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Angels !!!

5 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
HRUDAYAM :: ह्रदयम
86

"कुकड़ूकूँ की बाँग लगाता" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

अपनी बाल कृति "हँसता गाता बचपन" सेएक बालकविता"कुकड़ूकूँ की बाँग लगाता"रोज सवेरे मैं उठ जाता।कुकड़ूकूँ की बाँग लगाता।।कहता भोर हुई उठ जाओ।सोने में मत समय गँवाओ।।आलस छोड़ो, बिस्तर त्यागो।मै...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
58

स्केम कोयला तो आज की बात है खाते तो बाबा आदम के ज़माने से चले आ रहे हैं। पहला खाता तुम्हारी दादी ने तुम्हारी योरोपीय अम्मा के नाम ही खोला था। उन्होंने ही कहा था भ्रष्टाचार एक विश्वव्यापी सामान्य व्यवहार है। आज तुम 2G की बात करते हो। हम उम्र भर GG यूं ही करते रहे।

Virendra Sharma ‏@Veerubhai19471mram ram bhai स्केम कोयला तो आज की बात है खाते तो बाबा आदम के ज़माने से चले आ रहे हैं। पहला खाता तुम्हारी दादी ने तुम्हारी योरोपीय अम्मा के नाम ही खोला था। उन्होंने ही कहा था भ्रष्टाच...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
44

महाशून्य

यूँ ही चलती जीवन-यात्रा जन्म से मृदा-मिलन तक कभी हर्ष, कभी विषाद से भरी विस्मय और अनिश्चितता पर अड़ी  क्षण में जलती, क्षण में बुझती  उमंगों और आशाओं की नैया खेती एक अनुत्तरित रहस्य बनह्रदय के ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
निहार रंजन
बातें अपने दिल की
102

मंगलवारीय चर्चा मंच --१४६४ --मीरा के प्रभु गिरधर नागर

आजकीमंगलवारीय चर्चामेंआपसबकास्वागतहैराजेशकुमारीकीआपसबकोनमस्ते, आपसबकादिनमंगलमयहो, अबचलतेहैंआपकेप्यारेब्लॉग्स पर पानी का भी कोई आकार होता है क्या ?vandana gupta at ज़ख्म…जो फूलों ने द...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
29

कांग्रेस को वह बालक जो यह कह दे राहुल कुछ नहीं कर रहें हैं कभी नहीं मिलेगा। कांग्रेस अपने तमाम भ्रष्ट आचरण को वंशकुल की आड़ लेकर ही छिपाए हुए हैं। इन खुर्राट दुर्मुखों से पिंड छुड़ाना शहज़ादे के बूते का नहीं है।

17 जनवरी को PM कैंडिडेट घोषित होंगे राहुल?नई दिल्ली। कांग्रेस जल्द ही राहुल गांधी को अपना प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर सकती है। 17 जनवरी को दिल्ली में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बै...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
39

पैंतरे बदल गए

वादे तो वादे ही ठहरे आजकल के चाहे वो इंसानी हो या खुदा के....टस-से-मस ना होते....अढ़उल हो या अगरबत्ती मानने को तैयार नहीं.....उन्हे भी चाहिए....नए भगवान....नयी मिठाई....सब कुछ चाहिए एडवांसड....अपडेटड....पुराने ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Misra
खामोशियाँ...!!!
38

पहले अपराध साबित हो जस्टिस गांगुली का तब इस्तीफा

पहले अपराध साबित हो जस्टिस गांगुली का तब इस्तीफा महिला सशक्तिकरण का दौर चल रहा है किन्तु क्या इसका साफ तौर पर यह मतलब लगा लेना चाहिए कि पुरुष के अशक्त होने का दौर आरम्भ हो चुका है ?क्या वास्तव ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHALINI KAUSHIK
कानूनी ज्ञान
84

चल, उठ, दहाड़ निर्भया ...

16 दिसंबर 2012, इतिहास के पन्नों पर बदनामी की कालिख पोतने वाला वह दिन, जिसने वैश्विक पटल पर शर्मिन्दगी व आलोचना से भारत के दामन को दागदार कर दिया। ऐसा पहली बार हुआ, जब दिल्ली की निर्भया की दर्द भरी च...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
gayatri
चरकली
90
Pebble In The Still Waters
57

चुप हूं जब तक.. चुप हूं....

