रवीन्द्र पाण्डेय
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi... की पोस्ट्स

प्रेम रंग हो मोहना...

हे मोहना, मन मोहना...तुम आस हो, तुम स्वांस हो...मेरे अनंतिम सोच के,अपरिमित आकाश हो...तुम प्रेम रंग हो मोहना,तुम सुर-सलिल आभास हो...जीवन का मेरे प्रमाण हो,दुःख विनाशक बाण हो...जीवन सफल हो मोहना,तुम जिसके...  और पढ़ें
4 दिन पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
1

शरारत करता हूँ...

मैं ढूंढ रहा उस बचपन को,जाने कब कैसे फिसल गया...रुकने को बोला था कितना,देखो वो जिद्दी निकल गया...अब की बार जो मिल जाये,मैं उसकी कान मरोडूँगा...कितना भी फिर वो गुस्साये,नहीं उसकी बाँह मैं छोडूंगा...ले...  और पढ़ें
6 दिन पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
15

अफ़सोस मग़र अब कहानी में...

कहती हैं दर-ओ-दीवारें सभी,फिर कब वो मौसम आयेगा...मैं झूम उठूँगा बरबस ही,बचपन आँगन में समायेगा...वो खुली गगन के नीचे सब,फिर खाट लगाकर सोएंगे...जब डाँट पड़ेगी नानी की,चिल्ला चिल्ला कर रोयेंगे...फिर माम...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
3

खता आज हम-तुम करें...

हुई है मोहब्बत बताऊँ किसे,किस से कहूँ और जताऊँ किसे..ये दीवानगी अब अदा है मेरी,सम्हालूँ इसे या मिटाऊँ इसे..?वो लमहात कितने जूनूनी हुए,जिसे हमने चाहा वो खूनी हुए..दिए जख़्म दिल पे दिखाऊँ किसे,हुई है...  और पढ़ें
4 सप्ताह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
3

कृतियाँ नव दीपक बन, साहित्य के अलख जगाएंगी...

हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि अजित कुमार जी के निधन से मन आहत हुआ है...अश्रुपूरित शब्दांजलि.....मौसम एक प्यारा बीत गया,वो सबके मन को जीत गया,अब शेष स्मृतियां जीवन भर,हमें उनकी याद दिलाएंगी...कुछ कर देंगी ...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
4

मंजिलों से प्यार कर...

सिमटती राहें कह रहीं, मंजिलों से प्यार कर...धड़कनों का राग सुन, सांसों का व्यापार कर...वक़्त से कर यारियाँ, ये जो गुजरे ना मिले...कह दे जो दिल में तेरे, प्रेम का  इज़हार कर...दो घड़ी -सी ज़िन्दगी, कब ये खो जा...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
4

बाज़ी ये कैसे पलटती नहीं...

मुस्कुराता हुआ चेहरा देखकर,यकीं है सवेरा हुआ हो कहीं...क्या होती है रातें, न जानू सजन,रोशनी तेरे यादों की छटती नहीं...डगर हो, सफ़र हो, मंजिल तुम्हीं,बिन तुम्हारे घड़ी एक कटती नहीं..खुला आसमां और हम तु...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
3

ख़्वाबों में महफ़िल है...

यकीं है मिलेंगे ख़्वाबों में हम तुम,मग़र बेकरारी में, नीदें कहाँ हैं..?तुम्हीं से रौशन है मेरी ये दुनिया,तुम्हीं से खुशियों का कारवां है...भले दूर हो तुम, जेहन में हो मेरे,जैसे धरती के संग आसमां है......  और पढ़ें
1 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
3

सफ़र है ये ज़िन्दगी...

ढूंढने निकला हूँ फिर मैं, ज़िन्दगी के मायने,शाम तक शायद मिले वो, या अंधेरी रात हो...सफ़र है ये ज़िन्दगी तो, चलते रहना लाज़मी,है कभी तनहाईयाँ, कभी हमसफ़र का साथ हो...एक आहट से किसी की, जोर से धड़का है द...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
3

मेरी उम्मीदों के सूरज... तू आ निकल...

कल तक तेरी तपिश से, हैरान रहा मैं...आज ढूँढती है नजरें, बन बावरा तुझे...एक झलक दे भी दे, अब और न तड़पा...मिल जायेगा सुकूं और, करार बस मुझे...एक साथ तेरा रहते, आबाद थी दुनिया...नजरें क्या तूने फेरी, भूला ...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
2

मुस्कुरा के तो देख...

