श्रीरामचरितमानस की पोस्ट्स

श्रीरामचरित्रमानस - दूसरा अध्याय - अयोध्याकाण्ड

श्रीरामचरित्रमानसकी विषय-सूची-अयोध्याकाण्ड में भगवान श्रीराम  के वनगमन से लेकर भगवान श्रीराम-भरत मिलाप तक के संम्पूर्ण घटनाक्रम का विस्तार पूर्वक वर्णन भवार्थ सहित। अयोध्या काण्ड से जु...  और पढ़ें
12 घंटे पूर्व
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द्वितीय सोपान-मंगलाचरण

यस्यांके च विभाति भूधरसुता देवापगा मस्तकेभाले बालविधुर्गले च गरलं यस्योरसि व्यालराट्।सोऽयं भूतिविभूषणः सुरवरः सर्वाधिपः सर्वदाशर्वः सर्वगतः शिवः शशिनिभः श्री शंकरः पातु माम्‌॥1॥भावा...  और पढ़ें
12 घंटे पूर्व
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राम राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की व्याकुलता तथा सरस्वती से उनकी प्रार्थना

दोहा : सब कें उर अभिलाषु अस कहहिं मनाइ महेसु।आप अछत जुबराज पद रामहि देउ नरेसु॥1॥भावार्थ:-सबके हृदय में ऐसी अभिलाषा है और सब महादेवजी को मनाकर (प्रार्थना करके) कहते हैं कि राजा अपने जीते जी श्र...  और पढ़ें
12 घंटे पूर्व
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सरस्वती का मन्थरा की बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा संवाद, प्रजा में खुशी

दोहा : नामु मंथरा मंदमति चेरी कैकइ केरि।अजस पेटारी ताहि करि गई गिरा मति फेरि॥12॥भावार्थ:-मन्थरा नाम की कैकेई की एक मंदबुद्धि दासी थी, उसे अपयश की पिटारी बनाकर सरस्वती उसकी बुद्धि को फेरकर चली...  और पढ़ें
13 घंटे पूर्व
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कैकेयी का कोपभवन में जाना

 दोहा : बड़ कुघातु करि पातकिनि कहेसि कोपगृहँ जाहु।काजु सँवारेहु सजग सबु सहसा जनि पतिआहु॥22॥॥भावार्थ:-पापिनी मन्थरा ने बड़ी बुरी घात लगाकर कहा- कोपभवन में जाओ। सब काम बड़ी सावधानी से बनाना, ...  और पढ़ें
13 घंटे पूर्व
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दशरथ-कैकेयी संवाद और दशरथ शोक, सुमन्त्र का महल में जाना और वहाँ से लौटकर श्री रामजी को महल में भेजना

छन्द : केहि हेतु रानि रिसानि परसत पानि पतिहि नेवारई।मानहुँ सरोष भुअंग भामिनि बिषम भाँति निहारई॥दोउ बासना रसना दसन बर मरम ठाहरु देखई।तुलसी नृपति भवतब्यता बस काम कौतुक लेखई॥भावार्थ:-'हे रान...  और पढ़ें
13 घंटे पूर्व
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श्री राम-कैकेयी संवाद

करुनामय मृदु राम सुभाऊ। प्रथम दीख दुखु सुना न काऊ॥तदपि धीर धरि समउ बिचारी। पूँछी मधुर बचन महतारी॥2॥भावार्थ:-श्री रामचन्द्रजी का स्वभाव कोमल और करुणामय है। उन्होंने (अपने जीवन में) पहली बार य...  और पढ़ें
13 घंटे पूर्व
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श्री राम-दशरथ संवाद, अवधवासियों का विषाद, कैकेयी को समझाना

दोहा : गइ मुरुछा रामहि सुमिरि नृप फिरि करवट लीन्ह।सचिव राम आगमन कहि बिनय समय सम कीन्ह॥43॥भावार्थ:-इतने में राजा की मूर्छा दूर हुई, उन्होंने राम का स्मरण करके ('राम! राम!'कहकर) फिरकर करवट ली। मंत्...  और पढ़ें
13 घंटे पूर्व
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श्री राम-कौसल्या संवाद

अति बिषाद बस लोग लोगाईं। गए मातु पहिं रामु गोसाईं॥मुख प्रसन्न चित चौगुन चाऊ। मिटा सोचु जनि राखै राऊ॥4॥भावार्थ:-सभी पुरुष और स्त्रियाँ अत्यंत विषाद के वश हो रहे हैं। स्वामी श्री रामचंद्रजी मा...  और पढ़ें
14 घंटे पूर्व
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श्री सीता-राम संवाद

चौपाई : मातु समीप कहत सकुचाहीं। बोले समउ समुझि मन माहीं॥राजकुमारि सिखावनु सुनहू। आन भाँति जियँ जनि कछु गुनहू॥1॥भावार्थ:-माता के सामने सीताजी से कुछ कहने में सकुचाते हैं। पर मन में यह समझकर ...  और पढ़ें
14 घंटे पूर्व
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श्री राम-कौसल्या-सीता संवाद