चुप हूं जब तक चुप हूं..बेज़बान समझने की अबकोशिश न करनाक्रोध की अग्नि जलीआग बहुत है भीतर भरीअब और उलझने की कोशिश न करनाजल जाओगे एक दिनखुद ही के गुनाहों मेंमुझको ग़लत समझने की अबकोशिश न करना...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
parul chandra
44

मंगलवारीय चर्चा मंच --१४६४ --मीरा के प्रभु गिरधर नागर

आजकीमंगलवारीय चर्चामेंआपसबकास्वागतहैराजेशकुमारीकीआपसबकोनमस्ते, आपसबकादिनमंगलमयहो, अबचलतेहैंआपकेप्यारेब्लॉग्स पर पानी का भी कोई आकार होता है क्या ?vandana gupta at ज़ख्म…जो फूलों ने द...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
37

ऐसे नहीं बनूँगा मैं आपका जमाई ! पहले आप मेरी 18 शर्तें स्वीकार करो ....

दबंगों का आपस में बड़ा घमासान मचा हुआ था. झण्डूनगर के राजा सुप्तचन्द्र की राजकन्या गुप्तचन्द्रिका से ब्याह करने के लिए अनेक युवक मरे जा रहे थे लेकिन नगर की परम्परा के अनुसार राजकन्या मिलनी उस...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Hasyakavi Albela Khatri
अलबेला खत्री की महफ़िल
72

ब्रह्मधाम तीर्थ पर शिविर में पहले दिन ६१५ मरीजों की नेत्र जांच ....

 ब्रह्मधाम तीर्थ पर गादीपति तुलसाराम महाराज के सानिध्य में दो दिवसीय निशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर का शुभारंभ शनिवार को हुआ। शिविर में पहले दिन ६१५ रोगियों की जांच की गई। तीर्थ एवं ट्रस्ट ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
  Sawai Singh Rajpurohit
RAJPUROHIT SAMAJ
75

विकल्पहीनता में देश यानी वाम-वाम समय

   अमित राजा की क़लम से दिल्ली और बाक़ी राज्यों के आम आदमी में फ़र्क़ जटिलताओं के देश भारत में राजनीति एक उलझी हुई डोर है। इस उलझी हुई डोर का एक सिरा दिल्ली में 'आप' नहीं-नहीं आम आदमी के हाथ लगा है...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Shahroz
Hamzabaan हमज़बान ھمز با ن
54
सिनेमा गीत-संगीत
131

कॉमेडी की कलाबाजियां...

 रोजमर्रा की आपाधापी और व्यस्त जीवन शैली से दूर सुकून के दो पल जीने के लिए स्मॉल स्क्रीन सबसे सरल और सहज जरिया है। सुकून के इस सस्ते,सरल और सहज साधन पर प्रतिदिन मनोरंजन का बाजार सजता है। हाला...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Somya
सौम्य वचन
135

क्या ये सृष्टि एक दिन अपने ऊपर ही ढेर होकर दब खप जायेगी। अवपरमाणुविक कण Higgs boson का आकार ले लेगी उसी गह्वर में सब कुछ समा जाएगा जिससे ये सृष्टि उद्भूत हुई थी ? ये दृश्य जगत ये एक्सटर्नल एनर्जी (मैटेरिअल एनर्जी )उसी परमेश्वर में समा जायेगी जिसे आदिअणु पारब्रह्म चत्रुर्भुज विष्णु कहा गया है।

Scientists believe sooner or later a radical shift in the forces of the universe will cause every particle in it to become extremely heavy. The new weight will squeeze all material into a small, super-hot and heavy ball, and the universe as we know it will cease to existक्या ये सृष्टि एक दिन अपने ऊपर ही ढेर होकर  दब खप जायेगी। अवपरमाणुविक कण Higgs boson का आकार ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
42

Is it fair to mishmash Politics and Religion?

abhi kuch din pahle hi jab main apni dusri post pe #Secularism pe baat kar raha tha to mujhe ek Janaab ne bahut achhi baat kahi thi ki, "word Secularism bahut hi achha , umda hai, par kuch party vishesh ne is shabd ka tushtikaran kar ke samuday vishesh ka favour kiya hai, aur baki samudayo ke sath pakshpaat kiya hai, isi vjah se kuch budhhijeevi log is word 'secularism' se khafa ho jate hain"main unki is baat se sahmat bhi hun ki political parties aisa karte aayi hain, sirf apna vote bank badhan...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
नीरज खाण्डल
Khandal Friends Circle
91

मेले तो मेले होते हैं...

