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नई हलचल

क्यों न दिवाली कुछ ऐसे मनायें

क्यों न दिवाली कुछ ऐसे मनायें
दिवाली यानी रोशनी, मिठाईयाँ, खरीददारी , खुशियाँ और वो सबकुछ जो एक बच्चे से लेकर बड़...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
dr neelam mahendra
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ख़ाकी

समाज को सुरक्षा का एहसास, क़ानून की अनुपालना के लिए  मुकम्मल मुस्तैद मॉनीटर, मज़लूमों की इंसाफ़ की गुहार ,हों गिरफ़्त में मुजरिम-गुनाहगार ,हादसों में हाज़िर सरकार , ख़ाकी को दिया ,सम्मान औ...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
kuldeep thakur
कविता मंच।
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“एक ख़त”

This image has been taken from googleएक दिन पुरानी‎ फाइलों मेंकुछ ढूंढते ढूंढते अंगुलि‎यों से तुम्हारा‎ख़त  टकरा गयाकोरे  पन्ने पर बिखरे चन्द  अल्फाज़…, जिनमेंअपने अपनेपन की यादेंपूरी शिद्दत के साथ मौजूद थ...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
Meena Bhardwaj
मंथन
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दोहे "सबको दो उपहार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

दीपक जलता है तभी, जब हो बाती-तेल।खुशिया देने के लिए, चलता रहता खेल।१।--तम को हरने के लिए, खुद को रहा जलाय।दीपक काली रात को,  आलोकित कर जाय।२।--झिलमिल-झिलमिल जब जलें, दीपक एक कतार।तब बिजली की झालर...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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ऑटो अपडेट वर्जन

GOOGLE IMAGE लोग कहते हैंसमय के साथ प्यार पुराना हो जाता है,मगर जानतुम तो हमारा ऑटो अपडेट वर्जन हो,न पुराने होगेन बदलने पड़ोगे;हो भी तो वायरस फ्री,विश्वास और मोह के दो पायों पर टिकीशीत, ताप, बारिश की छत ह...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
Abhilasha
@Abhi
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Laxmirangam: धड़कन

Laxmirangam: धड़कन: धड़कन संग है तुम्हारा आजन्म, या कहें संग है हमारा आजन्म. छोड़ दे संग परछाईं जहाँ, उस घनेरी रात में भी, गर तुम नहीं हो सा......  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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मार्गदर्शन

   एक शताब्दी पूर्व, 41 वर्षीय ऑस्वौल्ड चैम्बर्स, प्रथम विश्व-युद्ध के समय में मिस्त्र में स्थित ब्रिटिश राष्ट्रमण्डल सेनाओं में YMCA की ओर से पादरी का कार्य करने के लिए पहुँचे। उन्हें मिस्त्र...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
Roz Ki Roti
रोज़ की रोटी - Daily Bread
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माँ शारदे की वन्दना

आप ही हो कलम मेरी,
स्वयं ही माँ भारती ।।
नमन मै तुमको करु,
निश दिन उतारु आरती ।।
शब्द पुष्पो की ...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
भीकम जांगिड़
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खतरनाक है सेल्फी लेना - बालगीत 98

बुरा है जैसे सेल्फिश होनाखतरनाक है सेल्फी लेनासेल्फी लेने के चक्कर मेंदुनिया भर में मौते होतीहदें पार कर जाते सारीलगी जिंदगी दांव पर होतीकोई कितना ही समझाएकहां मानते किसी का कहनाआती हुई ट्...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
bhavna pathak
bhonpooo.blogspot.com
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गीत "नन्हें दीप जलायें हम" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

दीवाली पर आओ मिलकर, नन्हें दीप जलायें हमघर-आँगन को रंगोली से, मिलकर खूब सजायें हमआओ स्वच्छता के नारे कोदुनिया में साकार करें चीन देश की चीजों कोहम कभी नहीं स्वीकार करेंछोड़ साज-संगीत व...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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सवाल ये है कि बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे

हरेश कुमारअंग्रेजों के द्वारा बनाए गए कानूनों के बारे में देश के नेताओं की आम राय है,जब तक चलता है चलने दो। अगर, भारत के कानून में परिवर्तन आ जाए तो सबसे पहले इस देश के नेताओं और उनके चमचों से दे...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
Haresh
Information2media
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याद है न कैसे एक वोट की कमी से अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार गिर गई थी

हरेश कुमारसंसद में एक-एक वोट का अपना महत्व है। भले ही जीता हुआ कैंडिडेट आपराधिक प्रवत्ति का हो या भ्रष्टाचार के किसी केस में आरोपित हो। भारतीय कानून-व्यवस्था और नेताओं को सजा मिलने की दर से आप...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
Haresh
Information2media
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#Laghuttam_Dharna_English

