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ईश्वरत्व से बचते हुए

[...आर्डिनरी जब एक्स्ट्रा-आर्डिनरी बन जाता है, तो वह चमत्कार हो जाता है. महामना गांधी जानते थे कि चमत्कार पर मुग्ध हुआ जा सकता है, पर इसे अपनाया नहीं जा सकता. महात्मा जीवन भर प्रयास करते रहे कि जो ज...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
50

स्वीकारने से कायम होगी सद्भावना

[परिवर्तन शाश्वत हैं और नितांत आवश्यक भी. प्रत्येक पीढ़ी अपने साथ बदलाव का झनकार लाती है. पर इस स्वर में मधुरता का अनुशासन ना हो तो यह कालांतर में अप्रासंगिक हो जाती है. इस बदलाव में जरूरी है कि क...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
67

बैंडिट क्वीन

फिल्म देखा तो स्तब्ध रह गया मै, मुझे विश्वास नहीं हुआ कि ऐसा हो सकता है. किसी एक जाति की ज्यादती की तो बात ही नहीं है, क्योकि जो भी शीर्ष पर रहा है, उससे ऐसी ज्यादतियां हुई हैं.पर मानवता सबसे कम मान...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
श्रीश उवाच
56

सदाग्रह एक अपील...शांति, सद्भावना के लिए..

..जीवन की होड़ में जीवन फिसल जाता है.. हम हिसाब लगाते रह जाते हैं और मोड़ आ जाता है. फिर बदल जाते हैं मायने सब मतलबों के और एक प्याला खाली का खाली ही टूट जाता है. समाधान है हर एक विवाद का, शांतिपूर्...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
सदाग्रह..
72

ए क्या बोलती तू

ए क्या बोलती तू ... , ओ हरे दुपट्टे वाली .... गाने गाकर नायिका को छेड़ते नायक लोगों का मनोरंजन करने मे कितने सफल रहते हैं पर नि:संदेह समाज की एक गंभीर समस्या जरूर उजागर होती है. 'ईव टीज़िंग' नाम से जान...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Chetna Vardhan
bas do minute
128

तो ऐसे होती है दिल्ली में क्रांति, कमाल है!

एक खास विज्ञापन की तलाश में पिछले दो-चार दिन के हिन्दुस्तान टाइम्स के पन्ने पलट रहा था। एक पेज की लीड स्टोरी पर गया। चार-पांच काॅलम में छपी स्टोरी थी, रंगीन फोटो के साथ। फोटो में एक खूबसूरत सी ल...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
57

پاکستان نے دی بھارت کو کراری شکست

سینچورین : چیمپئنزٹرافی کے اہم میچ میں پاکستان نے بھارت کوچون رنز سے ہرا دیا۔سپر اسپورٹس پارک سینچورین میں بھارت نے ٹاس جیت کر پاکستان کو بیٹنگ کرنے کی دعوت دی۔ گرین شرٹس کا آغاز متاثر کن نہ ہوا۔ عمران نذیر بیس، کامران اکمل انیس جبکہ کپتان یونس خان بیس رنز بناکر پویلین واپس لو...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
جہاںنُما
77

ਸਜਣ ਬਿਨ ਰਾਤੀਂ ਹੋਇਯਾਂ ਵੱਡੀਆਂ

ਸਜਣ ਬਿਨ ਰਾਤੀਂ ਹੋਇਯਾਂ ਵੱਡੀਆਂਰਾਂਝਾ ਜੋਗੀ ਮੈਂ ਜੁਗਿਆਣੀਕਮਲੀ ਕਹਿ-ਕਹਿ ਛਡੀਆਂਮਾਸ ਝੜੇ ਝੜੀ ਪਿੰਜਰ ਹੋਇਯਾਂਕਰਕਨ ਲਗੀਆਂ ਹਡੀਆਂਮੈਂ ਇਆਣੀ ਨੇਹੁੰ ਕੀ ਜਾਣਾਬਿਰਹੁ ਤਣਾਵਾਂ ਕੀ ਗਡੀਆਂਕਹੈ ਹੁਸੈਨ ਫ਼ਕੀਰ ਸਾਂਯੀ ਦਾ ਦਾਵਣ ਤੇਰੇ ਮ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
ਹੀਰ
74

