अब छोड़ो भी की पोस्ट्स

सावधान! कन्‍हैया निशाने पर हैं...

जन्‍माष्‍टमी को दो दिन बचे हैं और मथुरा के मंदिरों-घाटों-आश्रमों-गेस्‍ट हाउसों में भारी  भीड़ है। इस भीड़ में अधिकांशत: पूर्वी प्रदेश के दर्शनार्थी ही हैं, इसके बाद क्रमश: अगले  नंबरों पर प...  और पढ़ें
5 दिन पूर्व
अब छोड़ो भी
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अंसारी साहब…शहर के कुछ बुत ख़फ़ा हैं इसलिये, चाहते हैं हम उन्हें सज़दा करें

बुद्धिमत्‍ता जब अपने ही व्‍यूह में फंस जाए और पाखंड से ओवरलैप कर दी जाए तो वही स्‍थिति हो जाती है जो आज निवर्तमान उपराष्‍ट्रपति मोहम्‍मद हामिद अंसारी की हो रही है।''देश के मुस्लिम समुदाय में घ...  और पढ़ें
1 सप्ताह पूर्व
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चोटी कटवा: खौफ़ की मौत तो जाहिल मरा करते हैं

सबसे पहले एक शेर-बड़े खौफ़ में रहते हैं वो, जो ज़हीन होते हैंमगर खौफ़ की मौत तो जाहिल मरा करते हैं...और इन्हीं दो पंक्‍तियों के साथ आज सुबह तक चोटी काटने की घटनाओं की संख्‍या बढ़कर 62 पहुंच गई।ग़ज...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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एक फॉन्‍ट की ताकत: जिसने एक सत्‍ताधीश को कुर्सी से उतार फेंका

कभी कवि रामधारी सिंह "दिनकर"ने कलम का महत्‍व बताते हुए लिखा था-दो में से क्या तुम्हें चाहिए कलम या कि तलवार मन में ऊँचे भाव कि तन में शक्ति विजय अपारअंध कक्ष में बैठ रचोगे ऊँचे मीठे गानया तलवा...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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महिलाओं की FOP Leave: फेमिनिस्‍ट की इतनी हायतौबा क्‍यों ?

डिजिटल प्रगति अब हमारे समय का सच है इसलिए अब इसके बिना सामाजिक या आर्थिक प्रगति के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता।नित नए प्रयोग हो रहे हैं, नया क्षेत्र होने के कारण इसके साथ आने वाली बाधाओं से न...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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धर्म की दीमकें

इस विषय पर मैं पहले भी काफी लिखती रही हूं और आज फिर लिख रही हूं क्‍योंकि यह विषय  मुझे हमेशा से न सिर्फ उद्वेलित करता रहा है बल्‍कि नए-नए सवाल भी खड़े करता रहा है।व्‍यापारिक तौर पर बड़े टर्नओव...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
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वैचारिक हिंसा का प्रायोजित प्रदर्शन #NotInMyName

ये बदहवास सा वक्‍त हमारी रूहों के गिर्द कुछ इस तरह चस्‍पा किया जा चुका है कि तमाम  कोशिशें नाकाफी मालूम पड़ती हैं, बावजूद इसके हम मायूस नहीं हैं, कतई नहीं। ऐसा लगता है  कि हम जितना आगे जाने की...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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इमरजेंसी पर आज बस इतने ही हैं शब्‍द

इमरजेंसी पर आज बस इतना ही कह सकती हूं  कि…इतिहास की एक घटना जिसने भारतवर्ष की  राजनैतिक दिशा-दशा, आरोह-अवरोह, घटना-परिघटना,  विचारधाराओं का विचलन और समन्‍वय के साथ-साथ  हमारी पीढ़ियों को...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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पौधों को वृक्ष बनने के लिए किसी मार्केटिंग की जरूरत नहीं

मुनव्‍वर राणा साहब लिखते हैं कि -सो जाते हैं फुटपाथ पे अखबार बिछाकर,मजदूर कभी नींद की गोली नहीं खाते...ये अशआर पढ़ते हुए हम भूल जाते हैं कि अब हमें उल्‍टे कदमों पर चलना सिखाया जा रहा है  और ये प...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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बीफ पर बात करने से पहले ज़रा ये सच भी जान लीजिए----

पूर्वाग्रह व्‍यक्‍ति के प्रति हों, समाज के प्रति अथवा राजनैतिक पार्टी के प्रति, किसी  भी विषय पर तिल का ताड़ बनाने और उसी आधार पर शंकाओं को वास्तविकता  जैसा दिखाने का माद्दा रखते हैं। रस्‍...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
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सहारनपुर: हर इक फ़साद ज़रूरत है अब सियासत की