मिसालें मिलेंगी तेरे नाम की,तू खुद को ज़रा आज़मा के तो देख...चली आयेगी वो हवा की तरह,तू मौसम की तरह बुला के तो देख...भले दूर है वो खुशी की नगर,दो कदम ज़रा तू बढ़ा के तो देख...सिफर है अगर हासिल-ए-ज़िन्दगी,...  और पढ़ें
1 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
4

मैं आम आदमी...

लिखी थी ईबारत, फ़लक पे कहीं...पढ़ ना पाया, रही आँखों में कुछ नमी...मैं तो बढ़ता रहा, मंजिलों की तरफ...लोग लिखते रहे, बस एक मेरी कमी...नहीं अफ़सोस, हासिल भले कुछ नहीं...उस फ़लक से है बेहतर, मेरी ये जमीं...सुन ओ तकद...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
4

धूप मुलाकातों की...

उम्मीद-ए-रौशनी में, मैं शब गुजार लेता हूँ...धड़कनों की सरगम से, सुर उधार लेता हूँ...काफ़िले वो खुशियों के, मेरी गली आएँगे...देख के आईना, खुद को संवार लेता हूँ...छोड़िये वो बातें, जो दिल को दुखा देती हैं...एक...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
5

उम्मीदों का मौसम जवां हो गया...

बूंदे बारिश की टिप-टिप टपकने लगी,फिर उम्मीदों का मौसम जवां हो गया...हुस्न की क्या अज़ब है ये जादूगरी?आ के गालों पे मोती फ़ना हो गया...ये सुबह शबनमी गुनगुनाने लगी,ख़ौफ रातों का जाने कहाँ खो गया..?तपिश ध...  और पढ़ें
2 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
9

उम्मीद हैं सांसे, ख़्वाब है ज़िन्दगी....

सुनो, आओ ना, आ भी जाओ,यूँ दूर रहकर, अब ना तड़पाओ...एक तुम्हारा ही इंतज़ार,बस एक तुमसे ही प्यार,यही मेरी जिन्दगी,ये सांसो का कारोबार,दूर-दूर रहकर, अब ना सताओ...सुनो, आओ ना, आ भी जाओ...महक है जेहन में,पहली मु...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
4

समुंदर खारा हो गया...

समुंदर खारा हो गया...-------------****--------=-----बैठ गया कुछ पल के लिए, मैं समुंदर के तीर...बाँट लूँ ये सोच कर,कुछ मन के अपने पीर...आने लगी क्षितिज से,जैसेप्रेम की बयार...किनारे तक आई  जिसमें, हो कर लहर सवार...छूने ल...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
3

मेंहदी का रंग गहरा है....

उसके हाथों की मेंहदी का रंग गहरा है,मिलूँ तो कैसे ज़माने का सख्त पहरा है..जरा लिहाज़ के रुख़सार सरक जाने दो,हम भी देखेंगे माहताब जो सुनहरा है..क्या कहें वस्ल की ये रात कितनी काली है,मेरी निगाह में तो...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
9

माँ.... सारा जहां है..

नीचे जमीं है फलक आसमां है,कितना ही सुंदर ये गुलिस्तां है..चमके गगन में चाँद और सितारे,तेरी मोहब्बत के बाकी निशां हैं..कानों में गूँजे है लोरी हरेक पल,आँखें जो खोलूँ सब कुछ धुआँ है..आँचल से तेरे लि...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
6

प्रेम गीत गाए हो तुम...

बरसों से प्यासी धरती पर, मेघा बन कर छाये हो तुम...---------------------------***-------------------------बरसों से प्यासी धरती पर, मेघा बन कर छाए हो तुम...आसां करने जीवन का सफर, साथी बनकर आए हो तुम...पहले भी चलती थी पुरवा, खिलती थी कलिया...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
6

एक रात है खमोश सी...

एक हरजाई के आये नहीं,एक तन्हाई के जाये नहीं...करवट बदलते रात में,ख़्वाब उनके क्यों आये नहीं..?एक उम्मीद है टूटे नहीं,एक आश जो छूटे नहीं...लहरें किनारे आ रही,फिर भँवर क्यों आये नहीं..?एक आईना ख़ामोश है,ए...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
11

आसमान सी आस...

बेतरतीब सी ख्वाहिशें, आसमान सी आस...-----------------------******----------------बेतरतीब सी ख्वाहिशें, आसमान सी आस...दूर क्षितिज सागर फैला, मिटती नहीं है प्यास...मुठ्ठी भर साँसे महज़, फिर मिट्टी बे मोल...परछाईं से सब रिश्ते, सत...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
6

सुबह सी मिली वो....

