था। तनिक ठिठका तो  द्वारपाल ने नजदीक आकर कहा, रेवड़ी बंट रही है। खाना चा...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
bhagirath
ज्ञानसिंधु
50

मैँ आ रहा हूँ

तुम किन खयालोँ मेँ खोये हो? अभी तक चिरनिँद्रा मेँ सोये हो!मैँ तुम्हे यूँ सोने न दूंगा,प्रभात बन तुमको जगाने आ रहा हूँ,कोई गीत है मेरे लबोँ पर,बोल उसके गुनगुनाये जा रहा हूँ॥ किस धुँधले भविष्य मेँ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Dharm Raj Sharma
Dharm Raj Sharma
37

और वह भिडंत...

...भाग-१  ईश्वर की खोज में.... ' अल्फा 'व  भाग-२  ईश्वर की खोज में... ' अल्फा केवल एक ही होता है '....  से आगे...दिसंबर २०३२दिसंबर २०३२ को मैं अपनी पहली फील्ड पोस्टिंग पर गया, मुझे एक 'मुल्क विशेष' के इराद...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
प्रवीण शाह
32

रंज से इस कदर याराना हुआ @ QUICK बंदी

      कमलेश सिंह की कलम  से Fear, Oh Dear!मैं तो बस आप ही से डरता हूँ. मैं कहाँ कब किसी से डरता हूँ. मेरी दुनिया है रोशनाई में, इसलिए रौशनी से डरता हूँ  बहर-ए-आंसू हूँ बदौलत तेरी, तेरी दरिया...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Shahroz
Hamzabaan हमज़बान ھمز با ن
82

मेरा अस्तित्व ..!

कैसे  कठ पुतली बन  जांऊ ।क्यों कर मैं खुद को बिसरांऊ॥मेरा  होना  भी  होना  है ।क्या जीवन एक खिलौना है॥अस्तित्व मेरा  भी अपना है,या  केवल  रोना - धोना है॥बस सोच-सोच के हर पल हर क्षण, क...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Udayvir Singh
Zindagi Phir Bhi Hai || ज़िंदगी फिर भी है
60

*** भारत का स्वर्णिम अतीत ***

आज से लगभग 100-150 साल से शुरू करके पिछले हज़ार साल का इतिहास के कुछ तथ्य। भारत के इतिहास/ अतीत पर दुनिया भर के 200 से ज्यादा विद्वानों/ इतिहास विशेषज्ञों ने बहुत शोध किया है। इनमें से कुछ विद्वानों/ इ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Praveen Gupta
हिन्दू - हिंदी - हिन्दुस्थान - HINDU-HINDI-HINDUSTHAN
165

सृष्टि महाकाव्य---अष्टम सर्ग--सृष्टि खंड-....डा श्याम गुप्त ....

सृष्टिमहाकाव्य---अष्टमसर्ग--सृष्टिखंड....डाश्यामगुप्त ....सृष्टिमहाकाव्य-(ईषत- इच्छायाबिगबेंग--एकअनुत्तरितउत्तर )-- -------वस्तुतसृष्टिहरपल, हरकणकणमेंहोतीरहतीहै,यहएकसततप्रक्रियाहै , जोब्रह्म...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Drshyam
अगीतायन
93

"दो पल्हड़े तराजू के " - नैतिकता और अपराध

आज के समय में हमारे देश में दिन प्रतिदिन अपराध बढते जा रहे है ,ये अपराध मुख्यत लूट पाट , चोरी डैकती, छेड़छाड़ रेप , हफ्ता वसूली , मदिरापान करके उत्पात मचाना , हत्या , किसी की संपत्ति पर जबरन कब्ज़ा ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Manoj
डायनामिक
52

बटवारे के पश्चात भारत

15 अगस्त 1947 के मनहूस दिन अंग्रेजों ने भारत हिन्दूओं तथा मुस्लमानों के बीच में बाँट दिया। जिन मुठ्ठी भर मुस्लिम आक्रान्ताओं ने तलवार के साये में स्थानीय लोगों का धर्म परिवर्तन करवा कर अपनी संख्...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Praveen Gupta
हिन्दू - हिंदी - हिन्दुस्थान - HINDU-HINDI-HINDUSTHAN
209

