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"हिन्दी कविताएँ, आपके विचार से साभार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

एक मुलाकात  (हिन्दी कविताएँ, आपके विचार से साभार)ये है  श्रीमती राजेश कुमारी जी के देहरादून स्थित सरकारी निवास का लॉन!सुबह सुबह जैसे ही फ़ोन की घंटी बजी उधर से हमा...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
257

Hindi4tech 1'st Annivercery

जीहां , आजHindi4Techब्लॉगएकवर्षपूराकरचूकाहै।आजसेठीकएकवर्षपूर्वयानि 11 मई 2011 ( 11-05-2011) कोब्लॉगपरप्रथमपोस्टलिखीगयी... देखतेहीदेखते१वर्षगुजरगया।कोशिशहमेशायहीरहीकीब्लॉगपरहमेशानयीजानकारियोंकेसा...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Piush Trivedi
Hindi4Tech ( Seo Tricks, Tips,Gadjets & Tutorial For Blogger, Wordpress )
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कायद्याचा धाक फक्त विद्यार्थ्यांनाच का ?

कायद्याचा धाक फक्त विद्यार्थ्यांनाच का ?केदार भोपे मो.८०५५३७३७१८ kedarsmoto@gmail.comसध्या राज्यभरातील सर्व विद्यापीठातील प्राध्यापकांनी आपल्या काही मागण्यांसाठी पेपर तपासणीवर बहिष्कार टाकून आंद...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Kedar bhope
केदार भोपे
36

छुपा रहता है माँ का संघर्ष !

माँ ताउम्र हरपल, हरदिन अपने घर परिवार के लिए दिन-रात एक कर अपना सर्वस्व निछावर कर पूर्ण समर्पित भाव से अपने घर परिवार, बच्चों को समाज में एक पहचान देकर स्वयं की पहचान घर चारदीवारी में छुपा कर रख...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Kavita Rawat
KAVITA RAWAT
95

100 वे जन्मदिन पर विशेष- "मंटो का मतलब"

" जब मै किसी से दोस्ती करता हूँ, तो मुझे इस बात की तवक्को होती है कि वो अपना आप मेरे हवाले कर देगा. दोस्ती करने के मुआमले में मेरे अन्दर ये एक जबरदस्त कमजोरी है जिसका इलाज मुझ से नहीं हो सकता .." ढे...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
amitabh shrivastava
अमिताभ
108

देवप्रयाग

औली यात्रा भाग…१(एक): देवप्रयागसभी साथियों को मेरा प्रणाम….... !  साथियों आज हम आपको हिमालयी राज्य उत्तराखण्ड में स्थित विश्वप्रसिद्ध पर्वतीय पर्यटक स्थल औली की यात्रा पर ले चलते हैं।...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
शैलेन्द्र सिंह राजपूत
92

धौखा है हज सब्सिडी

हज सब्सिडी के नाम पर मुसलमानो को धोखा दिया जा रहा है। हमारे देश से हज यात्रा के लिए डेढ़ लाख से अधिक लोग हर वर्ष साउदी अरब की यात्रा पर जाते हैं। जिसमें से सवा लाख लोग हज कमेटी से तथा बाकी अलग-अलग...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Shah Nawaz
38

तब लेखनी चली - वर्तमान दशा पर कुठाराघात करती कवि 'आनन्‍द फैजाबादी' की यह कविता

अरसों के बाद मन की आज पोटली खुलीतब लेखनी चली, तब लेखनी चली ।।भरसक प्रयास पर भी जब रसना नहीं हिली तब लेखनी चली, तब लेखनी चली ।।1- हर ओर अत्‍याचार है , हर हाँथ में तलवार है नीरस हुआ संसार है, अब...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SANSKRITJAGAT
महाकवि वचन-MAHAKAVI VACHAN
61

आठवें दशक की चर्चित लघुकथाएं

'ज्ञानसिन्धु' में एक श्रृंखला 'आठवें दशक की चर्चित लघुकथाएं" आरम्भ करने जा रहे है ताकि पाठक व लेखक आठवें दशक के लघुकथा लेखन से परिचित हो सके तथा आज के लघुकथा लेखन से उसका तुलनात्मक अध्ययन कर स...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
bhagirath
ज्ञानसिंधु
41