ढल ही गया दिन, शाम आते आते,-----------------***---------------ढल ही गया दिन, शाम आते आते,चलते नहीं तो, यूँ ही ठहर जाते...बहल तो गया दिल, कुछ पल को मौजूं,मिलते ना उनसे, तो दिल क्या लगाते...बारिश की बूंदें, लटों से हैं लिपटी,फ़न...  और पढ़ें
3 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
9

टूटे हुए तारे से तुम, ना दिल लगा लेना...

दिखे ढलता हुआ सूरज, तो मायूस ना होना,सफ़र से लौट वो शायद, अपने घर को आया है...कभी टूटे हुए तारे से तुम, ना दिल लगा लेना,अमानत है वो धरती की, चाहत ने बुलाया है...किसी रोज ग़र तनहा, हो आसमां में चाँद,समझ लेन...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
10

क्यूँ शर्मिन्दा हुआ जाये..?

बड़ी सिहरन सी होती है,अगर इल्ज़ाम लग जाये...सफाई देर तक देकर,क्यूँ शर्मिन्दा हुआ जाये..?ये मेरी काबिलियत है,चुभे हर पल जो दुश्मन को...कटघरे में खड़ा होकर,क्यूँ मुज़रिम सा जिया जाये..?कोई तो होगा वो इंसा...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
13

उम्मीदों के सौ सपने...

मेरी खामोशियाँ ही अब, मेरी बातें सुनाती हैं,दीवाना बन के तन्हाई, वो देखो गीत गाती हैं...कभी गुजरा था राहों से, मंज़िल की चाहत में,वही राहें पकड़ बाहें, मुझे मंज़िल दिखाती हैं...वक़्त ने करवट, बदल क्या ल...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
9

चीख रहे बस्तर के साल...

रोया हूँ फिर आज सुबक के...------------------***----------------रोया हूँ फिर आज सुबक के, हरियर चुनरी हुई है लाल...मेरे खातिर कितनी माँ, खोएंगे अभी अपने लाल..?मेरे मन की पीड़ा को, अब तो कुछ आराम मिले..?झुलस रही कोशल की बगिया, अमन...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
9

क्या मन कहुँ, क्या तन कहुँ...

क्या मन कहुँ, क्या तन कहुँ...-------------***------------क्या मन कहूँ, क्या तन कहूँ,सर्वस्व तेरा, ऐ वतन कहुँ...मेरा रोम रोम, है तेरी धरा,एक फूल मैं, तुझे चमन कहुँ...क्या मन कहुँ......तेरे बाज़ुओं में, वो जान है,थामे तिरंगा, म...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
7

सबब हम ने जाना इस बात का...

सबब हम ने जाना इस बात का...---------------***--------------सबब हम ने जाना इस बात का,बे ताअल्लुक़ सी मुलाक़ात का...दबाया हथेली तो शरमा गये,हसीं वाकया ये जुमेरात का...गली का किनारा ना भूला गया,कभी था गवाही मेरी बात का...हिना ...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
12

शबनमी सुरमई रात ढलने लगी...

शबनमी सुरमई रात ढलने लगी...---------------***---------------शबनमी सुरमई रात ढलने लगी,उम्मीदों का सूरज जवां हो गया...शिकारा सतह पे मचलने लगा,छूते ही लहर इक फ़ना हो गया...ज़ुल्फ़ है या घटाओं की जादूगरी,बिखरते ही दिलकश सम...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
8

वो हसीं वादियाँ.....

वो हसीं वादियाँ, हम मिले थे जहाँ...-----------------***------------------वो हसीं वादियाँ, हम मिले थे जहाँ,बात करने लगे, वो क़दमों के निशां...कभी गीत सुरमई, फिज़ाओं में थी,गुनगुनाता है आज, ये सारा जहां...क्यूँ खोलूँ मैं आँखें, ...  और पढ़ें
4 माह पूर्व
कुछ ऐसा भी... Kuchh Aisa Bhi...
8
Postcard
फेसबुक द्वारा लॉगिन  
हो सकता है इनको आप जानते हो!  
prafull kumar Bhati
prafull kumar Bhati
F6/9 durga caloni vikram cement khor.[Neemuch.] { m.p.},India
Chirkut Papu
Chirkut Papu
haryana,India
vivek srivastava
vivek srivastava
faridabad,India
ramprakash anant
ramprakash anant
agra,India
vinay kumar
vinay kumar
Delhi,India