दरोगा जी में जाग उठी ’ देवी ’

माथे पर रोली का लंबा सा टीका लगाए आज उनके मुख की शोभा कुछ अलग सी है। रोजाना के रौब के साथ-साथ एक अनूठा तेज टपक रहा है चेहरे से। जिप्सी की अगली सीट पर बैठे एसओ साहब पूरे एक्शन में हैं। अरे, एक्शन मत...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
58
अल्लम्...गल्लम्....बैठ निठ्ठ्लम्...
50

बिलासपुर हिमाचल प्रदेश में हिन्दी और इंटरनैट पर संगोष्ठी आज

भाषा विभाग की ज़िला भाषाधिकारी के द्वारा हिमाचल में हिन्दी के इंटरनैट पर प्रचलन के लिए यह पहला सराहनीय प्रयास।अनेक साहित्यकार,पत्रकार और सरकारी कर्मचारी उठाएंगे इस संगोष्ठी का लाभअवसर पर क...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
प्रकाश बादल
प्रकाश बादल
89

दाती गुरु का मंतर काम कर रहा है

मदारी की बाजीगरी दिल बहलाती है। लोग सिक्के फेकते हैं। मीडिया की बाजीगरी इससे कहीं गहरी है। व्यापकतर असर रखती है। चैनलों का चलाया दाती गरु का मंतर आजकल दिल्ली में खूब कमाल दिखा रहा है। दाती गु...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
60

दाती गुरु का मंतर काम कर रहा है

मदारी की बाजीगरी दिल बहलाती है। लोग सिक्के फेकते हैंै। मीडिया की बाजीगरी इससे कहीं गहरी है। व्यापकतर असर रखती है। चैनलों का चलाया दाती गरु का मंतर आजकल दिल्ली में खूब कमाल दिखा रहा है। दाती ग...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
59

स‌नसनी बोले तो स‌न्नाटे को चीरते श्रीवर्धन

एंकर श्रीवर्धन त्रिवेदी के बगैर सनसनी के बारे में सोचना भी मुश्किल है। आज की तारीख में सनसनी और श्रीवर्धन एक दूसरे के पूरक बन चुके हैं। कल्पना कीजिए किसी दिन स्टार न्यूज पर सनसनी हो, लेकिन एंक...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
RAVINDRA RANJAN
आशियाना Aashiyana
56

भारत :बदली आज की तस्वीर

"भारत " का शाब्दिक अर्थ होता है भा से रत यानि प्रकाशवान या चमक से परिपूर्ण।किँतु आज चमक विलुप्त हो रही है हम कहाँ जा रहे है ये प्रश्न आज विचारणीय है,आज का युवा ध्रूमपान ,अन्य वस्तुओँ से इस प्रकार ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
VIVEK SACHAN
khuch bhikhri yaden --कुछ बिखरी यादें
71

कंडक्टरों की ये अजब-गजब भाषा

दिल्ली की बसों नगर बसों में सफर करना यूं तो अपने आप में एक यातना है, पर इस यातना में एक मजा भी कहीं छिपा हुआ है। यह मजा है कंडेक्टरों की बोली और चुहलबाजी का। कभी-कभी सोचता हूं कि जाने कब नजर पडे़ग...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
55

समाचार वालों पीछे से निकल लो

दिल्ली की बसों नगर बसों में सफर करना यूं तो अपने आप में एक यातना है, पर इस यातना में एक मजा भी कहीं छिपा हुआ है। यह मजा है कंडेक्टरों की बोली और चुहलबाजी का। कभी-कभी सोचता हूं कि जाने कब नजर पडे़ग...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
55

बच्चे और अनुशासन

बच्चेबड़ेहोनहारहोतेहैं।सबकुछइतनीजल्दीसीखलेतेहैं ,आश्चर्यभीहोताहैऔरगर्वभी।ऐसेहीकुछबच्चोंसेप्रतिदिनमुलाकातहोतीहै।शामकेसमयमुहल्लेकेसारेबच्चेलगभग७-८कीसंख्यामेंखेलते, भागते, कू...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Chetna Vardhan
bas do minute
118

कल दिन भर एक कहानी में

कल रात लिख नहीं पाया. दर असल कल दिन भर एक कहानी में लगा रहा. कहानी तो एक घंटे में ही पूरी हो गयी थी पर दिन भर उसकी खुमारी में रहा. स्वयं क्या मूल्यांकन कर सकूंगा उस कहानी का पर फिर भी पहली बार मै कहा...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
56

आधी रात हो चली है.