कहि प्रिय बचन प्रिया समुझाई। लगे मातु पद आसिष पाई॥बेगि प्रजा दुख मेटब आई। जननी निठुर बिसरि जनि जाई॥3॥भावार्थ:-श्री रामचन्द्रजी ने प्रिय वचन कहकर प्रियतमा सीताजी को समझाया। फिर माता के पैरों ...  और पढ़ें
14 घंटे पूर्व
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श्री राम-लक्ष्मण संवाद

चौपाई : समाचार जब लछिमन पाए। ब्याकुल बिलख बदन उठि धाए॥कंप पुलक तन नयन सनीरा। गहे चरन अति प्रेम अधीरा॥1॥भावार्थ:-जब लक्ष्मणजी ने समाचार पाए, तब वे व्याकुल होकर उदास मुँह उठ दौड़े। शरीर काँप रह...  और पढ़ें
14 घंटे पूर्व
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श्री लक्ष्मण-सुमित्रा संवाद

हरषित हृदयँ मातु पहिं आए। मनहुँ अंध फिरि लोचन पाए॥जाइ जननि पग नायउ माथा। मनु रघुनंदन जानकि साथा॥2॥भावार्थ:-वे हर्षित हृदय से माता सुमित्राजी के पास आए, मानो अंधा फिर से नेत्र पा गया हो। उन्हों...  और पढ़ें
14 घंटे पूर्व
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श्री रामजी, लक्ष्मणजी, सीताजी का महाराज दशरथ के पास विदा माँगने जाना, दशरथजी का सीताजी को समझाना

सचिवँ उठाइ राउ बैठारे। कहि प्रिय बचन रामु पगु धारे॥सिय समेत दोउ तनय निहारी। ब्याकुल भयउ भूमिपति भारी॥4॥भावार्थ:-'श्री रामजी पधारे हैं', ये प्रिय वचन कहकर मंत्री ने राजा को उठाकर बैठाया। सीता स...  और पढ़ें
14 घंटे पूर्व
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श्री राम-सीता-लक्ष्मण का वन गमन और नगर निवासियों को सोए छोड़कर आगे बढ़ना

दोहा :* सजि बन साजु समाजु सबु बनिता बंधु समेत।बंदि बिप्र गुर चरन प्रभु चले करि सबहि अचेत॥79॥भावार्थ:-वन का सब साज-सामान सजकर (वन के लिए आवश्यक वस्तुओं को साथ लेकर) श्री रामचन्द्रजी स्त्री (श्री सी...  और पढ़ें
14 घंटे पूर्व
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श्री राम का श्रृंगवेरपुर पहुँचना, निषाद के द्वारा सेवा

दोहा : सुद्ध सच्चिदानंदमय कंद भानुकुल केतु।चरितकरत नर अनुहरत संसृति सागर सेतु॥87॥भावार्थ:-शुद्ध (प्रकृतिजन्य त्रिगुणों से रहित, मायातीत दिव्य मंगलविग्रह) सच्चिदानंद-कन्द स्वरूप सूर्य कु...  और पढ़ें
15 घंटे पूर्व
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लक्ष्मण-निषाद संवाद, श्री राम-सीता से सुमन्त्र का संवाद, सुमंत्र का लौटना

 बोले लखन मधुर मृदु बानी। ग्यान बिराग भगति रस सानी॥काहु न कोउ सुख दुख कर दाता। निज कृत करम भोग सबु भ्राता॥2॥भावार्थ:-तब लक्ष्मणजी ज्ञान, वैराग्य और भक्ति के रस से सनी हुई मीठी और कोमल वाणी बोल...  और पढ़ें
15 घंटे पूर्व
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केवट का प्रेम और गंगा पार जाना

चौपाई : जासु बियोग बिकल पसु ऐसें। प्रजा मातु पितु जिइहहिं कैसें॥बरबस राम सुमंत्रु पठाए। सुरसरि तीर आपु तब आए॥1॥भावार्थ:-जिनके वियोग में पशु इस प्रकार व्याकुल हैं, उनके वियोग में प्रजा, माता ...  और पढ़ें
15 घंटे पूर्व
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प्रयाग पहुँचना, भरद्वाज संवाद, यमुनातीर निवासियों का प्रेम

दोहा : तब गनपति सिव सुमिरि प्रभु नाइ सुरसरिहि माथ।सखा अनुज सिय सहित बन गवनु कीन्ह रघुनाथ॥104॥भावार्थ:-तब प्रभु श्री रघुनाथजी गणेशजी और शिवजी का स्मरण करके तथा गंगाजी को मस्तक नवाकर सखा निषाद...  और पढ़ें
15 घंटे पूर्व
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तापस प्रकरण

