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नई हलचल

गर तुम्हारी कमी नहीं होती

शायिरा: शिबली हसन 'शैल'गर तुम्हारी कमी नहीं होतीबेवफ़ा ज़िन्दगी नहीं होतीहर कोई क्यों फ़रेब देता...[यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
विनय प्रजापति 'नज़र'
ग़ज़लों के खिलते गुलाब
82

मंदी का असर......कार पूलिंग . भाग -1

मंदी का असर......कार पूलिंग . भाग -1मंदी आई थी ....कहीं कहीं अभी भी है .......या आने से पहले ही मीडिया द्वारा ले आई गई थी ,हमें तो समझ में नही आया । लोग कहते हैं अभी भी गई नही है .....वापस आ सकती है फिर से ....मंदी के ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
kanhaiya
ABHILASA
120

BUDDHA // बुद्ध

8 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
ART BY VIJAYKUMAR SAPPATTI
80

SOMETHING /// कुछ

8 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
ART BY VIJAYKUMAR SAPPATTI
74
ART BY VIJAYKUMAR SAPPATTI
81
ART BY VIJAYKUMAR SAPPATTI
86

THE DANCER // नृतकी

8 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
ART BY VIJAYKUMAR SAPPATTI
74

कौए

कौएसुना हैविलुप्त हो रहें है।क्या सच ?पर क्या रमेसर की माँअब नहीं उड़ाएगीमुंडेर से कौए?पति के शहर सेलौटने की प्रत्याशा में।क्या अबझूठ बोलने परकाला कौआ नहीं काटेगाअबनहीं पढेंगे बच्चे'क' से कौ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
SHRI BILAS SINGH
कविता के बहाने
63
ART BY VIJAYKUMAR SAPPATTI
73
ART BY VIJAYKUMAR SAPPATTI
81

मल्हार : हिंदी कविता

मल्हार अचानककिसी बसंती सुबहतुम गरज बरसमुझे खींच लेते होअंगना में .मैं तुममेंनहा लेने को आतुरबाहें पसारेढलक जाती हूँ .मेरा रोम रोमतुम चूमते हो असंख्य बार .अपने आलिंगन मेंभिगो देते होमेरा पो...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
AJANTA SHARMA
अजन्ता शर्मा
42

माँ ........प्यारी माँ.....

नमस्ते....सोच रहा था की ब्लॉग तो बना लिया ,लेकिन पोस्ट की संख्या तो एक पर ही टिकी हुई है।क्या लिखा जाए ...कैसे लिखा....जाए.....इसी क्रम में अपने मेल को देख रहा था। मेरे एक मित्र हैं ..अरूप ...जी ...जमशेदपुर ..स...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
kanhaiya
ABHILASA
119

अपनी धरती ....अपना पर्यावरण ....

अब तक बहुत लिखा पढ़ा जा चुका है । पर्यावरण में फैले अलग अलग तरह के प्रदुषण के बारे में। समय आ गया है .....प्रदुषण को भगाने वाले उपायों को असली जामा पहानाने का,बारिश की बौछार के बीच हर जगह का मौसम खु...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
kanhaiya
ABHILASA
99

रिक्शेवाले भइया

स्कूल दूर होने की वज़ह से हमें कई सालों तक रिक्शे की रोज़ सवारी का मौका मिला.इन ८-९ वर्षों में हमने कई रिक्शे बदले....इस वज़ह से हमें सारे रिक्शेवाले भइया का नाम तो याद नही है,लेकिन २ रिक्शावाले भ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
neha sharma
मेरी कहानी
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ABHILASA

नमस्कार बंधुवर ,ब्लॉग के बारे में सुनते,पढ़ते मन में उठी अभिलाषा.......ही आपके सामने अभिलाषा ब्लॉग के रूप में सामने है। आशा करता हूँ कि आपलोगों के साथ मेरी ये ब्लॉग यात्रा चलते रहेगी। आपके सुझाव ,...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
kanhaiya
ABHILASA
132

यकीन

रेखा चित्र- प्रकाशगोविन्दयकीन [लघुकथा]वह दोनों आमने-सामने बैठे थे ! बीच में एक छोटी सी गोल मेज थी ! जिसमें कॉफी के दो प्याले, एक शुगर पाँट, दो चम्मच और एक ऐश ट्रे पड़ी थी ! आदमी सिगरेट पीते हुए थोड़...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
prakash govind
54

मायने बदल गए

परिवर्तन ही ‘स्थायी’ हैसमझता है आदमीतभी तो बदल लेता है,खुद को समय के साथअपना पूरा किरदारऔर बदल डालता है साथ मेंसोच, फितरत, स्वभाव सबकुछ।बदलावों के इस बवंडर में,फंस कर बदल जाते हैंलफ्जों के मा...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
53

तो इस लिए है सुअर घिनौना ।

स्वाइन फ्लू की खबर पढ़ते हुए मन ख्याल आया कि - - -तो इस लिए सुअर का मांस खाने को बुरा माना जाता है । पर अगले ही पल दूसरा सवाल उठा कि स्वाइन फ्लू की बीमारी तो हाल के वर्षों में ही सामने आई है, पर सुअर के ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
63

दिमाग की खिड़कियां खोलो अविनाश !