आधी रात हो चली है. दिल्ली में झमा-झम बारिश हो रही है. काश के ये बारीश जुलाई-अगस्त में हुई होती तो मेरे पापाजी को कड़ी धूप में खेतों में पानी ना चलवाना पड़ा होता.उनकी तबियत ख़राब हुई सो अलग.JNU के इस ब...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
55

क्या नियम कानून इसीलिए बनाये जाते हैं?

आज सुबह से घर में ग्रिल वर्क चल रहा था .वही घर के चाहरदीवारी को लोहे के छड़ से घेर दिए जाने का काम. मतलब टोटल सुरक्षा। छोटे छोटे शहरों से लेकर बड़े बड़े महानगरों तक दृश्य आम है .कोई नयी बात नहीं। ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Chetna Vardhan
bas do minute
95

Diary

“The life of every man is a diary in which he means to write one story, and writes another; and his humblest hour is when he compares the volume as it is with what he vowed to make it”James Matthew Barrie...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
52

ये मेरी 'प्रखर दैनन्दिनी

जब पहली बार ब्लॉग का कांसेप्ट सुना था तो मन में बात यही बनी थी की यह एक ऑनलाइन डायरी है, पर ब्लॉग बनाया तो सारी लेखनी उड़ेलने का मन हुआ और लिखा हुआ सब कुछ ब्लॉग पर आ गया....आज मन में आया क्यों ना एक ड...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHREESH K. PATHAK
प्रखर दैनन्दिनी
62

मेरी पहली पोस्ट

लगभग २ वर्षों से ब्लागवाणी नियमित रूप से पढ़ती आ रही हूँ । कितनी बार कोशिश की कुछ लिखा भी जाए , पर असफल ।कुछ अज्ञात सा भय घेरे था ।अब इतनी बड़ी लेखिका तो हूँ नहीं कि राईटर'स ब्लाक की शिकार हो जाऊ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Chetna Vardhan
bas do minute
76

कौन था वह जो मुझे पहचान देकर चल दिया

शायिर: प्रो. ओम 'राज़'कौन था वह जो मुझे पहचान देकर चल दियाबे-रिदा1 तहरीर2 को उन्वान3 देकर चल...[यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
विनय प्रजापति 'नज़र'
ग़ज़लों के खिलते गुलाब
91
54

चिन्ना की शह, मेहरू की मात

मेहरू और चिन्नाबंद कमरे में बैठे थेविभाजन करें या न करेंइस पर चिंतन करते थेबोले चिन्ना “ ड्रा करते हें“हाँ” आया तो विभाजन होगा“ना” होगा तो बिन्दुस्तानएक अखंडित वतन होगा.मेहरू राज़ी हो गएचिन...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Varsha Thakur
तमसो मा ज्योतिर्गमयः
60

माँ की दुआ नहीं मिलती

शायिर: वक़ील ख़ान 'बेदिल' (सम्भल)हर किसी को वफ़ा नहीं मिलतीदर्दे-दिल को दवा नहीं मिलतीकैसा इंसाफ़...[यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
विनय प्रजापति 'नज़र'
ग़ज़लों के खिलते गुलाब
96

पापाजी,मान जाइये

पापाजी....बचपन में कितनी ही बार इनकी गोद में खेली...वे मुझे कई नामों से बुलाते...गुडिया,नन्ही राजकुमारी...और भी जाने क्या-क्या...?...पापाजी मुझे भाइयों से ज्यादा प्यार करते....पहली बार उनके साथ ही स्कूल ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
neha sharma
मेरी कहानी
49

رمضان مبارک

8 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
جہاںنُما
61


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