तस्कीन की पोस्ट्स

न ईद पर वो आये, न उनका कोई पैगाम

न ईद पर वो आये, न उनका कोई पैगामक्या यही प्यार करने की अदा है उनकी.....                   शीरींमंसूरी "तस्कीन" ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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यूँ तो कुछ देर ठहर जाती वो रात

यूँ तो कुछ देर ठहर जाती वो रात तेरे मेरे मिलन की वो आखिरी रात यूँ तो कुछ देर तुम्हें आये न हुआ तुमने कह दी फिर वो जाने की बात यूँ तो कुछ........तेरे आगोश में मैं आने न पायी थी अभी तुमने कह दी फिर से जाने ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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3

मुझे याद है शायद तुम भूल गए

मुझे याद है शायद तुम भूल गए दोस्ती तुमने की पर निभाई मैंने है मुझे याद है........प्यार तुमने किया पर निभाया मैंने है मुझे याद है........वादे तुमने किये पर निभाए मैंने हैं मुझे याद है........शीरीं मंसूरी “तस...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
तस्कीन
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ख्वाहिशें तो बहुत उठती हैं इस दिल में हर रोज

ख्वाहिशें तो बहुत उठती हैं इस दिल में हर रोज मगर तुम्हारी खुशियों के लिए इन्हें दफनाया भी हर रोज करती हूँ शीरीं मंसूरी “तस्कीन”...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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3

मैंने तुमसे कुछ ज्यादा तो नहीं

मैंने तुमसे कुछ ज्यादा तो नहीं सिर्फ प्यार के बदले, प्यार ही तो माँगा था मैंने तुमसे........दो कदम साथ चलने के लये,मैंने तुम्हारा हाथ ही तो माँगा थामैंने तुमसे........तुम्हें ख़ुशी देने के लिए, तुम्हारे ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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4

जिन्दगी के सफर को, मैं कितना आसाँ समझती थी

जिन्दगी के सफर को, मैं कितना आसाँ समझती थी पर जिन्दगी के सफर को तय कर पाना बड़ा ही मुश्किल है कुछ लोग मिलते हैं, तो कुछ लोग बिछड़ते हैं कुछ लोग शहद से ज्यादा मीठे होते हैं,तो कुछ लोग नीम से भी ज्यादा ...  और पढ़ें
2 सप्ताह पूर्व
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6

चन्दा अपनी चाँदनी से कह दो

चन्दा अपनी चाँदनी से कह दो चली जाये यहाँ से अब मुझे ये काली रातें ही अच्छी लगतीं हैं चाँदनी रात अब मुझे बैरी विरहन सी लगती है चाँदनी रात में मेरे दिल के ज़ख्म भी दिखाई पड़ते हैं काली रातों से मैंन...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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2

प्रिय, तुम्हारे जन्मदिवस पर,

प्रिय,तुम्हारे जन्मदिवस पर,मैं तुम्हें दें न सकी कुछ भीकिसे ने तुम्हें कमल दिया,किसी ने तुम्हें रोज़(गुलाब)पर मैं तुम्हारे लिए अल्लाह से दुआ मांगती हूँ हररोज़मुझे मिले खार(कांटे),तुम्हें मिले ...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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6

रमज़ान का पाक़ महीना

रमज़ान का पाक़ महीना लूट लो सवाब जितना लूटना है पता नहीं ऐसा पाक महीना फिर मिले न मिलेशीरीं मंसूरी “तस्कीन”...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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4

ऐ मुसलमान

ऐ मुसलमान रमजान के ऐसे पाक़ महीने में तो गुनाहों से तौबा कर लेशीरीं मंसूरी “तस्कीन”...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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2

रमज़ान में करते हो गुनाह

रमज़ान में करते हो गुनाह और बड़े फख्र से कहते हो की हम मुसलमान हैं शीरीं मंसूरी “तस्कीन”...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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5

गम तो दिए तुमने मुझे इतने

गम तो दिए तुमनेमुझे इतनेकि मैं बयाँ नहीं कर सकतीपर तुहारी एक मुस्कराहट पेतुम्हारे उन हज़ार दिए हुए ग़मों कोभुलाया है हमने कई दफा- शीरीं मंसूरी "तस्कीन "...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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3

कहने को तो बहुत कुछ है

कहने को तो बहुत कुछ है, पर कहना नहीं है तुमसे अबअब तुम कहो अलविदा और हम कहें अलविदा- शीरीं मंसूरी "तस्कीन"...  और पढ़ें
3 सप्ताह पूर्व
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11

तारीफ करना तो दूर की बात

तारीफ करना तो दूर की बातलोग तो उल्टा तोहमत लगाने लगे -शीरीं मंसूरी "तस्कीन"...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
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2