ले खा एक स्टेटमेंट अखबार में और दे के आ

पागल उल्लू आज फिर अपनी औकात भुला बैठाआदत से बाजनहीं आयाफिर एक बार लातखा बैठाबंदरों केउत्पात परवकतव्य एक छापबंदरों के रिश्तेदारों के अखबार के दफ्तरदे कर आ बैठासुबह सुबहअखबार मेंबाक्स में ख...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डा0 सुशील कुमार जोशी
उल्लूक टाईम्स
54

No Title

      Happy Diwali 2012 To all my Dear Friends...........:)...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
vijay kumar
मैं और उनकी तन्हाई
5528

' Radhe~Krishna '

'Radhe~Krishna' (Embroidery)A simply traditional design on a cloth piece, embroidered with my rest over strands.  ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
parul chandra
32
कुछ पुरानी यादें... (कविताएं, गीत, भजन, प्रार्थनाएं, श्लोक, अनूदित रचनाएं)
191

आईना हूँ एक दिन तो चटक ही जाऊँगा

 आईना हूँ एक दिन तो चटक ही जाऊँगा , कब तक चलूँगा ईमान रास्ते पर कभी तो भटक ही जाऊँगा ।लड़ता रहूँगा ताउम्र सच की खातिर,जब पेट पर आयेगी तो बहक भी जाऊँगा  ,आईना हूँ एक दिन तो चटक ही जाऊँगा...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
yogesh dixit
हम सब उम्मीद से हैं
68

लिव इन रिलेशन की हकीकत ...एवं परिणति ...डा श्याम गुप्त

 यही तो है लिव इन रिलेशन की हकीकत ...एवं परिणति                                         ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
  Sawai Singh Rajpurohit
एक ब्लॉग सबका
85

फिल्मी जीवन

कुछ दिन पहले इंटरनेट पर अँग्रेज़ी के अखबार हिन्दुस्तान टाईमस् पर सुप्रतीक चक्रवर्ती की लिखी नयी फ़िल्म "अजब ग़ज़ब लव"  की आलोचना पढ़ रहा था तो एक वाक्य पढ़ते पढ़ते रुक गया. उन्होंने लिखा था "...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SUNIL DEEPAK
जो न कह सके
187

हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स की एक शाम और निदा फ़ाज़ली ...

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता कहीं ज़मीं  तो कहीं आसमां  नहीं मिलता .बहुत छोटी थी मैं जब यह ग़ज़ल सुनी थी और शायद पहली यही ग़ज़ल ऐसी थी जो पसंद भी आई और समझ में भी आई। एक एक शेर इतनी ग...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Shikha varshney
स्पंदन SPANDAN
86

मनरेगा का नफा-नुकसान

डॉ. भरत झुनझुनवालायूपीए सरकार की महत्त्वकांक्षी योजना मनरेगा के सार्थक परिणाम सामने आ रहे हैं। श्रमिकों को रोज़गार अपने घर के पास उपलब्ध हो रहा है। परियोजना में 100 दिन के रोज़गार की व्यवस्था ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Krishan Vrihaspati
Bhoomeet | Hindi Rural Magazine | Agriculture Magazine |Farmers Magazine|Indian Magazine
160

आखिरी पर्वत से आगे .......

जिन आँखों में जगे हों सपने,उन आँखों में नींद कहाँ?जब दीप जले हों रातों में,तब अंधियारे के तीर कहाँ?               बढ़ेंगे पग तो राह बनेगी,         उम्मीदों की धूप खिलेगी l         ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
HIMANSHU AGARWAL
ANTARDWAND...
88

इब लौंडिया नी लौंडों को संभालो-लघु कथा

इब लौंडिया नी लौंडों को संभालो-लघु कथा सुखबीर ....सुखबीर 'सख्त लहजे में लखनपाल आवाज़ लगता हुआ सुखबीर की दहलीज़ में घुसा .सुखबीर आँगन में खाट पर बैठा हुआ चाय पी रहा था .लखनपाल की आवाज़ सुनते ही सु...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
मेरी कहानियां
56

सृष्टि महाकाव्य ---सप्तम सर्ग --ब्रह्मा प्रादुर्भाव एवं स्मरण खंड ......