शायर हसनैन आक़िब का एक शेर है - हर इक फ़साद ज़रूरत है अब सियासत कीहर इक घोटाले के पीछे वज़ीर रहते हैं।सहारनपुर हिंसा पर जो सवाल उठ रहे  हैं उनके जवाब अभी तो कोई नहीं देगा मगर सवाल तो उठ रहे हैं न...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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क़ाजी नजरुल इस्लाम- एक विद्रोही जनकवि जो अपनी उम्र के आखिरी तीन दशक तक खामोश रहा

क़ाजी नजरुल इस्लाम- एक विद्रोही जनकवि जो अपनी उम्र के आखिरी तीन दशक तक खामोश रहाआज 24 मई को जन्‍मे काजी नजरुल इस्लाम नाम है आजादी के 1942 के दौर में सामाजिक भेदभाव और धार्मिक कट्टरता के खिलाफ सबसे...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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बेसन की सोंधी रोटी... के बाद की यात्रा

आज मातृदिवस पर कुछ लिखना था तो सोचा वही क्‍यों ना लिखूं जो कई सालों से मन को बींधता आया है। बाजार और सोशल मीडिया जैसे प्‍लेटफॉर्म लीक पर चलते हुए बखूबी सारे ''दिवस''मनाते हैं मगर वे उन प्रश्‍नों ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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बेलगाम बरकती

ये कैसा  पागलपन है, ये कैसी बदहवासी है कि भाजपा और संघ में शामिल होने वाले  मुसलमानों के खिलाफ टीपू सुल्तान मस्जिद के शाही इमाम सैयद मोहम्मद नूरूर रहमान  बरकती ने फतवा जारी करते हुए कहा है ...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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बाहुबली के बहाने इतिहास की कुछ सच्चाइयों से भी सामना करना जरूरी है

माहिष्‍मती के समृद्ध इतिहास को कौन नहीं बूझना चाहताकहते हैं कि जो समाज अपने इतिहास से सबक नहीं लेता,  उसके वर्तमान और भविष्‍य दोनों को ही निन्दित होना पड़ता  है। विविधताओं से भरा पड़ा हमा...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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Amish Tripathi and Raveena Tandon launch the book cover of ‘Sita- Warrior of Mithila’

Mumbai: One of the most popular mythology writers of our times, Amish launched the book cover of his highly-awaited Book 2 in the Ram Chandra series – ‘Sita-Warrior of Mithila’ today. The cover launch of this thrilling adventure that chronicles the rise of Lady Sita was held at Title Waves Bookstore in Mumbai.At the book cover launch, the renowned author was accompanied by none-other-than the Bollywood Actress and Producer, Raveena Tandon. Amish’s new book, which revolves around Lad...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
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लाशों को गिनने का सिलसिला बंद होना चाहिए

महाभारत युद्ध के दौरान कई बार कृष्ण ने अर्जुन से परंपरागत नियमों को तोड़ने के लिए कहा था जिससे  धर्म की रक्षा हो सके, युद्ध के दौरान कर्ण ''निःशस्त्र''थे तब श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा, ''हे पार्थ, ...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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#PresidentMukherjee conferred the 52nd Jnanpith Award on Prof. Sankha Ghosh in New Delhi today

Jnanpith Award has been the 52st Jnanpith Award to veteran modern Bengali poet Shankha Ghosh for year 2016. He is a leading authority on Rabindranath Tagore. Ghosh was conferred the Padma Bhushan in 2011 and the Sahitya Academi award in 1999. Shankha Ghosh is the seventh Bengali author to win India’s highest literary award.Last year eminent Gujarati Litterateur Shri Raghuveer Chaudhary was declared recipient of 2015 Jnanpith Award. Prior Gyanpith award 2014 was given to Bhalchandra Nemade. Sin...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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नाजनीन और हमसर हयात निजामी तो सिर्फ बानगीभर हैं

धर्म का काम है लोगों को सदाचारी और प्रेममय बनाना और राजनीति का  काम है लोगों का ध्‍यान रखना, उनके हित के लिए काम करना। जब धर्म  और राजनीति साथ-साथ नहीं चलते तब हमें भ्रष्‍ट राजनीतिज्ञ और कपट...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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धार्मिक गुंडागर्दी के खिलाफ आवाज़ उठाना ज़ुर्म है क्‍या

कबीर, रैदास, रसखान की भक्‍ति परंपरा वाले देश में धर्म के मूलभाव की धज्‍जियां किस तरह उड़ाती हैं, यह हम देख सकते हैं सोनू निगम द्वारा अजान पर कहे गए शब्‍दों के बाद आई प्रतिक्रियाओं से। इन शब्‍दो...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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अकेली कविता कृष्‍णन ही क्‍यों…इस अराजकता के हम सभी साक्षी हैं

हमारे देश में जिन शब्‍दों को ब्रह्म माना गया, सोशल मीडिया पर या इंटरनेट की दुनिया ने उनको  धराशाई करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी है। यहां शब्‍दों का ऐसा सैलाब आया हुआ है कि क्‍या  सही है क्‍...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
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बात तो आलस्‍य की ही है ना...

