Bol Skhee Re ( साहित्यिक सरोकारों से प्रतिबद्ध ) की पोस्ट्स

विवशता

3 दिन पूर्व
Bol Skhee Re ( साहित्यिक सरोकारों से प्रतिबद्ध )
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और वो मुक्त हो गया.....

उनकी उम्मीदें उसके कंधे पर लदी थींउनके संघर्ष का दर्द उसके हर एहसास में घुला था,उसकी हर सांस जैसे कर्ज थी खुद पर,अपने सपने जैसे सिर पर बैठे थे.कुछ बन जाने की उम्मीद हर समय चुभती थीआंखों में.जब भ...  और पढ़ें
3 दिन पूर्व
Bol Skhee Re ( साहित्यिक सरोकारों से प्रतिबद्ध )
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Love in barriers (मोहब्बत में दीवारें )

आओ खेलें छुपन-छुपाई,तुम मुझे खोजो और मै तुम्हे,पर्दे के इस पार, पर्दे के उस पारदीवारों के इस पार, दीवारों के उस पार.देखो चुपके से मेरी थाली मत टटोलना,रात की एक रोटी रखी है उसमें,तुम्हारे हांथो का ...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
Bol Skhee Re ( साहित्यिक सरोकारों से प्रतिबद्ध )
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Bol Skhee Re ( साहित्यिक सरोकारों से प्रतिबद्ध )
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वो काली रात

1 सप्ताह पूर्व
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कत्लगाह

1 सप्ताह पूर्व
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रक्षा का वादा

राखियों से सजी हुई कलाइयांदेती हैं अपनी बहनों को सुरक्षा का वादा हर बहन अपने भाई की कलाई पर रेशम की गाँठ बाँध कर सहेज लेती है रिश्ता उम्र भर के लिए ,भाई भी बहनों को देते हैं उम्मीद कि उम्र ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
Bol Skhee Re ( साहित्यिक सरोकारों से प्रतिबद्ध )
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एहतियात

3 सप्ताह पूर्व
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देर हो चुकी थी

पिछले तीन दिन से गज़ब का  उत्साह आ गया था उसके अंदर , लग रहा था  जैसे अब भी देर नहीं हुयी है । सोच रही थी किसी को कुछ बताये या नहीं। फिर सोचा कि नहीं, सब कुछ फाइनल होने के बाद ही बतायेगी। कल इंटरव्...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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रासायनिक विध्वंश की आशंका (Fears of chemical destruction)

घनघोर अंधेरी रात मेंजब घुमड़ते हैं मेघदिल थर- थर काँप उठता है।सात समंदर पार बैठे हमारे अपने लोगों के सिर परकंही बरस न रहे हों गोले - बारूद,आतताइयों के बनाये मंसूबों सेउजाड़ न हो रही हों मासूम बच्...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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सोलह श्रंगार

नख से सिख तकसोलह श्रंगार से सजीतुम्हारी अर्धान्गिनी;तुमने पलट कर भी नहीं देखा!तुम्हे पता भी हैइन श्रंगारों की कीमत,नाक , कान, हाथ, पैरशरीर का एक- एक अंगरखना पड़ता है गिरवीदूसरे के नाम,हर कदम ,हर ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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शौक-ए-हमसफर

3 सप्ताह पूर्व
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#Lalu yadav & #Niteesh kumar

#Lalu Yadavवोट दिये हम तुमको अपनी ,तुम क्यों धोखा खाये ?बोलो तो लालू यादव.तेजस्वी से कहकर तुमनेक्यों न इस्तीफ़ा दिलायाबोलो तो लालू यादव?कहा से इतना पैसा आयाक्यों नहीं सबको बताये ?बोलो तो लालू यादव .किस...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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बस इतनी सी कहानी

4 सप्ताह पूर्व
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Truth can never be killed (सच कभी मारा नहीं जा सकता)