मोहल्ला से फिर एक ब्लागर को निकाल दिया गया । सलीम खान नाम के इस शख्स पर आरोप था अपने धर्म, इस्लाम का प्रचार करने का । यानि मोहल्ले में धर्म या मजहब की बात करना कुफ्र है, गुनाह है । इस एकतरफा कार्र...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
63

इस ‘सिरफुटव्वल’ का भी अपना ही मजा है

कल की मेरी पोस्ट ‘मुझे ‘चोर’ कहने का शुक्रिया ’ पर एक टिप्पणी आई है । टिप्पणी उन्हीं मित्र ‘समय’ की थी जिनकी टिप्पणी का जिक्र मैंने नाम लिए बिना किया । भले मानुष हैं, सो पुनः टिप्पणी भेजकर उन्ह...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
67

इस ‘सिरफुटव्वल’ का भी अपना ही मजा है

कल की मेरी पोस्ट ‘मुझे ‘चोर’ कहने का शुक्रिया ’ पर एक टिप्पणी आई है । टिप्पणी उन्हीं मित्र ‘समय’ की थी जिनकी टिप्पणी का जिक्र मैंने नाम लिए बिना किया । भले मानुष हैं, सो पुनः टिप्पणी भेजकर उन्ह...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
60

मुझे ‘चोर’ कहने का शुक्रिया

दो-चार दिन पहले की ही बात है । अपने ब्लाग पर आयी टिप्पणियां देख रहा था । चिरकुटों के चंगुल में हिन्दी शीर्षक से लिखी गई लेखमाला की तीसरी और अंतिम कड़ी पर आई दो टिप्पणियां कुछ ‘अलग’ सी दिखीं । अलग ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
61

ये कहीं और सुनने को न मिलेंगे।

कल अचानक बादलों को घिरते देखा। हालाँकि बारीश अभी दूर है लेकिन मैं जब भी पानी से भरे बादलों को देखता हूँ तो उस पिता की याद आती है जो अभी-अभी अपनी लाड़ली बेटी को विदा करके अपने सूने हो चुके घर के एक...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Ritesh
Satya: The Voice of Truth
46

दिल की बात

जब भी लिखना.....जी भर के लिखना.......... जुबान कीनहीं,बसदिल की बात लिखना।हमने देखाहै,दिल की बात,जब दिमाग से होकर,जुबान पर आती है,तोबात बिल्कुल बदल जाती हैयह अलग बात है,जमाने को वही बात पसंद आती हैTake Care Friends...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Ritesh
Satya: The Voice of Truth
42

माँ गुजर जाने के बाद

ब्याहता बिटिया के हक में फर्क पड़ता है बहुत छूटती मैके की सरहद माँ गुजर जाने के बाद अब नहीं आता संदेसा मान मनुहारों भराखत्म रिश्तों की लगावट माँ गुजर जाने के बादजो कभी था मेरा आँगन, घर मेरा, कमर...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Ritesh
Satya: The Voice of Truth
51
दुनिया
44

अविनाश का यह पाखंड !

परसों मोहल्ला से भेजा गया अविनाश का एक पोस्ट ब्लागवाणी पर देखा । ‘बेढंगे कपड़े पहनना, मुसीबत को बुलावा’ या ऐसे ही किसी शीर्षक से मोहल्ला पर पूर्व में प्रदर्शित एक पोस्ट के बारे में थी यह पोस्ट ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
61

मुझे अपनी बाहों मे भर लो

नदी के के इस पार शब्दों का मेला है कोई तुम्हे -पुकार रहा -माँ दीदी पत्नी दोस्त प्रेमिका इस भीड़ के लिए तुम देह के दर्पण का अलग -अलग हिस्सा हो किसी के लिए बिंदिया किसी के लिए राखी हो आँचल मे प्रसाद ...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Ritesh
Satya: The Voice of Truth
48

मुझे अपने पास रख लो

अपनी हथेली की रेखाओं मेमेरा नाम लिख लोमुझे अपने पास रख लोअपनी आँखों के पिंजरे मेमुझेकैद कर लोअपने मन रूपी गमले मेमुझे गुलाब सा उगा लोअपने आँचल के छोर मेएक स्वर्ण सिक्के सा बाँध लोमुझे अपने प...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
Ritesh
Satya: The Voice of Truth
37

ठीक कहा था डार्विन तुमने

ठीक कहा था डार्विन तुमने,सदियों पहले, ठीक कहा था ।विज्ञान की आड़ में छुप कर,समाज का गहरा-नंगा सच ।दुरुस्त थीं सौ फीसदी,अनुकूलन-प्राकृतिक चयन कीतुम्हारी दोनों ही अवधारणाएंऔर सटीक था एकदमयोग्यत...  और पढ़ें
8 वर्ष पूर्व
kaustubh upadhyay
कोलाहल
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