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है. और आपस में मिलजुल कर उत्सव मनाना उसकी जिंदगी का एक अहम् हिस्सा है। जब से मानवीय सभ्यता ने जन्म लिया उसने मौसम और आसपास के परिवेश के अनुसार अलग अलग उत्सवों की नी...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Shikha varshney
स्पंदन SPANDAN
78

Shrilaal

5 वर्ष पूर्व
Shrilaal
0
मेरी बात तेरी बात...
236

पथिक अभी विश्राम कहाँ

पथिक अभी विश्राम कहाँमंजिल पूर्व आराम कहाँ.रवि सा जलना रुक, अथक चल.सीधी राह एक धर.रह  एकनिष्ठबढ़ निडर .अभी सुबह है, बाकी है अभीदुपहर का तपना.अभी शाम कहाँ,मंजिल पूर्व आराम कहाँ.चलना तेरी मर्या...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
KAVYASUDHA (काव्य सुधा)
KAVYA SUDHA (काव्य सुधा)
56

नुसखे !नुसखे! नुस्खे ! (१) अतिसार के प्रबंधन में गाज़र का जूस बड़ा मुफीद साबित होता है। यह बड़ी आंत को शांत करता है ,जीवाणुओं की बढ़वार को थाम लेता है।

नुसखे !नुसखे! नुस्खे !(१) अतिसार के प्रबंधन में गाज़र का जूस बड़ा मुफीद साबित होता है। यह बड़ी आंत को शांत करता है ,जीवाणुओं की बढ़वार को थाम लेता है। Carrot soup is the perfect home remedy for diarrhoea because it calms the bowel and slows bacterial development.Bowel is the l...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
54

ज़िन्दगी इनसे बर्बाद है

कुछ महके हुए ख्व़ाबकुछ बिछड़े हुए अंदाज़कुछ लफ़्ज़ों के एहसासकुछ लिपटे हुए जज़्बातज़िन्दगी इनसे बर्बाद है कुछ बातों में शरारतकुछ नखरों में अदावतकुछ इश्क़ में बनावटकुछ जीवन में दिखावटज़िन्दगी इनस...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
तुषार राज रस्तोगी
तमाशा-ए-जिंदगी
40

"पनप रहा व्यभिचार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

भारत की बेटीदामिनी को श्रद्धाञ्जलिहालत बदली कुछ नहीं, बीत गया इक साल।रोज़ अनेकों दामिनी, हो जातीं बदहाल।।--कपड़े उजले हो भले, मैला कारोबार।गाँव गली हर खेत में, पनप रहा व्यभिचार।।--अब तक भी कान...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
41

Kiska Lokpal ?

                                           Kiska Lokpal ?...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
vijay kumar
मैं और उनकी तन्हाई
32

”आप” या ”नक्सलवाद का नवीन संस्करण’

नयी पार्टी जिसकी जीत में कुछ राजनैतिक विश्लेषकों को ''नई राजनीति ' की गुलाबी सुगंध आ रही है यदि उसकी कार्यविधियों व् भाषणों का गहराई से अध्ययन किया जाये तो उसमे भी वर्तमान राजनैतिक व्यवस्था को...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
नेता जी क्या कहते हैं ?
51

Baba saheb - बाबा साहब

Humnabad, Karnataka, India: Baba saheb means Dr Bhimrao Ramji Ambedkar, whose statues are common in the small towns of Karnataka and who had written the constitution of independent India. We were researching on violence in the community and repeatedly we came across the different kinds of discriminations prevalent in our societies. Discriminations of gender, caste, religion and so many other things that divide our communities. I often asked myself if the dreams of Baba saheb for a non discrimina...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SUNIL DEEPAK
Chayachitrakar - छायाचित्रकार
317


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