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य दिवस आगामी 7 अप्रैल को मनाया जाएगा तब तक देखें आप स्‍वयं को स्‍वस्‍थ रखने के लिए क्‍या क्‍या कोशिश करते हैं। इस बार वर्ल्‍ड हेल्‍थ ऑरगेनाइजेशन ने इसकी थीम रखी है ''अवसाद''..; ...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
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क्‍या आपने मृणाल पांडे का लेख पढ़ा?

क्‍या आपने मृणाल पांडे का लेख पढ़ा? नहीं पढ़ा तो 29 मार्च के दैनिक जागरण का संपादकीय पृष्‍ठ पढ़  लीजिएगा। कल यानि 29 मार्च को छपा यह लेख मृणाल जी में मौजूद गजब की प्रतिभा को दर्शाता है,  वो प्रत...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
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''नवरात्रि''एक ऊर्जा संकलन का प्रवाह : अजा, अनादि शक्ति अविनाशिनी...

सकारात्‍मक सोचों के ऊपर हावी होते इस क्रिटिकल समय में जब कि राष्‍ट्रीय व अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर नेगेटिव ऊर्जा को प्रवाहित करने वाले अनेक लोग विध्‍वंसक सोचों के साथ उपस्‍थित हों तब उत्‍सव...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
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BITS पिलानी का शोध- वेद , मंत्र और मनोविज्ञान

वेदों की बात करते ही क्‍या हम दक्षिणपंथी हो जाते हैं, क्‍या वेद की बात से नकारात्‍मकता खत्‍म होती है, क्‍या वेदों में जिन मंत्रों का उल्‍लेख है-उनकी बात पिछड़ेपन की मानी जाए...आज इन सबपर सोचने क...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
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नाक पै आफत

अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस गुजर गया, होली भी हो ली और हुरंगा भी... मगर इस बीच कुछ घटनाऐं ऐसी  घटीं जिनसे बात बात में 'नाक'आड़े आई। कहीं तीन तलाक मामले में मुस्‍लिम महिलाओं ने उलेमाओं  की नाक क...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
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क्रोध लाल रंग, ईर्ष्‍या हरे रंग, आनंद जीवंतता पीले रंग से जुड़े होते हैं

श्री श्री रविशंकर  ने  कहा कि चैतन्य होकर हम अज्ञानता और नकारात्मकता के काले रंग को मिटा सकते हैं। इससे हमारे जीवन में आनंद और जीवंतता के पीत रंग के साथ-साथ और भी कई रंग भर जाते हैं। इस आनंद ...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
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कंकाल के साथ

बचपन में पढ़े थे सुभाषितानि...हमें संस्‍कृत पढ़ाने वाले शास्‍त्री जी कक्षा में एक एक बच्‍चे को खड़ा करके एक एक श्‍लोक रटवाते थे, फिर उनके अर्थ और प्रयोग पूछते थे तब हमें ये कतई नहीं पता था कि इन...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
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फणीश्वर नाथ रेणु का जन्‍मदिन आज: 'मैला आंचल'लिखकर रेणु ने रेणु की ही बात कही

रेणु का मतलब होता है बालू- रेत- रेती सो अपने नाम को सार्थक करते  वो धूल से सने रस्‍ते, गली गांव चौबारे से निकलती खुश्‍बुऐं, दामन को  बच बचाकर चलती बतकहियों और हकीकतों को समेटते रहे। जी हां !  '...  और पढ़ें
5 माह पूर्व
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ख़ुदा के वास्‍ते !: कविता- ये गरल तुम्‍हें पीना होगा

ख़ुदा के वास्‍ते !: कविता- ये गरल तुम्‍हें पीना होगा: सृष्‍टि की खातिर शिव ने तब एक हलाहल पीया था, अब एक हलाहल तुमको भी इसी तरह पीना होगा, समरस सब होता जाए, निज और द्विज में फर्क मिटे, आग्रह......  और पढ़ें
6 माह पूर्व
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