कमियाँ मेरी सब ने देखीं

कमियाँ मेरी सब ने देखींपर मेरे हुनर को किसी न पहचाना शीरीं मंसूरी "तस्कीन "...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
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30

अपने प्यार के काबिल

न तुमने मुझे कभी पहचाना, न पहचानोगेशायद मैं ही गलत थी जो तुम्हेंअपने प्यार के काबिल समझ बैठीशीरींमंसूरी  "तस्कीन"...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
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27

मैं तुम्हें जितना भूलने की कोशिश करती हूँ

मैं तुम्हें जितना भूलने की कोशिश करती हूँ तुम मुझे उतना ही याद आते हो मुझे पता नहीं ये मेरी कमी हैया ये तुम्हारी कमी है शायद ये तुम्हारी ही कमी है कि तुम इतने अच्छे न होते तो शायद मैं तुम्हें कभ...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
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21

अल्लाह मुझे उस वक्त

अल्लाह मुझे उस वक्त आप से बहुत शिकायत थी जब मैं अपनी बेकार सी ख्वाहिशों के पीछे भाग रही थी मुझे आपसे हजारों शिकायतें थीं तब मैं दुनियाँ से बेखबर थी जब दुनियाँ को देखा पहचाना कि दुनियाँ में ...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
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27

वक़्त भी कितना अजीब है

वक़्त भी कितना अजीब है न इन्सान को क्या कुछ नहीं सिखा देता जब मुझे तुम्हारी ख्वाहिश थी तब तुम्हें मेरी ख्वाहिश नहीं थी जब मैं तुमसे बेपनाह प्यार करती थी तब तुम्हें मुझसे प्यार नहीं था उस वक़्त ज...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
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29

कई अर्सा हो गया

कई अर्सा हो गयातुम्हारी मुस्कराहट देखे हुएकई ......तुम्हारा झूठा खाए हुएकई ......मेरी हर बात पे"हाँ ठीक है "किये हुएये सब सुनने के लिएआज भी मेरा दिल बेक़रार हैशीरीं मंसूरी "तस्कीन"...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
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23

आखिरी दिन

साल का आखिरी दिन थासब भूल के नयी जिन्दगी की ओरबढ़ने लगी थी मैंअचानक आकर यूँ मेरी जिन्दगी मेंसब रंग भर गए थे तुमसोचा था मंजिल मिल गई मुझेअंजान थी में खुद से जो तुझ पर भरोसा कर बैठीशीरीं मंसूरी "...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
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21

बहुत दूर चला गया

गम आज मुझसे बहुत दूर चला गयाकहता है यहाँ बहुत अँधेरा हैशीरीं मंसूरी "तस्कीन "...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
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20

लाख मुखोटे

अपने चहरे पे तुमने लगाये हैंयूँ अच्छाई के लाख मुखोटेढूँढने निकलूँ बुराई को दुनिया मेंतो तुम सा बुरा न कोई पायेगाशीरीं मंसूरी "तस्कीन "...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
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17

होसलों और उम्मीदों

एक नई कोशिश की है... शायद इसे लेखन तो नहीं कहा जा सकता, आप चाहें तो कह भी सकते हैं... कुछ क़लम घिसी है ... क्या निकला ... खुद तय करना मुश्किल है.... आप बताइयेगा मैं सागर की रेत, तुम सागर की लहर मैं होंसलों और उ...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
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27

ज़िन्दगी का सफ़र

ज़िन्दगी का सफ़र किसी ने न जाना मैं अंजानी तू बेगाना शीरीं मंसूरी 'तस्कीन'...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
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17

गलती तेरी नहीं

गलती तेरी नहीं मेरी थी जोमेरी आँखें तेरा दिल न पढ़ पायींशीरीं मंसूरी 'तस्कीन'...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
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19

वक़्त को और इंसान

वक़्त को और इंसान को बदलने में देर नहीं लगती .......शीरीं मंसूरी 'तस्कीन'16.05.17...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
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17

एक सच सभी के लिए

एक सच सभी के लिएजब कोई अनजान व्यक्ति आपकी जिंदगी में अचानक से आता है और आप उस अनजान व्यक्ति को अपनी जिंदगी की सारी सच्चाई उसे आँख बंद करके बता देते हैं उसके ऊपर हद से ज्यादा भरोसा करने लगते हैं ...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
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19

अर्शे के बाद

कई अर्शे के बाद उनका ये पयाम आया हैउन्हें आज भी है मुहब्बत ये पैगाम आया हैशीरीं मंसूरी 'तस्कीन'...  और पढ़ें
6 माह पूर्व
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Manish Mishra
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Abhishek Thakur
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