4 दिन पूर्व
Barun Sakhajee
आम आदमी सरकारी चंगुल में......
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#Laghuttam_Dharna_Hindi_New

4 दिन पूर्व
Barun Sakhajee
आम आदमी सरकारी चंगुल में......
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नानी का पिटारा

नानी के देहावसान के बादसे ही उस संदूक की चाभी तलाश की जा रही थी। बच्चे से बूढ़े तक की नज़र ...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
Abhilasha
@Abhi
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नेपथ्य

मौन के इस गर्भ में, है सत्य को तराशता नेपथ्य।जब मौन हो ये मंच, तो बोलता है नेपथ्य,यूँ टूटती है खामोशी, ज्यूँ खुल रहा हो रहस्य,गूँजती है इक आवाज, हुंकारता है सत्य,मौन के इस गर्भ में, है सत्य को तराशत...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
पुरूषोत्तम कुमार सिन्हा
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जातिवाद और प्रगतिशीलता

जाति खालिस भारत  वालों का वायरस है। ऐसा वायरस जिसका कोई तोड़ कोई एंटी वायरस आजतक नहीं बना। ये वायरस पैदा होते ही हमारे शरीर में दाखिल हो जाता है हमारे दिमाग के अच्छे खासे हिस्से पर कब्ज़ा जमा ल...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
amol saroj
अमोल सरोज स्टेटस वाला
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3

कैराना -मोदी-योगी को घुसने का मौका

             पलायन मुद्दे के शोर ने कैराना को एकाएक चर्चा में ला दिया ,सब ओर पलायन मुद्दे के कारण कैराना की बात करना एक रुचिकर विषय बन गया था ,कहीं चले जाओ जहाँ आपने कैराना से जुड़े होने की ब...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
SHALINI KAUSHIK
! कौशल !
1

भरोसा

   जनवरी 1915 में, एन्डयोरेंस नामक जलपोत अन्टारिकटिका के तट के निकट बर्फ में फंसकर नष्ट हो गया। उस जलपोत में सवार, अर्नेस्ट शैकलटन के नेतृत्व में दक्षिणी ध्रुव पर खोज करने आए लोगों का दल, बचने क...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
Roz Ki Roti
रोज़ की रोटी - Daily Bread
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एक ग़ज़ल : मिलेगा जब वो हम से---

 ग़ज़ल : मिलेगा जब भी वो हमसे---मिलेगा जब भी वो हम से, बस अपनी ही सुनायेगामसाइल जो हमारे हैं  , हवा  में  वो   उड़ाएगाअभी तो उड़ रहा है आस्माँ में ,उड़ने  दे उस कोकटेगी डॊर उस की तो ,कहाँ पर और जाय...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
1

जुनून 2 ( खजाना यादों का 8 )

वर्ल्ड सोशल फोरम के इस अनूठे महाकुंभ में राष्ट्रीय वन श्रमजीवी मंच के बैनर तले देश के विभिन्न भागों से बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए जिसमें ग्रामीण महिलाओं की अच्छी खासी भाग...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
bhavna pathak
bhonpooo.blogspot.com
3

हस्तरेखा

हस्तरेखा-----------------------------------------------------------------------------------------------------"इतना मान-सम्मान पाने वाली, फिर भी इनकी हथेली खुरदरी और मैली सी क्यों है?"-- हृदय रेखा ने धीरे-धीरे बुदबुदाते हुए दूसरी से पूछा तो हथेली के कान खड़े...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
Nayana (Arati) Kanitkar
3

मांग का मौसम

प्रेम की मूसलाधार बारिश से हर बार बचा ले जाती है खुद को,वो तन्हा है........ है प्रेम की पीड़ा से सराबोर,नहीं बचा है एक भी अंग इस दर्द से आज़ाद.जब-जब बहारों का मौसम आता है,वो ज़र्द पत्ते तलाशती है खुद क...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
Aparna Bajpai
Bol Skhee Re ( साहित्यिक सरोकारों से प्रतिबद्ध )
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गीत "मिट्टी के ही दिये जलाना" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों!पिछले वर्ष 16 अक्तूबर, 2016 कोनिम्न गीत लिखा था,परन्तु इस गीत की कुछ पंक्तियों मेंथोड़ा बदलाव करकेबहुत से लोगों ने इस गीत कोअपने नाम से यू-ट्यूब परलगा दिया है।देश के धन को देश में रखना,बहा ...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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लौट गई तन्हाई भी

(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); दिल की उम्मीदों को सीने में छिपाए रक्खाइन चिरागों को हवाओं से बचाए रक्खाहमसे मायूस होके लौट गई तन्हाई भीहमने खुद को तेरी यादों में डुबाए रक्खातिरे ख़्याल ने दिन-रात मुझे ...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
लोकेश नदीश
किल्लोल
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