''ये तो घाटे का सौदा रहा ''!!!-A SHROT STORY

''ये तो घाटे का सौदा रहा ''!!!-A SHROT STORY 'संतरेश  की माँ यहाँ आ   ...'' पति सत्तो   की  कड़क   आवाज़  पर बर्तन    मांजती    सुशीला    धोती  के पल्लू  से हाथ पोछती हुई रसोईघर स...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
मेरी कहानियां
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स्वामित्व

राजा जनक के विशिष्ट अतिथि गृह में ठहरे हुए रावण को आज तीसरा दिन था। उसे अपने राज्य कीचिंता सता रही थी और जनक थे कि लंकेश को समय नहीं दे पा रहे थे। लंकेश को लगा कि जनक उसकी जानबूझ कर उपेक्षा कर रहे...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
हंसराज 'सुज्ञ'
॥ भारत-भारती वैभवं ॥
56

" खामोश मूर्ति..!!"

एक फ़साना शुरू होने से पहले ही,जाने क्यूँ तू मुझसे रूठ गयीसोचा था कुछ दूर साथ चलेंगे,उससे पहले ही तुम चुप हो गयी अब तो बस  खामोश हूँ...खड़ा हूँ किसी मूर्ति की तरहमौसम आते हैं... मुझे छू कर गुजर...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
suman sourabh
..Tum Suman..!!
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मानवता का ये अनुपम पाठ !

मानवता का ये अनुपम पाठ !एक  दिवस शैतान वो 'मुन्ना' गया   घूमने   पापा   संग ;सड़क किनारे  दे 28px; text-align: -webkit-auto;">पिंजरे ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
मेरा आपका प्यारा ब्लॉग
89

इस नगर में और कोई परेशानी नहीं है ….

खाना नहीं, बिजली और पानी नहीं है इस नगर में और कोई परेशानी नहीं है . चूहों ने कुतर डाले हैं कान आदमी के शायद इस शहर में चूहेदानी नहीं है  . चहलकदमी भी है, सरगोशियाँ भी हैं मंज़र मगर फिर भी तूफानी ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
M Verma
जज़्बात
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No Title

वक्त को हथेली पर रख करऊँगलियों पर लम्हें गिने हैं...दर्द देता है हौले से दस्तक-इन लम्हों के कई पोरों में बसा हुआ है वो....!!ज़ब्त करती हैं जब पलकें,किसी टूटे हुए ख्वाब को-आँखों में दबोचती हैंतब पिघ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Manav Mehta 'मन'
मानव 'मन'
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प्यार

सुना है कि मुझे कुछ हो गया था...बहुत दर्द होता था मुझे,सोचता था, कोई खुदा ;तुम्हारे नाम का फाहा ही रख दे मेरे दर्द पर…कोई दवा काम ना देती थी…कोई दुआ काम ना आती थी…और फिर मैं मर गया । जब मेरी कब्र बन ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
vijay kumar sappatti
कविताओं के मन से....!!!!
53

अंगूर खट्टे हैं (काव्य-कथा)

एक लोमड़ी भूखी प्यासी,घूम रही थी इधर उधर.बाग एक अंगूरों का था आया उसको तभी नज़र.पके, घने अंगूर थे  ऊंचे,देख उन्हें था मन ललचाया.अपने पैरों पर वह उछली,पंजा उन तक पहुँच न पाया.बार बार की उछल कूद स...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Kailash Sharma
बच्चों का कोना
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शर्म करो बेशर्मो!!!

राजनीति एक घीनौना और गंदा काम है कहकर हम पल्ला झाड लेते हैं | खुद कोई इसमें उतरकर सफाई करना नहीं चाहता| जो अच्छे व्यक्ति हैं जो भारत के लिए महान सोच रखते हैं जिनको पब्लिक जानती है, अगर भूल से कोई ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Akbar Khan
TheNetPress.Com
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वर्चुअल दोस्ती के ख़तरे...

-फ़िरदौस ख़ानझूठ की बुनियाद पर बनाए गए रिश्तों की उम्र बस उस वक़्त तक ही होती है, जब तक झूठ पर पर्दा पड़ा रहता है. जैसे ही सच सामने आता है, वो रिश्ता भी दम तोड़ देता है. अगर किसी इंसान को कोई अच्छा ल...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
मेरी डायरी
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Autumn

Sometimesthe autumn fascinateswhile our walking gently        on the dry out brown leaves in the garden    and on the land covered by the brown leaves…sometimesthe whole scenery of autumn becomes romantic with the desolated branches of treesand the pleasing soft and sweet sounds of the birds…sometimesin the row of plants with the wetting smell nearbyof ever growing flowers such as marigold and roses  and on the older wall&...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Firdaus Khan
The Paradise
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अंदाज ए मेरा: ...वरना नहीं मिलेगी माफी!