सृष्टि महाकाव्य ---सप्तम सर्ग --ब्रह्मा प्रादुर्भाव एवं स्मरण खंड ......     सृष्टि महाकाव्य-(ईषत- इच्छा या बिगबेंग--एक अनुत्तरित उत्तर )-- -------वस्तुतसृष्टिहरपल, हरकणकणमेंहोतीरहतीहै,यह एकस...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Drshyam
अगीतायन
90

पूर्णिमा का चाँद

मिनाक्षी के लिए कुछ पंक्तियाँ...... कभी तुम पुर्णिमा के चाँद सी लगती हो  और मैं तुम्हारी शीतल चाँदनी मे बैठ प्यार भरे गीत गुनगुनाता हूँ,और कभी तुम  भोर की पहली किरण बन जाती होऔर मैं उन सुनहरी ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
nilesh mathur
आवारा बादल
82

Am I anti-social !?

Corruption is a social evil. Thank God(?) I am anti-social....  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Sanjay Grover संजय ग्रोवर
83

अंग्रेजों की बन्दर बाँट

अरबों की मार्फत योरुप पहुँचे भारतीय ज्ञान-विज्ञान ने जब पाश्चात्य देशों में जागृति की चमक पैदा करी तो पुर्तगाल, ब्रिटेन, फ्राँस, स्पेन, होलैण्ड तथा अन्य कई योरुपीय देशों की व्यवसायिक कम्पनिय...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Praveen Gupta
हिन्दू - हिंदी - हिन्दुस्थान - HINDU-HINDI-HINDUSTHAN
92

ग़ज़ल

दुनिया  बालों की हम पर जब से इनायत हो गयीउस रोज से अपनी जख्म खाने की आदत हो गयीशोहरत  की बुलंदी में ,न खुद से हम हुए वाकिफ़ गुमनामी में अपनेपन की हिफाज़त हो गयीमर्ज ऐ &nb...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Madan mohan saxena
ग़ज़ल गंगा
68

सृष्टि महाकाव्य--षष्टम सर्ग, ब्रह्मान्ड खन्ड......डा श्याम गुप्त......

सृष्टिमहाकाव्य-(ईषत- इच्छायाबिगबेंग--एकअनुत्तरितउत्तर )-- षष्टम सर्ग, ब्रह्मान्ड खन्ड....     -------वस्तुतसृष्टिहरपल, हरकणकणमेंहोतीरहतीहै, एकसततप्रक्रियाहै , जोब्रह्मसंकल्प-(ज्ञान--ब्र...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Drshyam
अगीतायन
87

माता वैष्णोदेवी यात्रा भाग - ४ (माता का भवन और भैरो घाटी)

इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढ़ने के लिए क्लिक करे...माता वैष्णोदेवी यात्रा भाग -१ ( मुज़फ्फरनगर से कटरा )माता वैष्णोदेवी की यात्रा भाग -२ (बान गंगा से चरण पादुका)माता वैष्णोदेवी की यात्रा भा...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Praveen Gupta
घुमक्कड़ यात्री - GHUMAKKAD YATRI
290

अदालत भी उगलदान है....

क़मर सादीपुरीकी कलम से   1.ये निजाम क्या निजाम है।न ज़मीन है, न मकान है।झूठा, चोर, बेईमान है।कोहराम है, कोहराम है।सच को मिलती है सज़ा अदालत भी  उगलदान  है।दिल किस क़दर है बावफा तुझे इल्म है, न ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Shahroz
Hamzabaan हमज़बान ھمز با ن
80

पता नहीं आखिर क्या कहूँ

किसी की आँखें नम है,किसी का दिल टुटा है,कोई अँधेरे में खोयाकोई जग से रूठा है,हर कोई कह रहा है,ठीक हूँ मैं,खुश हूँ मैं,मगर जाने क्यूँ मुझे,हर चेहरे के पीछेछिपा गम दिख रहा,हर दिल अपनी दास्तान कह रहा ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
अखिलेश रावल
"मेरे भाव मेरी कविता"
84

nm: कविता

nm: कविता: नजारे टहर जाते हैं जमाने टहर जाते हैं मेरे यार के आने पे दिवाने  टहर जाते हैं वो देख ले किसी को एक नजर तो मदहोश महखाने टहर जाते हैं त......  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
तरूण कुमार, सावन
सावन का सफर
83


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