मेरे साथियों !आओ भोंक दो मेरे सीने में अपने पैने खंज़र ,टुकड़े - टुकड़े कर दो मेरे,बहा दो मेरे जिस्म से खून की धारफिर भी नहीं मरूंगा मै !मुझे मारने का दिन-रात षड्यंत्र करने वालों ,ओढ़ लो स्वार्थ की स...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
Bol Skhee Re ( साहित्यिक सरोकारों से प्रतिबद्ध )
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Time never be old ( बूढ़ा नहीं होता समय )

बच्चे  हमेशा संजोते रहते है कुछ न कुछटूटी प्लास्टिक , कांच की बोतलेंकूड़े में बिखरे कीमती सामान ,भीख के कटोरे और  कूड़े के बोरे में;शाम को ले आते हैं बच्चे ;माँ बाप के लिए रोटी ,भाई बहन क लिए टॉ...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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जिंदा रहने की ख्वाहिश

मेरे जीवन के कटुतम रंगों में तुम्हारा रंग सबसे मधुर  है .जीवन के संघर्षों के धूसर लम्हों में तुम हरियाली की तरह आती होऔर मुझे सुर्ख कर जाती हो .सब कुछ ख़त्म होने की कगार पर भी तुम मुझे डटे रहने...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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देखो बाढ़ आयी

उमड़ रहीं नदियाँबह रहे हैंबाँध ,टूट रहे सपनेढह रहे मकान।राशन बह गयाबह गयी किताबबापू कब तक थामें रहेंगेउनमे नहीं ताब।पानी अक्षर पी रहाकुत्ता रोटी खाय भूखी बिटिया देखकरहाहाकार मचाय।चारों  ...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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२ प्रेम कवितायें

१- तुमने कहा पूजामै चुप रही ,तुमने कहा आशामै मुस्कुराई ,तुमने कहा नैनामैंने तुम्हे देखा ,तुमने कहा खुशीमै खिलखिलाई,तुमने कहा धरतीमैंने थाम लिया तुमको ,जब मैंने कहा आकाशतुम दूर होते गए ,इतनी दू...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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नियति

4 सप्ताह पूर्व
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Breath

4 सप्ताह पूर्व
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No Holiday in women's life

संडे हो या मंडेनहीं है कोई हॉलिडेकाम किये जा घर के अंदरनहीं है कोई छुट्टी जी।कमर टूटती तो टूटने दोपैर लरजते है लरजने दोसर फटना तो आम बात हैक्योँ बनती हो डॉक्टर जी।आज नहीं कुछ नया बनायावही प...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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#किसान ने की आत्महत्या (काश... बचा पाती तुम्हें अखबार की सुर्खियाँ बनाने से)

काश मै दे पाती तुम्हेथोड़ी सी बारिश , थोड़ी सी हवा,एक नदी की रवानी , एक फूल की कहानी,काश सौप पाती तुम्हे,एक पूरा का पूरा मौसम;जो लहलहाता तुम्हारे खेत.काश रख पाती कुछ रोटियां तुम्हारी थाली म...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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Bol Skhee Re ( साहित्यिक सरोकारों से प्रतिबद्ध ): जाति पूछ लो राष्ट्रपति की

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4 सप्ताह पूर्व
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जाति पूछ लो राष्ट्रपति की

जाति न पूछो साधु कीजाति न पूछो बाम्हन कीजाति न पुछो क्षत्रिय कीजाति पूछ लो नेता कीजाति पूछ लो कार्यकर्ता कीजाति पूछ लो मंत्री कीजाति पूछ लो सांसद कीजाति पूछ लो विधायक कीजाति पूछ लो पंच कीजात...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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पुरानी किताब हूं

मै रीति हूं, रिवाज़ हूं ,पुराना हिसाब हूं,बंद दरवाजों में पडा पुराना असबाब हूं.कीमत कुछ भी नहीं मेरी फिरभी ;हाथ आयी अचानक पुरानी किताब हूं.रख लो सन्भाल कर या बेच दो रद्दी मेंमैं पुस्तैनी मकान में...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
Bol Skhee Re ( साहित्यिक सरोकारों से प्रतिबद्ध )
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