अंदाज ए मेरा: ...वरना नहीं मिलेगी माफी!: बारह साल। ढाई बार पीएससी परीक्षा! वह भी अधर में! छत्तीसगढ़ में सरकार की नाकामी का यह बड़ा उदाहरण है। साथ ही यह बताने के लिए भी काफी है कि......  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
हम हिंदी चिट्ठाकार हैं
69

ग़ज़ल: "अँधेरी रात है खुद का भी साया साथ नहीं"

अँधेरी रात है खुद का भी साया साथ नहीं कोई अपना ना हो, ऐसी भी कोई बात नहीं साथ रहता है जो, ज़रूरी तो नहीं साथ ही हो बात ऐसी भी नहीं, मिलते हो जज़्बात नहीं कैफियत रात की कुछ ऐसी हुई जाती है पास लेटा है ...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Shah Nawaz
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जय हो निर्मल बाबा!

दोस्तोंसब को मेरा प्यार भरा प्रणाम!जैसा की आप सब जानते हैं की मेरे घर में नन्ही परी ने जन्म लिया है तो आजकल इतना व्यस्त रहता हूँ की ब्लॉग पर आने का वक़्त ही नहीं मिलता, काफी दिनों से आप सभी को...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
surender
"ख़्वाबों का तसव्वुफ़"
108

उड़ चल, हारिल, लिये हाथ में यही अकेला ओछा तिनका।

उड़ चल, हारिल, लिये हाथ मेंयही अकेला ओछा तिनका।उषा जाग उठी प्राची में -कैसी बाट, भरोसा किन का!शक्ति रहे तेरे हाथों में -छूट न जाय यह चाह सृजन की,शक्ति रहे तेरे हाथों में -स्र्क न जाय यह गति जीवन की!...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
deepak kumar chaubey
कविता कहानी चर्चा और बहुत कुछ .......
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मलाई मारे के परमानेंट सोर्स

आज चौबे जी की चौपाल लगी है राम भरोसे की मडई में, यह वही मडई हैं जिसमें बड़हन-बड़हन नेता दोउ  कर जोड़के गोबिंदा जईसा दांत निपोरते हैं । बाबा रामदेव जईसादंडवत करते...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Ravindra Prabhat
चौबे जी की चौपाल
71

Super-Moon

कल चंद्रमा हमारे सबसे नजदीक था.. रात 9:05 बजे पृथ्वी से इसकी दूरी करीब 3 लाख 56 हजार 955 किलोमीटर थी.. ये तस्वीर मैनें ठीक उसी समय ली थी..Yesterday the moon was nearest to us.. Night at 9:05 it's distance from earth was around 3 lakh 56 thousands and 955 kilometers.. I had taken this pic exactly at that tim...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Prashant Suhano
SUHANO DRISHTI
79

लगातार बढ़ते जा रहे हैं अश्लीलता के दबाव

लेखिका : वन्दना भारतीयआजादी की एक लम्बी यात्रा के बाद आज़ देश सामाजिक जीवन के सबसे विडंबनापूर्ण बिंदु पर खड़ा है. हर समाज की एक आंतरिक गति होती है. स्थितियों के स्वीकार-अस्वीकार, सहमति-...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
हंसराज 'सुज्ञ'
॥ भारत-भारती वैभवं ॥
46

मेरे पापा .. तुम्हारे पापा से भी बढ़कर हैं-a short story

   स्कूल  में  भोजनावकाश  के  समय  कक्षा  पांच  के तीन  विद्यार्थी  राजू ,सोहन व् बंटी ने अपने टिफिन बॉक्स खोले और निवाला  मुंह में रखते हुए राजू बोला-''...पता है सोहन मेरे पापा को&n...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
SHIKHA KAUSHIK
मेरी कहानियां
38

अरुंधति राय ने दुनिया के सामने बदशक्ल भारत दिखलाया

अच्छा है कि हिंदी में कोई अरुंधति राय नहीं है अजय तिवारी (सैयद शहरोज़ कमर से संवाद)डॉ. रामविलास शर्मा जैसे शिखर सामाजिक, सांस्कृतिक और आलोचक का  नवीनतम पाठ प्रस्तुत करने का आपको  श्रेय दि...  और पढ़ें
5 वर्ष पूर्व
Shahroz
Hamzabaan हमज़बान ھمز با ن
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