तेहि अवसर एक तापसु आवा। तेजपुंज लघुबयस सुहावा॥कबि अलखित गति बेषु बिरागी। मन क्रम बचन राम अनुरागी॥4॥भावार्थ:-उसी अवसर पर वहाँ एक तपस्वी आया, जो तेज का पुंज, छोटी अवस्था का और सुंदर था। उसकी गति ...  और पढ़ें
15 घंटे पूर्व
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यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम

दोहा : तब रघुबीर अनेक बिधि सखहि सिखावनु दीन्ह।।राम रजायसु सीस धरि भवन गवनु तेइँ कीन्ह॥111॥भावार्थ:-तब श्री रामचन्द्रजी ने सखा गुह को अनेकों तरह से (घर लौट जाने के लिए) समझाया। श्री रामचन्द्रज...  और पढ़ें
15 घंटे पूर्व
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श्री राम-वाल्मीकि संवाद

देखत बन सर सैल सुहाए। बालमीकि आश्रम प्रभु आए॥राम दीख मुनि बासु सुहावन। सुंदर गिरि काननु जलु पावन॥3॥भावार्थ:-सुंदर वन, तालाब और पर्वत देखते हुए प्रभु श्री रामचन्द्रजी वाल्मीकिजी के आश्रम में ...  और पढ़ें
15 घंटे पूर्व
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चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों के द्वारा सेवा

दोहा : चित्रकूट महिमा अमित कही महामुनि गाइ।आइ नहाए सरित बर सिय समेत दोउ भाइ॥132॥भावार्थ:-महामुनि वाल्मीकिजी ने चित्रकूट की अपरिमित महिमा बखान कर कही। तब सीताजी सहित दोनों भाइयों ने आकर श्रे...  और पढ़ें
15 घंटे पूर्व
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सुमन्त्र का अयोध्या को लौटना और सर्वत्र शोक देखना

दोहा : भयउ निषादु बिषादबस देखत सचिव तुरंग।बोलि सुसेवक चारि तब दिए सारथी संग॥143॥भावार्थ:-मंत्री और घोड़ों की यह दशा देखकर निषादराज विषाद के वश हो गया। तब उसने अपने चार उत्तम सेवक बुलाकर सारथी...  और पढ़ें
16 घंटे पूर्व
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दशरथ-सुमन्त्र संवाद, दशरथ मरण

दोहा : देखि सचिवँ जय जीव कहि कीन्हेउ दंड प्रनामु।सुनत उठेउ ब्याकुल नृपति कहु सुमंत्र कहँ रामु॥148॥भावार्थ:-मंत्री ने देखकर 'जयजीव'कहकर दण्डवत्‌ प्रणाम किया। सुनते ही राजा व्याकुल होकर उठे औ...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
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मुनि वशिष्ठ का भरतजी को बुलाने के लिए दूत भेजना

दोहा : तब बसिष्ठ मुनि समय सम कहि अनेक इतिहास।सोक नेवारेउ सबहि कर निज बिग्यान प्रकास॥156॥भावार्थ:-तब वशिष्ठ मुनि ने समय के अनुकूल अनेक इतिहास कहकर अपने विज्ञान के प्रकाश से सबका शोक दूर किया॥156...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
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श्री भरत-शत्रुघ्न का आगमन और शोक

 हाट बाट नहिं जाइ निहारी। जनु पुर दहँ दिसि लागि दवारी॥आवत सुत सुनि कैकयनंदिनि। हरषी रबिकुल जलरुह चंदिनि॥1॥भावार्थ:-बाजार और रास्ते देखे नहीं जाते। मानो नगर में दसों दिशाओं में दावाग्नि लग...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
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भरत-कौसल्या संवाद और दशरथजी की अन्त्येष्टि क्रिया

दोहा : मलिन बसन बिबरन बिकल कृस शरीर दुख भार।कनक कलप बर बेलि बन मानहुँ हनी तुसार॥163॥भावार्थ:-कौसल्याजी मैले वस्त्र पहने हैं, चेहरे का रंग बदला हुआ है, व्याकुल हो रही हैं, दुःख के बोझ से शरीर सूख ...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
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वशिष्ठ-भरत संवाद, श्री रामजी को लाने के लिए चित्रकूट जाने की तैयारी

दोहा : तात हृदयँ धीरजु धरहु करहु जो अवसर आजु।उठे भरत गुर बचन सुनि करन कहेउ सबु साजु॥169॥भावार्थ:-(वशिष्ठजी ने कहा-) हे तात! हृदय में धीरज धरो और आज जिस कार्य के करने का अवसर है, उसे करो। गुरुजी के व...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
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अयोध्यावासियों सहित श्री भरत-शत्रुघ्न आदि का वनगमन

दोहा : जरउ सो संपति सदन सुखु सुहृद मातु पितु भाइ।सनमुख होत जो राम पद करै न सहस सहाइ॥185॥भावार्थ:-वह सम्पत्ति, घर, सुख, मित्र, माता, पिता, भाई जल जाए जो श्री रामजी के चरणों के सम्मुख होने में हँसते ह...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
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